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जब ऑफिस में 'इतिहास मिटाओ' का फरमान आया – एक कर्मचारी की अनोखी बदला-लेने वाली कहानी

जेपी मॉर्गन टोरंटो के एक अव्यवस्थित कॉर्पोरेट ऑफिस का एनीमे-शैली का चित्रण।
इस जीवंत एनीमे चित्रण के साथ कॉर्पोरेट जीवन की हलचल भरी दुनिया में डुबकी लगाएं, जो टोरंटो में जेपी मॉर्गन के दौरान के अव्यवस्थित माहौल को दर्शाता है। जैसे-जैसे विभाग अनिश्चितता का सामना करते हैं और अजीब रणनीतियाँ सामने आती हैं, कॉर्पोरेट परिदृश्य में जीवित रहने की जंग अत्यंत वास्तविक हो जाती है।

कार्यालय की जिंदगी में कभी-कभी ऐसे अजीब आदेश मिलते हैं कि दिमाग चकरा जाता है। ऊपर से जब बॉस खुद ही बिना सोचे-समझे फरमान सुना दे, तो कर्मचारी का हाल वही होता है जैसे किसी शादी में बाराती को हलवा खाने से मना कर दिया जाए। आज हम आपको एक ऐसे ही आईटी कर्मचारी की कहानी सुनाने जा रहे हैं, जिसने अपने ऑफिस के 'इतिहास मिटाओ' मिशन पर ऐसा मजेदार जवाब दिया कि पूरी टीम हैरान रह गई।

'इतिहास मिटाओ' – जब बॉस को दिखाना था नंबर वन

कहानी है टोरंटो के जेपी मॉर्गन ऑफिस की, जहां काम का माहौल पहले ही 'संकटग्रस्त' था। कंपनी की बैंकिंग शाखा बंद होने वाली थी और मैनेजमेंट को बस एक ही चिंता थी – मुख्यालय की एक्सेल शीट में उनका नाम ऊपर कैसे आए? बस, इसी मकसद से एक नया फरमान जारी हुआ: "ईमेल, वॉइसमेल और फाइलों का स्टोरेज जितना हो सके, उतना घटाओ!"

अब हमारे नायक का काम ही ऐसा था कि हर छोटी-मोटी प्रोजेक्ट के लिए पुराने दस्तावेज़ और रिकॉर्ड काम आते थे। यह तो वैसा ही है जैसे हिंदी फिल्मों के विलेन को उसकी पुरानी बदमाशी याद दिला दी जाए! लेकिन बॉस का आदेश था – इतिहास का नामोनिशान मिटा दो।

सब कुछ मिटा दो… और फिर भुगतो

जब कर्मचारी ने अपने मैनेजर (जो कि बॉस के सबसे बड़े चापलूस थे) से पूछा, "सर, ये सब डिलीट करना ठीक रहेगा?" तो जवाब मिला – "ऊपर से आदेश है, बस करो!"

साहब ने दिल बड़ा किया और सालों का जतन किया हुआ ईमेल, वॉइसमेल, फाइलें – सब मिटा डालीं। वैसे आम तौर पर हमारे दफ्तरों में लोग फाइलें छुपाने में माहिर होते हैं, यहां तो उल्टा हो गया! मज़ा तब आया, जब अगली तिमाही की समीक्षा (quarterly review) में बॉस ने गरज कर कहा, "तुम्हारा वॉइसमेल स्टोरेज सबसे ज्यादा निकला था!"

बस फिर क्या था, कर्मचारी ने दिल खोलकर सब डिलीट मार दिया। पुराने प्रोजेक्ट्स के पेपर्स तक प्रिंट कर डाले, जिससे ऑफिस की प्रिंटर भी हांफने लगी। आखिरकार, बॉस ने खुद आकर प्रिंटिंग बंद करवाई – "इतना कागज कौन बर्बाद करेगा!"

जब नया प्रोजेक्ट आया, तो पुराने दस्तावेज़ की कमी खली

समय का पहिया घूमा और ऑफिस में नए प्रोजेक्ट्स आ गए। अब हर चीज़ के लिए पुराने रिकॉर्ड चाहिए थे, लेकिन सब डिलीट हो चुका था! कर्मचारी ने प्रोजेक्ट के लिए समय का अनुमान 10% बढ़ा दिया – "अब तो हर requirement दोबारा पढ़ना पड़ेगा, 300 पेज हैं!"

बॉस बोले, "इतना समय क्यों लगेगा?" कर्मचारी ने धीरे-धीरे समझाया, "इतिहास मिटाओगे तो नए काम में समय तो लगेगा ही, या फिर झूठा अनुमान लगाऊँ?"

यहां एक कमेंट में किसी ने लिखा, "अगर मुझसे पुराने काम का सबूत मिटाने को कहा जाता तो मैं तो समय का अनुमान दोगुना कर देता!"

दरअसल, भारतीय दफ्तरों में भी अक्सर ऐसा होता है – ऊपर से आदेश आता है, सोचने-समझने की जरूरत नहीं। बाद में जब गड़बड़ होती है तो दोष नीचे वाले पर डाल दो।

कानून, कागज़ और कॉमेडी – कम्युनिटी की राय

रेडिट कम्युनिटी ने इस कहानी पर खूब मज़ेदार टिप्पणियां कीं। एक ने लिखा, "कनाडा में तो कानून है कि वित्तीय दस्तावेज़ 7 साल तक रखने पड़ते हैं, वरना टैक्स ऑफिस वाले छापेमारी कर देंगे!"

दूसरे ने कहा, "अरे, ऑफिस में तो कागजों के डिब्बे भर-भरकर रखे जाते हैं सिर्फ ऑडिट के डर से। बॉस तो कागज जलाना चाहता है, लेकिन फाइनेंस विभाग से डरता है!"

एक और मजेदार बात सामने आई – असल में सारे डेटा तो अमेरिका के सर्वर पर थे, यहां तो बस लोकल डेटा डिलीट हुआ। यानी, ऊपर से दिखावा और अंदर से वही ढाक के तीन पात।

किसी ने तो ये भी पूछा, "इतना झंझट क्यों, नया स्टोरेज खरीद लेते!" – जैसे हमारे यहां लोग कहते हैं, "इतना टेंशन क्यों, नया अलमारी ले लो!"

उपसंहार – ऑफिस की राजनीति और सीख

आखिरकार, हमारे नायक ने अगली तिमाही से पहले ही नई नौकरी ढूंढ ली। यही तो असली 'मालिशियस कम्प्लायंस' थी – आदेश मानकर ऐसा किया कि सबको सबक मिल जाए!

इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है कि कभी-कभी अंधी आज्ञापालन से नुकसान दोनों पक्षों का हो सकता है। भारतीय दफ्तरों में भी अक्सर ऐसा ही होता है – ऊपर से आदेश आता है, नीचे वाला सब कुछ कर डालता है, और फिर मुसीबत आने पर सारा ठीकरा उसी के सिर फोड़ दिया जाता है।

आपके ऑफिस में भी ऐसा कोई अजीब आदेश आया हो, या बॉस की किसी फरमान ने आपको हंसा-हंसा कर लोटपोट कर दिया हो, तो कमेंट में जरूर बताएं। ऐसी और दिलचस्प कहानियों के लिए जुड़े रहिए हमारे ब्लॉग के साथ!


मूल रेडिट पोस्ट: Eliminate history ? Ok sure.