जब कॉफी स्टिर स्टिक बना ऑफिस का IT जादूगर
ऑफिस में अगर कभी टेक्निकल समस्या आ जाए, तो लोग अक्सर IT वाले भैया या दीदी को ढूँढते हैं। कभी-कभी तो ऐसा लगता है, जैसे उनके पास कोई जादू की छड़ी हो, जो सब ठीक कर देती है। लेकिन क्या हो अगर उस जादू की छड़ी की जगह एक मामूली कॉफी स्टिर स्टिक हो? जी हाँ, आज हम आपको एक ऐसी ही कहानी सुनाने जा रहे हैं, जिसमें कॉफी पीने का सामान बना ऑफिस का सुपरहीरो।
IT सपोर्ट की दुनिया में जादू और जुगाड़
कुछ साल पहले एक ऑफिस में नेटवर्क प्रिंटर ने बगावत कर दी। IT सपोर्ट की टीम बुरी तरह परेशान थी—प्रिंटर चालू ही नहीं हो रहा था। बस पंखा घूमता और फिर सब शांत। हमारे कहानी के नायक, एक जूनियर IT एनालिस्ट, हर मुमकिन तरीका आज़मा चुके थे—पावर केबल चेक किया, सॉकेट बदला, रीसेट किया, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात!
आखिरकार, वह हारकर सीनियर साथियों के पास पहुँचे। वहाँ का माहौल कुछ अलग था—सभी के चेहरे पर mischievous मुस्कान, जैसे कोई पुरानी फिल्म का सस्पेंस सीन चल रहा हो। किसी ने फुसफुसाकर पूछा, "क्या अब वक्त आ गया है?" और सब हँस पड़े। सीनियर एनालिस्ट ने इशारे से हमारे नायक को ब्रेक रूम में बुलाया, वहाँ से एक साधारण कॉफी स्टिर स्टिक उठाया, और बड़े आत्मविश्वास से प्रिंटर के पीछे डाल दिया। साथ में पावर बटन दबाया—और प्रिंटर जैसे नींद से जाग गया!
जुगाड़ का कमाल और छुपा हुआ ज्ञान
अब आप पूछेंगे, आखिर ये कॉफी स्टिर स्टिक ने किया क्या? दरअसल, उस प्रिंटर मॉडल में एक पुरानी समस्या थी—फैन के सर्किट में थोड़ी गड़बड़ी, जिससे पावर ऑन नहीं होता था। स्टिर स्टिक से फैन की घुमाव को रोकना पड़ता था, तब जाकर मशीन चालू होती थी। यह बात सिर्फ पुराने IT वालों को मालूम थी—जिन्होंने शायद उस मशीन के साथ दिन-रात गुजारे थे।
एक यूज़र ने सही ही लिखा, "ये बड़ी 'स्टिरिंग' कहानी है!" (मूल अंग्रेज़ी pun का हिंदी तड़का)। तो कभी-कभी तकनीक से ज्यादा काम आता है अनुभव और थोड़ा सा जुगाड़। किसी और ने मज़ाक में लिखा, "जब भी मैं ये कहानी सुनाता हूँ, सबकी नींद खुल जाती है।" यही तो है IT वालों का असली टैलेंट—समस्या को कहानी बना देना।
ऐसा जादू सिर्फ इंडिया में ही नहीं
टेक्निकल सपोर्ट के किस्से तो हर जगह हैं। एक दूसरे कमेंट में किसी ने अपनी पुरानी Epson डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर की कहानी सुनाई—जहाँ एक सीनियर सेक्रेटरी ने शोर के लिए शिकायत की, और टेक्नीशियन ने केबल को लपेट-लपेटकर 'शोर कम' कर दिया! असल में केबल लपेटने से कोई फर्क नहीं पड़ता था, बस मन का खेल था। ऐसे ही एक सज्जन ने पुराने स्टीरियो को चालू करने के लिए कैसेट प्ले और रिकॉर्ड दोनों बटन दबाने की जुगाड़ बताई।
हमारे यहाँ भी तो ऐसा ही होता है—कभी पंखा बंद करने के लिए चप्पल की मदद, तो कभी टीवी का रिमोट टीवी के ऊपर ठोंक कर ठीक करना। याद आया, बचपन में कैसे रेडियो की आवाज़ ठीक करने के लिए एंटीना को हिलाते रहते थे, या डब्बे के ऊपर थपकी मारते थे!
IT वालों के जादुई औज़ार
एक कमेंट में किसी ने बताया कि वो हमेशा एक पेपरक्लिप और hemostat साथ रखते थे—क्योंकि प्रिंटर के एक छोटे से स्प्रिंग को सही जगह पर लाने के लिए यही औज़ार सबसे काम आते थे। किसी ने तो सर्किट बोर्ड को ओवन में बेक करके ठीक कर दिया, और उसकी फोटो अपनी बॉस को apron और oven mitts में भेजी—बॉस ने भी खूब ठहाके लगाए। ये सब सुनकर लगता है, IT सपोर्ट वाले सच में 'हरफनमौला' होते हैं—कभी जादूगर, कभी रसोइया, कभी इंजीनियर।
ऑफिस की जिंदगी में जुगाड़ का महत्त्व
भारत में ऑफिस का माहौल भी कुछ ऐसा ही है—जहाँ "काम चलाना" और "जुगाड़" एक कला है। चाहे वो प्रिंटर हो, कंप्यूटर हो या दरवाजा—कभी-कभी एक छोटी सी चीज़, जैसे कॉफी स्टिर स्टिक, पूरी समस्या का हल बन जाती है। यही वजह है कि जब IT वाले अपने बैग में अजीब-अजीब चीज़ें लेकर चलते हैं, तो समझ लीजिए, वो कोई जादू ही करने वाले हैं!
निष्कर्ष: अगली बार जब IT भैया दिखें...
तो अगली बार जब ऑफिस में कोई IT सपोर्ट वाला कॉफी स्टिर स्टिक, पेपरक्लिप या कोई और चीज़ लिए घूमता दिखे, तो समझ जाइए, वो कोई टोटका या तंत्र-मंत्र करने नहीं जा रहा, बल्कि आपके डिजिटल जीवन को फिर से पटरी पर लाने के लिए तैयार है। और हाँ, कभी-कभी सबसे आसान हल ही सबसे जादुई साबित होता है।
क्या आपके साथ भी ऐसा कोई अनोखा IT या जुगाड़ू किस्सा हुआ है? कमेंट में जरूर बताएँ—कौन जाने, आपका अनुभव भी किसी की समस्या का हल बन जाए!
मूल रेडिट पोस्ट: The Coffee Stir Stick Solution