जब एक SDR ने घमंडी ग्राहक को उसकी औकात दिखा दी – एक छोटी सी मीठी बदला कहानी
हमारे देश में बिक्री या 'सेल्स' के क्षेत्र में काम करना किसी रणभूमि से कम नहीं है। हर फोन कॉल, हर मीटिंग एक नया युद्ध है – और अकसर सामने वाले की आवाज़ में ही अहंकार की तलवारें चमकने लगती हैं। आप सोचिए, जब कोई आपको बिना बुलाए फोन करता है, तो गुस्सा आना स्वाभाविक है। मगर क्या होगा जब कॉल करने वाला ही आपको आपकी ही भाषा में, पर बड़े ही शालीन अंदाज़ में, उल्टा चित्त कर दे?
SDR – सेल्स की पहली कतार के योद्धा
सबसे पहले, एक जरूरी बात – SDR क्या है? कई पाठकों के मन में भी Reddit पर जैसे सवाल उठे – "ये SDR क्या बला है?" तो जनाब, SDR यानी 'सेल्स डेवलपमेंट रिप्रेजेंटेटिव', मतलब वही लोग जो कंपनियों को फोन करके, बिना किसी पूर्व सूचना के, अपने उत्पाद या सेवा के बारे में बताने की कोशिश करते हैं। हमारे यहां इसे 'कोल्ड कॉलिंग' कहते हैं – वो अचानक आने वाली कॉल, जिससे आप या तो चिढ़ जाते हैं या फोन काट देते हैं।
लेकिन Reddit के इस किस्से के नायक u/Rantamplan ने साफ किया – "मैं आम लोगों को नहीं, सिर्फ कंपनियों को कॉल करता हूं।" अब भले ही वो कंपनियों को कॉल करें, पर कई पाठकों ने सही कहा – "हम कंपनियों में ही तो काम करते हैं, और कॉल हमें ही आती है!"
घमंड और विनम्रता का आमना-सामना
कहानी कुछ यूं है: SDR का करियर शुरू करते ही Rantamplan ने एक ऐसे शख्स को कॉल कर लिया, जो ऊपर से बहुत सौम्य, मगर अंदर से घोर घमंडी था। न कोई गाली, न ऊंची आवाज़ – बस बातों में ऐसा 'मैं-ही-सर्वश्रेष्ठ' वाला टोन कि सामने वाला बेचारा खुद को छोटा महसूस करने लगे।
SDR साहब ने भी सोच लिया – जब ये शहंशाह खुद को इतना ऊंचा समझ रहा है, तो क्यों न उसकी ही शैली में उसे आईना दिखाया जाए? वे पूरे 10 मिनट तक उसकी ज्ञान वर्षा सुनते रहे। फिर जैसे ही उस सज्जन ने 'चेकमेट' के अंदाज में कॉल काटने की कोशिश की, SDR ने चुपके से अपना दांव चला:
"बहुत-बहुत धन्यवाद सर, आप अब तक के सबसे विनम्र व्यक्ति हैं जिनसे मेरी बात हुई।"
उस घमंडी साहब की आवाज़ में हिचकिचाहट आ गई – "क्या?"
SDR बोले, "हां सर, आपने तो 10 मिनट दिए, कभी चिल्लाए नहीं, बाकी लोग तो गुस्से में कॉल काट देते हैं!"
कुछ सेकंड की चुप्पी... और फिर सवाल – "आपने कहा था, आप क्या करते हैं?"
Reddit कम्युनिटी के एक सदस्य ने लिखा – "ऐसे वक़्त पर सामने वाले की आत्मा शरीर छोड़ देती है!" बिलकुल वैसे ही जैसे कोई बच्चा मुँह लटकाकर घर लौटता है जब मां डांटने की जगह प्यार से समझा देती है।
कोल्ड कॉलिंग: श्राप या वरदान?
अब इस कहानी पर पाठकों की प्रतिक्रियाएं भी कम दिलचस्प नहीं थीं। किसी ने लिखा – "कोल्ड कॉलिंग तो खुद में ही बदतमीज़ी है!" एक और ने कहा – "कोई मुझे दिन में 15 बार कॉल करे, तो मेरा भी पारा चढ़ जाएगा!"
लेकिन खुद SDR (यानी Rantamplan) ने जवाब दिया – "मैं अब नए SDRs को सिखाता हूं कि ऐसी स्थितियों से कैसे निपटना है। असल बात है आपके पास सही मार्गदर्शक हो।"
एक पाठक ने चुटकी ली – "कभी-कभी, किसी को उसी के हथियार से हराना सबसे बड़ा बदला होता है।"
यहां भारतीय संदर्भ में देखें तो, जैसे रेलवे प्लेटफॉर्म पर चायवाला 'चाय...चाय...' की आवाज़ लगाता है, पर जब कोई ग्राहक नज़रअंदाज़ करता है, तो वह मुस्कुराकर कह देता है – "कोई बात नहीं साहब, अगली बार सही!" यही है असली प्रोफेशनलिज़्म।
क्या विनम्रता भी बदला हो सकती है?
इस किस्से में सबसे दिलचस्प बात यही है – सामने वाला जितना भी रुखा क्यों न हो, अगर आप शिष्टता से जवाब दें, तो उसका घमंड वहीं फुस्स हो जाता है। एक पाठक ने लिखा – "रुखाई का जवाब रुखाई से देने में क्या मज़ा? असली जीत तो तब है जब सामने वाला शरमा जाए!"
हमारे यहां भी दादी-नानी अकसर कहती हैं – "नरम बोल, मीठा व्यवहार – बड़ा से बड़ा पहाड़ पिघल जाता है।" यही इस SDR ने कर दिखाया।
बिक्री की दुनिया का कड़वा सच
फिर भी, कोल्ड कॉलिंग करने वालों के प्रति लोगों की नाराज़गी भी वाजिब है। एक पाठक ने लिखा – "साहब, दिन में आठवीं बार कोई 'क्रेडिट कार्ड', 'बिज़नेस लोन', 'क्लीनिंग सर्विस' बेचने को फोन करे, तो गुस्सा आना जायज़ है।"
लेकिन कोई भी नौकरी आसान नहीं, खासकर जब सामने वाला आपको सुनने के मूड में ही न हो। कई SDRs के लिए, ये अनुभव ही उनका सबसे बड़ा गुरु बनता है।
आपकी राय क्या है?
तो दोस्तों, अगली बार जब कोई अनजान नंबर से कॉल आए – क्या आप भी शिष्टता से जवाब देंगे, या तुनककर फोन काट देंगे? क्या कभी आपने भी किसी घमंडी इंसान को उसकी ही भाषा में, मगर शालीनता से, आईना दिखाया है?
अपने अनुभव नीचे कमेंट में जरूर साझा कीजिए। हो सकता है आपकी कहानी भी किसी का दिन बना दे!
मूल रेडिट पोस्ट: I made a rude person die inside.