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जब ऑफिस की राजनीति में 'बलि का बकरा' बनने की कोशिश उलटी पड़ गई

एक एनीमे-शैली की छवि जिसमें एक व्यक्ति दुनिया भर में आरोपों और जिम्मेदारियों से अभिभूत महसूस कर रहा है।
इस आकर्षक एनीमे चित्र में, एक पात्र किसी और की विफलताओं का बोझ उठाने के लिए दुनिया भर में खींचे जाने के तनाव से जूझ रहा है। हमारे नवीनतम पोस्ट में संचार की गलतफहमी और जिम्मेदारी की कहानी में डुबकी लगाएं!

ऑफिस की राजनीति और दोषारोपण तो हर जगह आम बात है, लेकिन सोचिए, अगर आपको आधी दुनिया पार कर बुलाया जाए – सिर्फ इसलिए कि कोई और अपनी गलती का ठीकरा आपके सिर फोड़े? ऐसी ही एक मजेदार और चटपटी कहानी है एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की, जिसे लोग "बलि का बकरा" बनाना चाहते थे, मगर उसने ऐसा पलटवार किया कि सबकी बोलती बंद हो गई।

हमारे देश में भी ऑफिस में "सारा दोष नए लड़के या एक्सपर्ट के सिर मढ़ दो" वाली सोच खूब मिलती है। लेकिन इस कहानी में, जब चालाकी से किसी को फंसाने की कोशिश की गई, तो असली खिलाड़ी ने पूरी बाजी उलट दी।

जब "एक्सपर्ट" को बुलाया गया, असलियत खुल गई

कहानी शुरू होती है एक बहुराष्ट्रीय कंपनी से, जिसमें एक भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की टीम पूरे विश्व में इंडस्ट्रियल सॉफ्टवेयर बनाती है। उनकी टीम का काम तो लगभग 90% दूर से ही हो जाता है, लेकिन एक प्रोजेक्ट में तकनीकी गड़बड़ियाँ आ रही थीं। अमेरिका के एक साइट पर स्थानीय टीम का काम बिगड़ गया था और प्रोजेक्ट लगातार लेट होता जा रहा था।

अब, जैसे हमारे यहाँ अक्सर होता है – "बिगड़ती बात को संभालो नहीं, किसी और पर डाल दो!" उसी तर्ज़ पर, स्थानीय टीम ने हमारे एक्सपर्ट भाई साहब को बुलवा लिया – आधी दुनिया पार! शुरुआत में सबने मिलकर कहा, "आप आ गए, अब सब कुछ सही हो जाएगा!" लेकिन हफ्ते भर में ही असली रंग दिखने लगा – अब वही लोग छोटी-बड़ी हर गड़बड़ी का दोष हमारे एक्सपर्ट पर डालने लगे।

डाक्यूमेंटेशन का जादू और "सबूतों की पोटली"

लेकिन भैया, ये कोई नया खिलाड़ी नहीं था! जैसे ही एक्सपर्ट ने देखा कि सब उसे फंसाने की फिराक में हैं, उसने हर चीज़ का पूरा-पूरा रिकॉर्ड रखना शुरू कर दिया। हर लॉग, हर कम्युनिकेशन, हर मीटिंग – सब कुछ कागज पर उतारना शुरू कर दिया।

एक दिन जब टीम ने प्रोजेक्ट मैनेजर (PM) के सामने मिलकर एक बड़ी कहानी गढ़ डाली कि "सारी देरी इस सॉफ्टवेयर इंजीनियर की वजह से है" – तो हमारे एक्सपर्ट ने ठंडे दिमाग से कहा, "ठीक है, सबूत दिखाओ!" लेकिन वहां तो सबका हाल ऐसा हो गया जैसे स्कूल में मास्टर जी ने होमवर्क मांग लिया और किसी ने किया ही नहीं। सबूत देने के नाम पर सिर्फ बहाने मिले – "देखिए, ये डेटा वैसा नहीं है जैसा होना चाहिए!" एक्सपर्ट ने साफ बता दिया, "ये तो तुम्हारे कोड की भी गलती हो सकती है!"

इसके बाद एक्सपर्ट ने आधी शिफ्ट तक खुद समस्या को दोहराने की कोशिश की, नेटवर्क ट्रैफिक के लॉग्स निकाले, हर एंगल से जांच की – लेकिन समस्या दोहराई ही नहीं जा सकी।

ऊपर तक गया मामला, और टीम की सिट्टी-पिट्टी गुम!

अब असली मज़ा तब आया जब एक्सपर्ट ने ये सारी डाक्यूमेंटेशन और सबूत अपने मैनेजमेंट (जो इंडिया में था) को भी भेज दी। न सिर्फ अपने बॉस, बल्कि टॉप लेवल तक – कि कैसे उस पर झूठा दोष मढ़ा जा रहा है, कोई सबूत नहीं, और कितना समय बर्बाद किया गया।

इसी बीच, कुछ और टीम मेंबर्स ने प्राइवेट में एक्सपर्ट से बात की – "भाई, हमारे प्रोजेक्ट्स में भी यही नाटक चल रहा है, लगता है ये इनकी पुरानी आदत है!"

जब एक्सपर्ट ने साइट टीम को ये सब बता दिया कि अब मामला ऊपर तक गया है, तो वहां सबका रंग उड़ गया – कोई सफाई देने लगा, कोई पिछली बातें पलटने लगा, यहां तक कि एक तो रोने जैसा हो गया!

"अब बस, और नहीं!" – एक्सपर्ट का आखिरी दांव

अगले ही दिन एक्सपर्ट ने HR को फॉर्मल लैटर भेजा – "अब मैं यहां और काम नहीं करूंगा, क्योंकि माहौल सुरक्षित और सहयोगी नहीं है।" कंपनी ने भी बिना चूं-चपड़ के मंजूरी दे दी।

अब PM की हालत देखिए – बेचारा गिड़गिड़ाने लगा, "प्लीज, मत जाओ! क्लाइंट साइन-ऑफ के लिए तुम्हारी जरूरत है!" लेकिन एक्सपर्ट का जवाब – "अब बहुत हो गया, मेरा काम पूरा।"

और जैसे ही एक्सपर्ट ने साइट छोड़ने की तैयारी शुरू की, पूरा सिस्टम फंस गया – क्योंकि अब वहां कोई भी समस्या ठीक करने वाला बचा ही नहीं!

पाठक की नजर से – कमेंट्स की चटपटी झलक

रेडिट पर इस कहानी ने हलचल मचा दी। एक यूज़र ने लिखा, "वाह, अब तो इनकी असलियत दुनिया के सामने आ गई – सच्चाई की रसीदें सबसे ऊपर तक पहुंच गईं!" एक और ने कहा, "ये वही लोग हैं जो अपनी गलती छुपाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं, लेकिन जब असली एक्सपर्ट ने सबूत पेश कर दिए, तो सबकी बोलती बंद हो गई।"

किसी ने तो चुटकी लेते हुए कहा, "ये कहानी बताती है – जो खुद काम नहीं करना चाहता, वही सबसे ज़्यादा दोष दूसरे पर डालेगा!" और एक ने तो बिलकुल देसी अंदाज में लिखा, "बलि का बकरा बनाने चले थे, खुद ही फंस गए!"

निष्कर्ष: सबक जो हर ऑफिस वाला याद रखे

इस कहानी से क्या सीखना चाहिए? पहली बात – अपने काम की पूरी डाक्यूमेंटेशन रखो, खासकर जब माहौल राजनीति भरा हो। दूसरी बात – किसी की चालाकी के जाल में फंसने से अच्छा है, समय रहते सच्चाई उजागर कर दो। और तीसरी बात – ऑफिस की राजनीति में कभी-कभी उलटा भी पड़ सकता है, इसलिए ईमानदारी और मेहनत ही सबसे बड़ी ताकत है।

अब आपकी बारी! क्या आपके ऑफिस में भी कभी किसी ने आपको "बलि का बकरा" बनाने की कोशिश की? या आपने किसी को इस तरह पलटवार करते देखा है? नीचे कमेंट में अपनी कहानी जरूर शेयर करें – शायद अगला ब्लॉग आपकी कहानी पर हो!


मूल रेडिट पोस्ट: Tried to drag me across the world to blame me for your failures? Get left high and dry.