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जब कंपनी छोड़ने वाले ने कहा 'तू बेवकूफ है', लेकिन बाज़ार ने दे दिया करारा जवाब!

आत्मविश्वासी सॉफ़्टवेयर इंजीनियर की एनिमे चित्रण, जो टीम का नेतृत्व करते हुए कॉर्पोरेट चुनौतियों का सामना कर रहा है।
इस जीवंत एनिमे-प्रेरित दृश्य में, हमारा सॉफ़्टवेयर इंजीनियर टीम लीड के रूप में जिम्मेदारी संभालता है, संदेह के बावजूद आगे बढ़ता है। चुनौतियों से भरे कॉर्पोरेट परिदृश्य में धैर्य और सफलता की यात्रा में शामिल हों!

कामकाजी दुनिया में अक्सर ऐसा होता है कि कोई नया व्यक्ति आता है, और पुराने कर्मचारी उसे ताना मारते हैं – “यहाँ कुछ नहीं रखा, फालतू कंपनी है, कोई भविष्य नहीं है।” लेकिन कभी-कभी किस्मत और मेहनत मिलकर ऐसी कहानी लिख जाती है, जिसे पढ़कर मज़ा भी आता है और सीख भी मिलती है।

आज की कहानी भी कुछ ऐसी ही है – एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर, जिसने एक कंपनी को डूबने से बचाया, और उसके लिए सबसे बड़ा सबूत बना शेयर बाज़ार!

"यहाँ क्यों आया, तू तो गया काम से!"

सोचिए, आप एक नई कंपनी में टीम लीड बनकर गए हैं। जिस बंदे की जगह आप आए हैं, वो जाते-जाते आपको खुलेआम बेवकूफ कहता है, “भाई, यह कंपनी तो कचरा है, बस कुछ ही दिन और बचे हैं। मैं तो निकल लिया, अब देखो तेरा क्या होता है!” ऊपर से हर सुबह आपको याद दिलाता है कि “देख, हमारी कंपनी का शेयर गिर रहा है, मेरी नई कंपनी का शेयर तो आसमान छू रहा है!”

हमारे इंजीनियर साहब (मान लीजिए नाम अमित) ने भी यही सुना, लेकिन उन्होंने कानों में तेल डाल लिया। अब अमित ने ये ताना सुना, मुस्कराए, और चुपचाप काम में जुट गए।

“आग बुझाओ, दुखियारे का हाल सुधारो”

अमित को जॉइन करते ही समझ आया कि कंपनी में तो वाकई आग लगी पड़ी है – कर्मचारी थके-हारे, क्लाइंट्स नाराज़, आधे-अधूरे जुगाड़ू समाधान (जैसे हमारे देश में बिजली कटे तो तार जोड़ना), और ऊपर से बॉस लोग ख्वाबों में जी रहे हैं – “सब बढ़िया है!” अमित ने सबसे पहले टीम का हौसला बढ़ाया, क्लाइंट्स को भरोसा दिलाया, और असली समस्याओं की जड़ पकड़ी।

जैसे हमारे घर में कोई पुरानी चीज़ मिल जाए, तो अम्मा बोलती हैं – “पहले सफाई कर, फिर इस्तेमाल कर।” अमित ने भी हर अधूरी चीज़ को ठीक किया, पुराने कर्मचारी की आधी-अधूरी ‘जुगाड़’ को दुरुस्त किया, और धीरे-धीरे सबकी हालत सुधरने लगी।

“बाज़ार ने दे दिया असली तमाचा”

अब असली ट्विस्ट – एक साल बाद अमित ने यूं ही शेयर देखे। अरे! कंपनी ए (जहाँ अमित काम कर रहे हैं) का शेयर 26% ऊपर! और पुराने कर्मचारी की नई कंपनी बी का शेयर 26% नीचे!!

यहाँ तो गजब हो गया। जैसे बॉलीवुड फिल्मों में हीरो को आख़िर में जीत मिलती है, वैसे ही यहाँ भी मेहनत रंग लाई। अमित ने न तो पुराने कर्मचारी को ताना मारा, न ही कोई बदला लिया। बस शांति से काम किया, और बाजार ने खुद ही उस घमंडी को जवाब दे दिया।

रेडिट पर एक यूज़र ने लिखा, “कभी-कभी अगर हर जगह गंदगी लगती है, तो अपने जूते भी देख लेना चाहिए।” (यानी हर जगह समस्या दिखे, तो शायद समस्या आप ही में है)। एक और ने चुटकी ली, “अगर कोई सबको बुरा कहता है, तो याद रखना, वो तेरे बारे में भी दूसरों से बुरा ही कहेगा।”

और एक ने तंज कसा – “अब तो पुराने कर्मचारी को LinkedIn पर सालगिरह की बधाई भेज दो, और साथ में शेयर के आँकड़े भी!”

“बदला लेने का सबसे बढ़िया तरीका – चुप्पी!”

कुछ लोगों का मानना था, “सबसे क्लासी बदला है – कुछ मत बोलो! जो होना था, हो गया। बाजार ने जवाब दे दिया।” यही बात हमारे यहाँ भी कही जाती है – “चुप्पी सबसे बड़ी जवाबी कार्रवाई है।”

हालांकि, दिल तो करता है कि अमित पुराने कर्मचारी को मिठाई का डिब्बा और एक पर्ची भेजें – “भाई, अब देख लो, किसकी किस्मत चमकी!” लेकिन आखिर में अमित ने वही किया जो समझदारी है – अपने काम से जवाब दिया, और दूसरों की बुराई करने वालों को खुद ही अपनी करनी का फल भोगने दिया।

“सीख – हर मौके में छिपा है एक नया मौका!”

इस कहानी से हमें यही सीखने को मिलता है – जब कोई आपको कहे कि “तुमसे कुछ नहीं होगा”, तो उसे गलत साबित करने के लिए दुनिया को बताने की जरूरत नहीं। मेहनत करो, इरादे मजबूत रखो, और बाकी काम किस्मत और मेहनत खुद कर देती है।

जैसे हमारे गाँव में कहते हैं, “गाय बिन बछड़ा नहीं देती, और मेहनत बिन तरक्की नहीं मिलती।” इस इंजीनियर ने मेहनत की, कंपनी को बचाया, और पुराने कर्मचारी को बिना एक शब्द कहे उसकी औकात दिखा दी।

आपके साथ भी ऐसा हुआ है?

क्या कभी किसी ने आपको ताना मारा है, और बाद में बाज़ार या किस्मत ने उन्हें जवाब दिया? अपने अनुभव नीचे कमेंट में जरूर लिखें! और अगर आपको यह कहानी पसंद आई, तो शेयर करें – हो सकता है, किसी और की भी हिम्मत बंध जाए!


मूल रेडिट पोस्ट: Took over a role after being told I was an idiot for it... turns out the market disagreed