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जब क्लब वाले मालिक की चटक पीली कार ने होटल वालों को तंग किया!

एक होटल का सिनेमाई दृश्य, जहाँ एक हलचल भरे नाइट क्लब के पास शांति और शोर की समस्याएँ हैं।
हमारे होटल के बाहर की इस जीवंत दृश्यता में डूब जाएँ, जहाँ नाइट क्लब के उत्सवधारी शांति को बाधित करते हैं। हमारे नवीनतम पोस्ट में नाइटलाइफ़ से होने वाली चुनौतियों के बारे में जानें!

कभी-कभी होटल की नौकरी फिल्मी मसालेदार कहानी से कम नहीं होती! होटल के रिसेप्शन की ड्यूटी तो वैसे ही सब्र का इम्तहान है, लेकिन जब आस-पास कोई रंगीन क्लब और उसके नखरैल मालिक हों, तब मज़ा ही कुछ और है। सोचिए, आप होटल चला रहे हैं, और सामने क्लब का ऊँचा-ऊँचा बजता म्यूजिक, नाचते-गाते लोग और उनकी गाड़ियाँ आपकी पार्किंग में घुस आती हैं। बस, ऐसी ही एक दिलचस्प दास्तान है आज की – जिसमें एक चमचमाती पीली लैंबॉर्गिनी (जिसे मज़ाक में ‘स्किटल’ कहा गया, मतलब रंगीन टॉफी!) होटल की पार्किंग में आकर फँस गई!

होटल और क्लब की जंग: पार्किंग का ‘महाभारत’

होटल के रिसेप्शनिस्ट (लेखक) ने बताया कि उनके होटल के साथ क्लब, बार और रेस्टोरेंट भी हैं। क्लब वाले अक्सर परेशानियाँ खड़ी कर देते हैं – कभी टॉयलेट के लिए जिद, तो कभी मुफ्त पार्किंग के लिए। हमारे यहाँ कोई मेहमान नहीं, फिर भी क्लब के लोग बेशर्मी से घुस आते हैं। टॉयलेट वाला मसला तो रिसेप्शनिस्ट ने बड़े जुगाड़ू अंदाज़ में सुलझा लिया – क्लब वालों को पहचानना आसान हो गया, क्योंकि उनका अंदाज़ ही अलग था। बस, सीधे मना कर दो!

लेकिन असली सिरदर्द थी क्लब वालों की गाड़ियाँ। होटल के लोडिंग/अनलोडिंग ज़ोन में आकर पार्क कर देते, ताकि क्लब की महंगी वैलेट या पेड पार्किंग से बच जाएँ। होटल वालों ने CCTV कैमरे लगा दिए, ताकि पता चल सके कौन पार्किंग में आकर होटल में घुसा और कौन क्लब में चला गया। धीरे-धीरे सख्ती के बाद क्लब वालों को समझ आ गया – यहाँ पार्क किया तो गाड़ी सीधी टोइंग यार्ड में जाएगी, और मोटा जुर्माना भरना पड़ेगा!

चटक पीली ‘स्किटल’ और मालिक का अहंकार

एक दिन (मंगलवार को, जब क्लब आमतौर पर बंद रहता है) रिसेप्शनिस्ट ने देखा कि क्लब मालिक की चमचमाती पीली लैंबॉर्गिनी होटल की पार्किंग में खड़ी है। नई शिफ्ट में आई साथी को पता ही नहीं था कि ये किसकी गाड़ी है। रिसेप्शनिस्ट ने फौरन पहचान लिया – आखिर ये रंग-बिरंगी स्पोर्ट्स कार और उसका खास नंबर प्लेट किसका है, सब जानते हैं! क्लब मालिक हमेशा अपने वैलेट से गाड़ी पार्क करवाता था और झूठ बोल देता, “होटल वालों ने इजाजत दे दी है।” मगर असल में होटल वालों ने कभी परमिशन दी ही नहीं।

रिसेप्शनिस्ट ने सिक्योरिटी गार्ड को भेजा कि क्लब वैलेट से बोले – “अगर 15 मिनट में वो चमचमाती स्किटल यहाँ से नहीं हटी, तो सीधा टो हो जाएगी!” क्लब वालों ने अहंकार में जवाब दिया, “आज बस एक रात है, मालिक VIP हैं, थोड़ी मेहरबानी कर दो।” रिसेप्शनिस्ट ने अपने जीएम (जनरल मैनेजर) से बात की – और साफ़ शब्दों में जवाब मिला, “कोई रियायत नहीं!” गार्ड ने क्लब वालों को आखिरी चेतावनी दी।

न्याय की जीत: जब स्किटल टो हुई और मालिक का गुस्सा सातवें आसमान पर

अब असली फिल्मी सीन शुरू हुआ। रिसेप्शनिस्ट ने देखा कि टो ट्रक आया, पीली कार उठा ली। क्लब मालिक दौड़ते हुए आया, ड्राइवर से गिड़गिड़ाया, आखिरकार 200 डॉलर का ‘ड्रॉप फी’ देकर गाड़ी वापस ली और पार्किंग से हटाया। अगले दिन क्लब मालिक होटल में घुसा – गुस्से में फूला हुआ! बोला, “या तो मेरे पैसे वापस करो या होटल में एक रात मुफ्त दो, वरना कोर्ट में घसीटूँगा!”

लेकिन जीएम ने भी कमाल का जवाब दिया – “ना पैसे वापस होंगे, न फ्री रात मिलेगी। ऊपर से आप होटल में कभी ठहर नहीं सकते, क्योंकि आप तो DNR (Do Not Rent) लिस्ट में हैं!” क्लब मालिक को पहले भी कई बार चेतावनी दी जा चुकी थी, CCTV फुटेज भी थी, और सारी बातें रिकॉर्ड पर थीं। मालिक गुस्से में बड़बड़ाता बाहर चला गया।

पाठक की राय: मज़ेदार कमेंट्स और हिंदी मसाले

रेडिट कम्युनिटी ने इस किस्से पर खूब मज़े लिए। एक पाठक ने कहा – “भैया, DNR लिस्ट पर कैसे पहुँचे, इसकी कहानी भी सुनाओ!” (जिस पर लेखक ने वादा किया, अगली बार पूरी मसालेदार कहानी सुनाएँगे)। किसी ने तंज कसा, “ऐसे मालिक के नीचे काम करने वाले वैलेट कितने परेशान होते होंगे!” एक और कमेंट था – “अगली बार कोई चेतावनी मत देना, सीधा टो कर दो!” कई लोगों ने क्लब मालिक की ‘चटक पीली स्किटल’ पर हँसी उड़ाई और कहा – अब जब भी लैंबॉर्गिनी दिखेगी, दिमाग में यही नाम आएगा!

एक पाठक ने अपने अनुभव भी शेयर किए, “हमारे यहाँ भी एक बार फरारी टो करनी पड़ी थी, टो ट्रक वाले डर के मारे हाथ नहीं लगा रहे थे!” हिंदी में कहें तो – अमीरी का घमंड और नियम तोड़ने की आदत, दोनों की हवा एक दिन निकल ही जाती है।

निष्कर्ष: नियम सबके लिए बराबर!

इस किस्से से एक बात तो साफ़ हो गई – चाहे क्लब का मालिक हो या आम इंसान, नियम-कायदे सबसे ऊपर हैं। होटल वालों की सख्ती और जीएम का दमदार रवैया देखकर सच में दिल खुश हो गया। ऐसे घमंडी लोगों को जब उनके ही अंदाज़ में जवाब मिलता है, तो बाकी सबको भी सबक मिलता है।

आप क्या सोचते हैं – क्या कभी आपके ऑफिस या कॉलोनी में भी ऐसा कोई ‘स्किटल’ टाइप घुसपैठिया आया है? नीचे कमेंट में अपना मजेदार किस्सा जरूर बाँटिए! और हाँ, अगली बार DNR लिस्ट वाली कहानी आए, तो चाय-पकोड़े तैयार रखना!


मूल रेडिट पोस्ट: All You Had To Do Was Move Your Skittle Out Of My Lot!!