विषय पर बढ़ें

जब एक 'डायन' की नज़र ने गुंडे को डर के मारे पसीना-पसीना कर दिया!

एक हाई स्कूल लड़की की फोटोरियालिस्टिक छवि, जो अतीत के रोमांटिक ध्यान और श्रापों पर विचार कर रही है।
इस फोटोरियालिस्टिक दृश्य में, नायिका अपने हाई स्कूल के वर्षों पर विचार करती है, जहाँ अनचाहा ध्यान उसे श्राप और प्रतिशोध के विचारों की ओर ले जाता है। युवा भावनाओं और आकर्षण की जटिलताओं की कहानी में डूबें, नवीनतम ब्लॉग पोस्ट में।

कभी-कभी ज़िंदगी में जादू या टोना-टोटका करने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती, बस सामने वाले का डर और आपकी थोड़ी सी समझदारी कमाल कर जाती है। आज हम ऐसी ही एक कहानी लेकर आए हैं, जहां एक छोटी सी लड़की ने अपने 'पेटी रिवेंज' (छोटी-छोटी बदले की भावनाओं) से एक दादा टाइप लड़के की हालत पतली कर दी। इसकी कहानी किसी हॉरर फिल्म से कम नहीं, बस हीरोइन यहां 'डायन' नहीं, बल्कि एक समझदार लड़की है!

जब डर ही बन गया 'जादू'

तो किस्सा कुछ यूं है—स्कूल के सीनियर क्लास में एक लड़की थी, जिसने कभी खुद को 'पेटी और बदले की भावना से भरी' बताया है (वैसे हमारे यहां तो हर मोहल्ले में एक-दो ऐसे लोग मिल ही जाते हैं!)। उसे एक लंबा-चौड़ा लड़का (नाम Matthew) बहुत पसंद करने लगा। लड़की को उसमें कोई खास दिलचस्पी नहीं थी, लेकिन सोच लिया, चलो एक बार मिल ही लेते हैं।

लंच ब्रेक में दोनों मिले, पर बात ऐसी अटकी जैसे बिना मसाले की दाल—बिल्कुल बेस्वाद! बातचीत में लड़के ने पूछा, "तुम धार्मिक हो?" लड़की ने जवाब दिया, "मैं पैगन (पश्चिमी देशों में ये वो लोग होते हैं जो कुदरत या अलग देवी-देवताओं में विश्वास करते हैं) हूँ।" बस फिर क्या था, लड़के की शक्ल देखने लायक थी! कुछ मिनट बाद अचानक उसे 'दोस्त से अर्जेंट कॉल' आ गई और वो बहाना बनाकर भाग गया। लड़की को राहत जरूर मिली, पर दिमाग में सवाल भी था।

'डायन' का डर, औरतों का बचाव!

कुछ दिन बाद पता चला कि वो लड़का कई लड़कियों के साथ गलत हरकतें कर चुका था। लड़की ने सोच लिया—'बच गई बहन, वरना ये तो बड़ा खतरा था!' लेकिन असली मज़ा तो तब आया, जब पता चला कि वो लड़का अब सबको बता रहा है कि वो लड़की कोई 'पागल डायन' है, जो उस पर जादू-टोना कर सकती है।

अब सोचिए, 5 फीट 1 इंच की एक लड़की और सामने 6 फीट 5 इंच का 'महाबली' लड़का, और वो सबके सामने डर के मारे कांप रहा है! ज़रा बॉलीवुड की किसी फिल्म का सीन याद करिए, जहां बिल्ला टाइप विलेन एक सीधी-सादी लड़की से ही डर जाए—बस वैसा ही हाल!

दो साल बाद हुआ असली तमाशा

दो साल बीत गए। वही लड़का अब एक बैंड के साथ स्कूल आया। लड़की ने देखा कि वो मंच पर है, और भीड़ में लड़की सबसे पीछे खड़ी है। अचानक उसके दिमाग में बिजली सी कौंधी—'क्यों न उसके डर का फायदा उठाया जाए?' उसने अपनी आंखें बड़ी-बड़ी खोलकर (फिल्मों वाला 'कुब्रिक स्टेयर') उसकी तरफ देखना शुरू किया।

फिर बिना बोले होंठ हिलाने लगी—क्या बोल रही थी, खुद भी नहीं जानती थी! लेकिन लड़के के माथे पर पसीना, चेहरे पर डर और परफॉर्मेंस में बबाल—लड़की की चाल काम कर गई! डर के मारे उसकी परफॉर्मेंस बिगड़ती चली गई। सबके सामने उसकी हवा टाइट हो गई, और बाद में जब वो हॉलवे में लड़की के पास से निकला तो दीवार से चिपक कर, सिर झुकाए निकल गया। लड़की ने उस पल को 'सच में खूबसूरत' बताया।

कम्युनिटी की राय: कभी-कभी 'डर' ही सबसे बड़ा हथियार

इस कहानी पर Reddit पर लोगों के कमेंट्स भी किसी मसालेदार चटनी से कम नहीं थे! एक यूज़र ने लिखा, "तुमने अपनी ताकत का सही इस्तेमाल किया।" वहीं एक और ने बड़ी प्यारी बात कही—"कई बार लोगों को डराकर ही सही रास्ते पर लाना पड़ता है।"

एक और दिलचस्प किस्सा सुनने को मिला—एक लड़की को स्कूल में बुली किया जाता था। उसके माता-पिता ने उसे खुद हल निकालने दिया। लड़की ने काली मोमबत्तियां, सूखे पत्ते और अजीब बोतलें बैग से 'गलती से' गिरा दीं, फिर बुलियों से रहस्यमय बातें कीं, उनसे उनके नाम पूछे, और 'तुम ठीक हो ना, कोई अजीब चीज़ तो नहीं हो रही?' जैसे सवाल किए। कुछ ही दिनों में बुलियां उससे डर कर स्कूल आना ही छोड़ दीं! ये कहानी बताती है कि किस तरह कभी-कभी 'मानसिक जादू' (psychological tactics) असली जादू से भी ज्यादा असरदार होता है।

एक कमेंट में तो किसी ने मज़ाक में लिखा—'अगर डायन का डर इतना काम आता है, तो इतिहास में जितनी औरतों को डायन कहकर सताया गया, असल में वे तो बस होशियार और मजबूत महिलाएं रही होंगी!'

निष्कर्ष: असली जादू डर और दिमाग का मेल है!

तो दोस्तों, ये कहानी हमें क्या सिखाती है? असली जादू हमारे दिमाग और सामने वाले के डर में ही छुपा है। ज़रूरी नहीं कि हर बार टोना-टोटका, काला जादू या तांत्रिक क्रिया की जाए—कई बार बस अपने आत्मविश्वास और थोड़ी सी 'नाटकबाजी' से भी बड़े-बड़ों की हवा निकल सकती है।

तो अगली बार जब कोई आपको परेशान करे, तो याद रखिए—'डायन' बनने के लिए जादूगर होना जरूरी नहीं, बस सामने वाले के डर को पहचानिए और सही मौके पर उसका फायदा उठाइए! और हां, ये सब करते वक्त अपनी सीमाएं और सुरक्षा का ध्यान जरूर रखिए—क्योंकि 'डर' का खेल दोनों तरफ चल सकता है!

आपकी क्या राय है? क्या आपने कभी किसी को ऐसे ही डराकर सबक सिखाया है या किसी के डर का फायदा उठाया है? अपने अनुभव कमेंट में जरूर शेयर करें!


मूल रेडिट पोस्ट: curses are as real as you think they are, matthew