विषय पर बढ़ें

जब किराएदार ने ‘छोटी बदला’ से बड़ा मजा लिया: एक छात्र की अनोखी कहानी

व्यस्त शहर में छात्रों के जीवन और मित्रता को दर्शाने वाला एक आरामदायक साझा घर जिसमें आठ व्यक्तिगत कमरे हैं।
यह चित्र एक जीवंत साझा घर का यथार्थवादी चित्रण है जहाँ छात्र समुदाय पाते हैं। यह छवि छात्र जीवन की आत्मा को कैद करती है, विविध व्यक्तित्वों से भरे एक हलचल भरे वातावरण में बनाई गई अनूठी यादों और अनुभवों को दर्शाती है।

कहते हैं, ‘न्याय देर से मिले तो भी अच्छा है, लेकिन कभी-कभी तो इंतजार ही बदले की आग को और तेज़ कर देता है।’ कुछ ऐसी ही मज़ेदार, चुटीली और थोड़ी सी शरारती कहानी है एक युवा छात्र की, जिसने अपने साथ हुई नाइंसाफी का हिसाब पूरी तरह देसी अंदाज़ में चुकाया। अगर आपको भी कभी किसी ने ठगा हो, तो आज की ये कहानी आपको हँसने के साथ-साथ सोचने पर भी मजबूर कर देगी!

‘बड़े कमरे’ के सपने और ज़िंदगी की हकीकत

अब सोचिए ज़रा—जब आप पढ़ाई के आखिरी साल में हों, सिर पर परीक्षा का बोझ हो और ऊपर से किराए के मकान में बड़ा कमरा मिलना तय हो, लेकिन पहुंचते ही पता चले कि आपका कमरा कोई और हथिया चुका है। यही हुआ हमारे नायक के साथ। लंदन जैसे महंगे शहर में आठ कमरों के एक साझा मकान में, उन्होंने पहले मंजिल वाले बड़े कमरे के लिए एडवांस किराया दिया, लेकिन जब पहुंचे तो किसी और ने वो कमरा ले लिया था। मजबूरी में उन्हें नीचे, ज़मीन के पास वाला छोटा कमरा मिल गया।

अब आप कहेंगे—‘भाई, एजेंसी से शिकायत कर देते!’ लेकिन ज़िंदगी उतनी आसान कहाँ होती है! पढ़ाई का प्रेशर, परिवार में दुख, और ऊपर से नए-नए लोग—ऐसे में हर कोई रणबांकुरे की तरह मोर्चा नहीं संभाल सकता। हमारे छात्र ने भी सोचा—चलो, छोटा कमरा ही सही, पढ़ाई हो जाए बस!

‘मियाँ की जूती, मियाँ के सिर’—किसी और ने मेरा हक चुरा लिया!

अब बड़ा कमरा लिए बैठा वो किराएदार, जो शायद अपने गर्लफ्रेंड के घर ज़्यादा रहता था, कभी-कभार आता और सीधे कमरे में घुस जाता, किसी से बात तक नहीं करता। छात्र ने कई बार नोट लिखे, सामने बात करने की कोशिश की, लेकिन साहब तो ऐसे थे जैसे ‘ढोल पीटने पर भी न जागे’।

यहाँ एक मज़ेदार बात Reddit के एक पाठक ने कही—‘जब इतना नुकसान हो रहा था, एजेंसी को क्यों नहीं बताया?’ (u/TenaCVols)। इस पर खुद छात्र ने जवाब दिया—‘भैया, उस उम्र में दुनिया की समझ नहीं थी, ऊपर से दिमाग भी पढ़ाई में उलझा था। हर बात का हल उसी वक्त ढूंढ लेना हर किसी के बस की बात नहीं।’

‘बदला’ भी क्या चीज़ है—छोटी सी हरकत, बड़ी सी खुशी!

साल गुजर गया। पढ़ाई पूरी होते ही जब छात्र का बोरिया-बिस्तर बांधने का समय आया, तो आखिरी कोशिश के तौर पर उन्होंने फिर से उस किराएदार से बात करनी चाही। हमेशा की तरह साहब बोले—‘अभी जा रहा हूँ, बाद में बात करेंगे।’ और फिर गायब!

अब यहाँ से शुरू होती है असली ‘पेटी रिवेंज’ की कहानी। हमारे छात्र ने सोचा—‘अब तो कुछ करना ही पड़ेगा।’ उन्होंने अपने कुत्ते की एक बड़ी सी पॉटी उठाई (जी हाँ, पढ़कर घिन आ सकती है, लेकिन बदला कुछ इसी तरह का था!), और सीधा उस बड़े कमरे के बिस्तर पर छोड़ दी। इतना ही नहीं, अलमारी में और सूट की जेबों में बदबूदार मछलियाँ भी छुपा दीं! सोचिए, जब वो किराएदार वापस आया होगा, तो उसके चेहरे का रंग कैसा हुआ होगा!

एक पाठक (u/GreyGnome) ने तो इस घटना को ‘पेटीनेस की परतों’ की मिसाल बताया—‘बदला भी ऐसा कि सामने वाला समझ भी न सके और हमेशा याद रखे।’

‘बदला’ पर बहस—क्या सही, क्या गलत?

Reddit पर इस कहानी को पढ़कर लोगों ने खूब मसालेदार टिप्पणियाँ दीं। किसी ने कहा—‘एजेंसी से शिकायत करनी चाहिए थी।’ तो किसी ने कहा—‘तुमने तो इंटरनेट जीत लिया!’ (u/redthrull)। एक और पाठक (u/cynic_male) बोले—‘मुझे तो अच्छा लगा, पॉटी और मछली दोनों का जवाब शानदार!’

कई लोग ये भी बोले कि—‘ऐसा करना बचकाना है, सीधे-सीधे बात करनी चाहिए थी।’ लेकिन खुद छात्र ने जो लिखा, वो दिल को छू जाता है—‘हर कोई 21 साल की उम्र में इतना समझदार नहीं होता। कभी-कभी हालात, दुख और तनाव में इंसान सीधा रास्ता नहीं चुन पाता।’

क्या सीखें—कभी-कभी छोटी-छोटी हरकतें भी बड़ा सुकून देती हैं

ये कहानी मजेदार तो है ही, पर हमें ये भी सिखाती है कि हर परेशानी का हल हमेशा ‘व्यावहारिक’ या ‘कानूनी’ नहीं होता। कभी-कभी इंसान के पास न समय होता है, न हिम्मत—बस एक चुटकी बदमाशी ही डूबते मन को हँसा देती है।

तो, अगली बार जब आपके साथ कोई छोटा या बड़ा धोखा हो जाए, तो याद रखिए—‘बदला’ हमेशा बड़ा नहीं होता, पेटी सा भी हो तो सुकून दे सकता है!

पाठकों से सवाल

क्या आपके साथ भी कभी ऐसी कोई घटना हुई है जहाँ आपने ‘पेटी रिवेंज’ लिया हो? या आप होते तो क्या करते? नीचे कमेंट में अपनी कहानी ज़रूर लिखिए—क्योंकि हर किसी के पास कोई ना कोई मजेदार किस्सा जरूर होता है!


मूल रेडिट पोस्ट: Got my money's worth