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जब ऑफिस में काम न हो, फिर भी तनख्वाह मिले: आईटी की दिलचस्प कहानी

पुरानी ब Banyan Vines प्रणाली का प्रबंधन कर रहे एक युवा सिस्टम प्रशासक का कार्टून 3डी चित्रण।
यह मजेदार कार्टून-3डी चित्र एक पुराने युग की भावना को दर्शाता है, जहां एक युवा सिस्टम प्रशासक Banyan Vines नेटवर्क की चुनौतियों का सामना कर रहा था, जब तक कि Windows NT की ओर संक्रमण नहीं हुआ। तकनीकी पुरानी यादों की एक यात्रा!

कभी सोचा है कि ऑफिस में बैठकर इंटरनेट चलाओ, किताब पढ़ो और फिर भी पूरी तनख्वाह मिल जाए? हां, सुनने में अजीब लगता है, पर आज की कहानी कुछ ऐसी ही है। ये कहानी है एक युवा सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर की, जो एक बड़े कॉरपोरेट ऑफिस में काम करता था। उसका मुख्य काम था एक पुराने नेटवर्क सिस्टम, यानी Banyan Vines, को संभालना – पर जब सब कुछ दुरुस्त चल रहा हो, तो असल में उसे करना क्या था?

जब काम कम और बेचैनी ज्यादा हो जाए

हमारे नायक को शुरू-शुरू में बड़ा जोश था। नई-नई नौकरी, बड़ा नामी कंपनी और सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर का पद! मगर कंपनी पुराना सिस्टम हटाकर नया Windows NT ला रही थी, और Banyan Vines अब धीरे-धीरे विदाई की ओर था। पुराने सर्वर इतने स्थिर हो चुके थे कि उनमें कोई समस्या ही नहीं आती थी। ऐसे में हमारे भाई का दिन कैसे कटता? इंटरनेट ब्राउज़ करो, किताबें पढ़ो, और कभी-कभी छत को घूरो!

लेकिन मन तो हिंदुस्तानी है – "कुछ तो करना चाहिए!" काम नहीं तो भी बेचैनी, कहीं बॉस देख लेगा कि मैं खाली बैठा हूँ, कहीं लोग ये न समझ लें कि मैं निकम्मा हूँ! ये वही स्थिति है जब मोहल्ले में कोई कह देता है – "अरे, शर्मा जी का लड़का तो दिनभर मोबाइल चलाता है, करता-वर्ता कुछ है भी या नहीं?"

बॉस की सीख: "समस्याएँ आएँ, तब ही तो काम आएगा!"

एक दिन बेचैनी हद से बढ़ गई, तो साहब ने अपने बॉस से दिल की बात कह ही दी। बॉस ने बड़े ही मजेदार अंदाज में समझाया – "बेटा, हम तुम्हें इसलिए नहीं रखते कि हमेशा बिजी रहो, हम तुम्हें इसलिए रखते हैं कि जब गड़बड़ हो, तब तुम उसे ठीक कर सको!"
एक Reddit कमेंट में किसी ने तो इसे आम भारतीय कहावत की तरह समझाया – "लोहे को लोहे से काटते हैं!" यानी असली काम तो तब ही दिखता है जब हालात खराब हों।

एक और मजेदार किस्सा एक कमेंट में आया – एक रिटायर्ड इंजीनियर को फैक्ट्री ने मशीन ठीक करने के लिए बुलाया। उसने बस एक हथौड़ी मारी, मशीन चालू हो गई, और बिल बना दिया 10,000 रुपये का! जब मालिक ने पूछा – "इतना बड़ा बिल?" इंजीनियर बोला – "10 रुपये हथौड़ी मारने के, बाकी पैसे ये जानने के कि कहाँ मारनी है!"
यही बात आईटी में भी लागू होती है – आपको असल में अनुभव और समझदारी के लिए तनख्वाह मिलती है, हर वक्त पसीना बहाने के लिए नहीं।

ऑफिस की दो स्थितियाँ: "सब ठीक है" और "सब गड़बड़ है"

एक Reddit यूज़र ने आईटी का सच बहुत बढ़िया बताया:
"जब सब ठीक चल रहा होता है – लोग पूछते हैं, 'इतनी तनख्वाह क्यों दे रहे हो, कुछ काम तो है नहीं!'
और जब सिस्टम डाउन हो जाए – तब वही लोग चिल्लाते हैं, 'तुम लोग कर क्या रहे हो, सब गड़बड़ क्यों है?'"

यानी, जब तक सिस्टम स्मूथ चल रहा है, किसी को भी समझ नहीं आता कि पीछे कितनी मेहनत और सतर्कता है। जैसे हमारे देश में बिजली कट जाए तो सब लोग बिजली विभाग को फोन घुमा देते हैं, पर जब सब ठीक हो, तब किसी को याद भी नहीं रहता कि कोई लाइनमैन है भी।

खाली समय का सदुपयोग: सीखो, घबराओ मत!

इसी Reddit चर्चा में कई लोगों ने सलाह दी कि जब ऑफिस में काम कम हो, तो नए सर्टिफिकेशन कर लो, नई टेक्नोलॉजी सीखो, या सिस्टम की गहराई में उतरकर समझ बढ़ाओ।
एक सज्जन ने लिखा – "मैंने ऑफिस के खाली वक्त में कई स्क्रिप्ट्स बनाईं, नए टूल्स सीखे, और जब कभी आफत आई, सबसे पहले मैं तैयार था।"
यानी, जैसा हमारे यहाँ कहा जाता है – "संघर्ष का समय सीखने का सबसे अच्छा समय होता है।"

कुछ लोगों ने तो खाली समय में नेटफ्लिक्स पर पूरी वेब सीरीज़ देख डाली या अपनी हॉबी जैसे कढ़ाई–बुनाई सीख ली! और ऑफिस का वह 'काम' भी किया, जिसमें सबसे कम मेहनत थी – सिस्टम डिलीट करने की डॉक्युमेंटेशन बनाना। सोचिए, ऐसा काम भी है!

अनुभव का मोल: "फायरफाइटर" जैसा जीवन

आईटी वालों को किसी ने 'फायरफाइटर' यानी अग्निशमन कर्मचारी की तरह बताया – उन्हें हर दिन आग बुझानी नहीं पड़ती, पर जब जरूरत पड़े, तो वही सबसे काम आते हैं।
बिल्कुल वैसे ही जैसे हमारे यहाँ पंडित जी को शांति पाठ के लिए शायद ही कोई बुलाए, पर जब ग्रह-नक्षत्र गड़बड़ हों, तो वही सबसे जरूरी हो जाते हैं।

निष्कर्ष: आज अगर मौका मिले, तो जी भर के एन्जॉय करेंगे!

इस कहानी के लेखक ने आखिर में अफसोस जताया – "काश! उस वक्त को और अच्छे से एन्जॉय करता। आज अगर वैसा मौका मिले, तो खाली बैठना और भी ज्यादा पसंद आएगा!"
जैसे हमारे यहाँ अक्सर बुजुर्ग कहते हैं – "युवावस्था बेकार चली गई, अब समझ आता है कि खाली वक्त भी कितनी बड़ी दौलत है।"

आप क्या सोचते हैं?

क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि ऑफिस में काम कम हो, पर दिल बेचैन रहे? या आपने खाली समय का कोई अनोखा सदुपयोग किया हो?
अपने अनुभव ज़रूर साझा करें – कौन जाने, आपकी कहानी अगली बार किसी मजेदार ब्लॉग का हिस्सा बन जाए!


मूल रेडिट पोस्ट: Twiddling My Thumbs