जब केविन ने 'फ्री मेसन' को समझा जेल से मेसन को छुड़ाने की मुहिम!
ऑफिस की चाय की चुस्की, गपशप और कुछ अजीबोगरीब बातें—ये तीनों जब एक साथ मिल जाएं तो समझ लीजिए, कहानी बनने ही वाली है! वैसे तो हमारे दफ्तर में रोज़ कुछ न कुछ मज़ेदार सुनने को मिलता है, लेकिन जो किस्सा कल हुआ, उसे सुनकर तो पेट पकड़कर हँसी आ गई।
यकीन मानिए, ऐसी बातें सिर्फ फिल्मों या सोशल मीडिया पर ही सुनने को मिलती हैं, लेकिन जब आपके अपने सहकर्मी के मुँह से ऐसी 'क्रांतिकारी थ्योरी' निकल जाए, तो क्या हो! चलिए, आपको भी सुनाते हैं केविन की 'फ्री मेसन' वाली अतरंगी कहानी।
फ्री मेसन—क्या है असली माजरा?
पहले तो थोड़ा सा बैकग्राउंड—'फ्री मेसन' यानी 'मेसोनिक ऑर्डर'। आपने फिल्मों में या अंग्रेज़ी अखबारों में इस नाम को जरूर सुना होगा। भारत में तो लोग इसे किसी गुप्त समाज या रहस्यमयी क्लब के तौर पर जानते हैं, जैसे हमारे यहाँ कभी 'राजसी समाज' या 'मास्टरजी की गुप्त सोसाइटी' की कहानियाँ सुनाई जाती थीं। असल में, फ्री मेसन एक पुराना समाज है, जिसकी शुरुआत 16वीं-17वीं सदी में हुई थी, और इसका मकसद था समाज सेवा, भाईचारा और आत्मविकास।
अब आते हैं हमारे दफ्तर पर। एक दिन चाय के समय ग्रेग नाम के सहकर्मी ने 'फ्री मेसन' का जिक्र किया। बस, यहीं से कहानी में ट्विस्ट आ गया।
केविन की क्रांतिकारी सोच—'फ्री मेसन' है मेसन को छुड़ाने की मांग!
जहाँ सब सोच रहे थे कि कोई गुप्त मिशन, सरकार की साजिश या फिर एलियन की बात होगी, वहीं केविन ने ऐसा तीर चलाया कि सब सन्न! केविन बोले, "तुम जानते हो ये फ्री मेसन वाले असल में क्या कर रहे हैं?" सबको लगा, शायद अब कोई बड़ी सी थ्योरी सुनने को मिलेगी, लेकिन केविन ने बताया—"ये लोग असल में एक अपराधी G. Mason को छुड़ाने के लिए मुहिम चला रहे हैं! G, जो मेसन का पहला अक्षर है, उसका नाम ही उनके लोगो में है!"
अब भाई, ऐसी थ्योरी तो बॉलीवुड की कॉनस्पिरेसी फिल्मों में भी नहीं मिलती! केविन ने तो इंटरनेट की सारी 'वोक' और 'लिबरल' वाली बातें इकट्ठा करके एक नई कहानी गढ़ दी। ऑफिस में सबने चुपचाप सुन लिया, कोई बीच में नहीं बोला—लेकिन मन ही मन सब सोच रहे थे, "भाई, ये कौन सा गूगल है जो ऐसी जानकारी देता है?"
कम्युनिटी के कमेंट्स—मिर्च-मसाला, मज़ाक और मजेदार सुझाव
रेडिट पर जब ये किस्सा साझा किया गया, तो वहां भी कमेंट्स की बाढ़ आ गई। एक यूज़र ने लिखा, "ये तो बड़ा दिलचस्प है! अगर केविन ने खुद ये थ्योरी निकाली है, तो उसकी सोच वाकई अलग लेवल की है!" एक और ने चुटकी ली—"मेसन रीज़ नामक बच्चे को फ्री करने के लिए 1500 से ही तैयारी हो रही है!"
एक जनाब ने तो दक्षिण भारतीय फिल्मी अंदाज़ में कहा, "फ्री हैट" जैसे 'फ्री मेसन'—मतलब, किसी को जेल से छुड़ाने के चक्कर में हैं सब!
एक और मजेदार कमेंट था—"फ्री मेसन तो बस बड़े-बड़े लोगों का क्लब है, जहाँ लोग आराम से बैठकर गपशप करते हैं। ये कोई देश-दुनिया चलाने वाली संस्था नहीं।"
कुछ लोगों ने तो सलाह भी दी कि केविन को 'टिन फॉयल हैट' यानी सिर पर एल्यूमिनियम की टोपी पहननी चाहिए, ताकि उसकी थ्योरी और मजबूत हो जाए!
ऑफिस की दुनिया में ऐसे केविन हर जगह!
मानना पड़ेगा, हमारे ऑफिसों में एक 'केविन' जरूर होता है—जो हर बात में कॉनस्पिरेसी ढूंढ लेता है। जैसे बचपन में मोहल्ले के चाचा जी हर नई चीज़ को 'विदेशी साजिश' मान लेते थे, वैसे ही केविन ने 'फ्री मेसन' को सीधे-सीधे 'मेसन को छुड़ाओ' अभियान बना दिया।
एक पाठक ने तो यह भी लिखा, "काश, केविन बस मजाक कर रहा हो और बाद में सबको बताए कि ये सब उसने जानबूझकर किया था, लोगों की प्रतिक्रिया देखने के लिए!" वाकई, अगर ऐसा हो, तो केविन को तो 'ऑफिस का जोकर' घोषित कर देना चाहिए।
निष्कर्ष—दफ्तर की गपशप और फुलऑन मनोरंजन
अंत में, यही कहना चाहूँगा कि ऑफिस में ऐसे किस्से, ऐसी बातें ही तो असली मसाला हैं। 'फ्री मेसन' का रहस्य हो या चाय की प्याली में उठता बवंडर, मजा तभी आता है जब कोई केविन अपनी अनोखी सोच से माहौल हल्का कर दे।
क्या आपके ऑफिस में भी कोई ऐसा 'केविन' है? या आपने कभी ऐसी अजीब थ्योरी सुनी है? नीचे कमेंट में जरूर शेयर करें। और हाँ, अगली बार जब कोई 'फ्री' से शुरू होने वाली बात करे, तो हँसना मत भूलिएगा!
मूल रेडिट पोस्ट: Kevin thinks that Free Mason is a petition to free a criminal named Mason