जब ऑफिस का 'जिम' बना सबका सिरदर्द: छोटी-छोटी बदले की बड़ी कहानी
कभी-कभी दफ्तर का माहौल किसी टीवी सीरियल से कम नहीं होता। हर ऑफिस में एक ऐसा किरदार जरूर मिलता है, जो अपनी हरकतों से सबका सिरदर्द बन जाता है – कुछ-कुछ जैसे हिंदी फिल्मों के 'खलनायक'! आज की कहानी भी ऐसे ही एक सहकर्मी "जिम" की है, जिसने अपने नखरों और शरारतों से पूरे ऑफिस का जीना हराम कर रखा था।
अब सोचिए, जब ऐसे किसी इंसान से रोज़-पाला पड़े, तो इंसान क्या करे? सीधा टक्कर ले या कोई सूझबूझ वाला रास्ता निकाले? Reddit पर वायरल हुई इस कहानी में, हमारे नायक ने चुना दूसरा रास्ता – मज़ेदार, नॉन-हिंसक और पूरी तरह देसी अंदाज वाला "छोटा बदला"!
ऑफिस का खलनायक: जिम की करतूतें
हर मोहल्ले में एक "शर्मा जी" तो दफ्तरों में एक "जिम" – ऐसे लोग जिनका मुख्य काम है बाकी सबकी नाक में दम करना! जिम की खासियतें कुछ यूं थीं: - काम से जी चुराना और मौका मिलते ही अदृश्य हो जाना - दूसरों के बारे में झूठी बातें फैलाना (कुछ लोग तो ऐसे हैं जिनकी जुबान में ही मिर्ची लगी होती है!) - अश्लील मजाक और बेहूदा टिप्पणियां करना, और ऊपर से मैनेजमेंट का ढीला रवैया, जिससे उसे खुली छूट मिल गई थी - लोगों की निजी जगह में घुस जाना, बिलकुल जैसे दिल्ली की लोकल बसों में भीड़! - और हद तो तब हो गई जब जिम ऑफिस के गोल्फ कार्ट्स को ऐसे पार्क करता कि दूसरों के लिए रास्ता ही बंद कर देता
मतलब, जिम ने हर वो काम किया जिससे बाकी कर्मचारियों की शांति भंग हो जाए। Reddit के लेखक (जिन्हें हम 'नायक' कहेंगे) ने भी दो बार शिकायत की, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात!
बदले की शुरुआत: जब सब्र का बाँध टूटा
कहते हैं, "चुप रहना भी एक किस्म की बहादुरी है", लेकिन जब पानी सिर से ऊपर निकल जाए तो कुछ करना ही पड़ता है। हमारे नायक ने जिम की शरारतों का जवाब देने के लिए एकदम देसी तरीका अपनाया – "छाया अभियांन" यानी शांति से, बिना लड़ाई-झगड़े के, जिम की नाक में दम कर दिया।
- जिम के गोल्फ कार्ट से हर चीज़ हटा दी – कागज, औजार, हर सामान। अब बेचारा जिम सुबह-सुबह हैरान होकर कार्ट के डिब्बों में झांकता रह गया।
- जिम का कार्ट पुराना था, जिसमें चाबी निकालकर भी इग्निशन "ON" रहता था। नायक ने हर बार जब मौका मिला, अपनी चाबी से जिम का इग्निशन "OFF" कर दिया। अब जिम जब-जब कार्ट स्टार्ट करने जाता, गाड़ी हिली-डुली ही नहीं!
- सबसे शानदार हथियार – "पूरा इग्नोर करना"। नायक ने जिम की तरफ देखना, मुस्कुराना, बात करना – सब बंद कर दिया। एक दिन तो जब जिम बातचीत के मूड में आया, नायक ने उसे सड़क के बीच अकेला छोड़ दिया – बिना एक शब्द बोले, चुपचाप निकल लिए।
पाठकों की प्रतिक्रियाएँ: "जिम" पर सबका गुस्सा
Reddit पर इस कहानी ने तूफान मचा दिया। हर कोई जिम से इतना चिढ़ गया कि मज़ाक में बोला गया – "अब हम सब भी जिम से नफरत करते हैं!" किसी ने कहा, "मैं तो जिम से उसके पैदा होने से पहले ही नफरत करने लगा था!" एक ने तो जिम के बालों तक पर तंज कस दिया – "उसके बालों से भी बदबू आती है!"
कुछ पाठकों ने और मज़ेदार सुझाव दिए – "कभी-कभी बदला सबसे बढ़िया तब होता है जब सामने वाला समझ ही न पाए!" किसी ने सलाह दी, "जिम के कार्ट में हर दिन कुछ अजीब चीज़ें रख दो – एक पेंसिल, पुराने पेंच, या अधखाया बर्गर, ताकि वो और उलझन में पड़ जाए!"
एक पाठक ने तंज कसा, "ऐसा लगता है जैसे नायक ऑफिस के 'द ऑफिस' सीरियल के 'ड्वाइट' बन गए हैं!" तो कोई बोला, "जिम को एक झन्नाटेदार थप्पड़ ज़रूरी है, लेकिन फिर ये 'छोटे बदले' का मज़ा ही खत्म हो जाएगा!"
ऑफिस की राजनीति और देसी जुगाड़
इस पूरी कहानी में दो बातें खास हैं – एक, ऑफिस की राजनीति (जो भारत के हर दफ्तर में रोज़ चलती है), और दूसरी, समस्या का हल ढूंढने में देसी जुगाड़ की ताकत। बिना किसी लड़ाई-झगड़े या नुकसान के, नायक ने जिम की नाक में दम कर दिया, और खुद की मानसिक शांति भी बनाए रखी।
यहाँ एक पाठक की बात काबिले-गौर है – "कुछ लोग ध्यान के भूखे होते हैं। चाहे अच्छा हो या बुरा, उन्हें बस सबकी नजर चाहिए। ऐसे लोगों को इग्नोर करना ही सबसे बड़ा बदला है।" यही बात भारतीय संस्कृति में भी कही गई है – "बुराई का जवाब हमेशा अच्छाई से दो, और कभी-कभी चुप्पी सबसे बड़ा हथियार होती है।"
निष्कर्ष: क्या आपके ऑफिस में भी है कोई "जिम"?
दोस्तों, अगर आपके ऑफिस में भी कोई जिम जैसा सिरदर्द है, तो इस कहानी से प्रेरणा लीजिए – न झगड़िए, न उलझिए, बस थोड़ा सा जुगाड़ और थोड़ा सा इग्नोर का तड़का लगाइए! आखिर में, ऑफिस में शांति बनाना भी एक कला है, और कभी-कभी हल्की-फुल्की बदले की भावना आपके दिन को खुशनुमा बना देती है।
क्या आपके दफ्तर में भी कोई ऐसा "जिम" है? नीचे कमेंट में अपनी कहानी जरूर साझा करें! कौन जाने, आपकी जुगाड़ भी कभी वायरल हो जाए!
मूल रेडिट पोस्ट: Later hater