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जब 'कनाडाई सिक्के' ने बिगाड़ा अमीर ग्राहक का मूड – एक दुकानदार की छोटी-सी बदला कहानी

किताबों की दुकान में एक असभ्य ग्राहक, जो कनाडाई सिक्के स्वीकार करने से मना कर रहा है, तनावपूर्ण स्थिति को दर्शाते हुए।
यह सिनेमाई चित्र खुदरा में एक तनावपूर्ण क्षण को दर्शाता है, जब एक असभ्य ग्राहक फोन कॉल पर कैशियर को नजरअंदाज कर रहा है। यह ग्राहक सेवा की चुनौतियों और उससे जुड़ी यादगार अनुभवों को उजागर करता है।

दुकान पर काम करना वैसे ही कम चुनौतीपूर्ण नहीं होता, ऊपर से अगर कोई ग्राहक तमीज़ छोड़ दे तो मानो सोने पे सुहागा! ऐसी ही एक कहानी सामने आई है, जिसमें एक दुकानदार ने एक बेहद अमीर और बदतमीज़ ग्राहक को उसके बुरे व्यवहार का अनोखा जवाब दिया – और वह भी सिर्फ़ ‘कनाडाई सिक्के’ के बहाने के साथ!

हमारे यहाँ भी तो जब कभी कोई चिल्लर में नेपाल, भूटान या यूएई का सिक्का थमा जाता है, तो दुकानदार पहले तो हंसते हैं, फिर गुस्सा भी हो जाते हैं। लेकिन इस कहानी में दुकानदार ने जो किया, उस पर तो आप भी मुस्कुरा देंगे।

अमीर इलाके की दुकान और बदतमीज़ ग्राहक

करीब 15 साल पहले की बात है। अमेरिका के एक बेहद अमीर इलाके में एक किताबों की दुकान थी, जहाँ एक नौजवान दुकानदार काम करता था। उसके अनुसार, रोज़ाना कई तरह के ग्राहक आते थे, लेकिन उस दिन एक महिला आई जो फोन पर बात करती हुई, घमंड से भरी हुई दुकान में घुसी। ज़रा सोचिए, हमारे यहाँ जैसे लोग फोन पर बात करते हुए सब्ज़ीवाले से भाव-ताव कर लेते हैं, वैसे ही वह महिला किताब खरीद रही थी और दुकानदार की बातों को इग्नोर कर रही थी।

महिला ने फोन पर अपने दोस्त से कहा, "मेरे पास कनाडा की ट्रिप से बहुत सारे सिक्के बचे हैं, अब तक उनसे पीछा नहीं छूटा!" फिर क्या था, उसने जानबूझकर अपने पर्स से कनाडाई सिक्के निकालकर बिल देने की कोशिश की। आमतौर पर दुकानदार ऐसे 1-2 सिक्के देख कर अनदेखा कर देते हैं – जैसे हमारे यहाँ कोई एक रुपया का विदेशी सिक्का पकड़ाए, तो भी दुकानदार कभी-कभी ले ही लेते हैं। लेकिन इस बार दुकानदार को महिला का व्यवहार खटक गया।

जब दुकानदार ने दिखाई अपनी 'छोटी-सी बदला' वाली चतुराई

दुकानदार ने मुस्कुराकर कहा, "माफ़ कीजिए मैम, हम ये सिक्के नहीं ले सकते, ये अमेरिका की करेंसी नहीं है।"

महिला ने नाक सिकोड़ते हुए कहा, "क्या फर्क पड़ता है! सारे सिक्के तो एक जैसे दिखते हैं।"

दुकानदार ने फिर विनम्रता से लेकिन सख्ती से कहा, "माफ़ कीजिए, ये स्टोर की पॉलिसी है। विदेशी करेंसी लेना मना है।"

महिला की शक्ल देखने लायक थी – उसने आँखें घुमा लीं, गुस्से में बड़बड़ाई, और फिर आखिरकार अमेरिकी सिक्के निकाले। दुकानदार को इस छोटी-सी 'पेटी रिवेंज' पर तसल्ली मिली। आखिरकार, बदतमीज़ी का थोड़ा-बहुत जवाब तो बनता है ना!

दुनिया भर में 'विदेशी सिक्के' का झंझट

यह कहानी केवल अमेरिका-कनाडा तक सीमित नहीं है। कमेंट्स में एक यूज़र ने कहा, "अमेरिकी लोग जब कनाडा में अमेरिकी सिक्के देने की कोशिश करते हैं तो वहां के दुकानदार भी मना कर देते हैं। भाई, गलत देश में अपनी मुद्रा चलाने की आदत कहाँ से आई?"

एक और यूज़र ने मज़ेदार अंदाज़ में लिखा, "कनाडा में लोग बोलते हैं, हम तो ले लेंगे, लेकिन 30% ज्यादा कीमत लगेगी!" सोचिए, जैसे आप भारत में नेपाल का नोट चलाएं और दुकानदार बोले – भाई, अब 30% एक्स्ट्रा दो!

किसी ने लिखा, "मुझे तो काउंटर की ड्रा में हर देश के सिक्के मिलते थे, सबसे दिलचस्प कलेक्शन बन जाती थी।" तो वहीं कोई बोला, "हमारे यहाँ भी कई बार सिक्के मिल जाते हैं, हम भी ज़्यादा फर्क नहीं करते – लेकिन कोई जानबूझकर दे तो गुस्सा आ जाता है।"

संस्कार और व्यवहार – ग्राहक और दुकानदार दोनों के लिए ज़रूरी

इस घटना से एक बात तो साफ़ है – चाहे अमेरिका हो, भारत या कनाडा, तमीज़ और इंसानियत हर जगह मायने रखती है। कई लोगों ने इस बात पर सहमति जताई कि दुकानदार भी इंसान हैं, और ग्राहक का व्यवहार अच्छा होना चाहिए।

एक कमेंट में लिखा था, "ग्राहक जब काउंटर पर फोन में लगे रहते हैं, तो लगता है जैसे सामने वाला इंसान नहीं है!" यह बात हमारे यहाँ के बाज़ार और दुकानों पर भी खूब लागू होती है।

अंत में, दुकानदार का यह छोटा-सा बदला कोई बड़ी दुश्मनी नहीं थी, बस एक हल्का सा 'सबक' था कि दूसरों की इज्ज़त करना सीखिए, वरना छोटी-छोटी बातों में फँसना पड़ सकता है।

निष्कर्ष: आपकी क्या राय है?

तो दोस्तों, यह तो थी एक दुकान और उसके बदतमीज़ ग्राहक की कहानी, जिसमें एक छोटे से सिक्के ने बड़ा सबक सिखा दिया। क्या आपने कभी किसी विदेशी सिक्के या नोट को लेकर ऐसी कोई मजेदार या अजीब घटना देखी है? या आपको भी कभी किसी ग्राहक या दुकानदार ने यूँ ही 'पेटी रिवेंज' दी हो?

अपने अनुभव नीचे कमेंट में ज़रूर शेयर करें! और याद रखिए – चाहे दुकान हो या जीवन, थोड़ा सा विनम्र रहना हर किसी को बेहतर बना देता है।


मूल रेडिट पोस्ट: Told rude lady we couldn’t accept Canadian coin