जब एक छोटी सी गलती ने CEO के माता-पिता की क्लिनिक का नेटवर्क ठप कर दिया
तकनीक की दुनिया में काम करने वाले हर शख्स को कभी न कभी कोई ऐसी गलती ज़रूर हो जाती है, जिसे याद कर के हंसी भी आती है और पसीना भी। आज मैं आपको एक ऐसी ही मज़ेदार लेकिन दिल दहला देने वाली कहानी सुनाने जा रहा हूँ, जिसमें एक छोटी सी चूक ने CEO के माता-पिता की क्लिनिक का पूरा नेटवर्क तहस-नहस कर दिया। सोचिए, ऑफिस के बगल में ही उनके माता-पिता की क्लिनिक हो और गलती से वहाँ का नेटवर्क डाउन कर देना—हिम्मत चाहिए साहब!
कहानी की शुरुआत – "डेमो" के नाम पर दाल में कुछ काला
हमारी कहानी Reddit पर u/CheckTec00 नाम के एक यूज़र की है, जो एक आईटी कंपनी में अप्रेंटिसशिप कर रहे थे। ये कंपनी डॉक्टरों की क्लिनिक और मेडिकल प्रैक्टिसेज़ के लिए नेटवर्क संभालती है। ऑफिस और सारे क्लाइंट, सब जगह Unifi का नेटवर्किंग गियर लगा है। अब एक क्लाइंट और कोई नहीं, बल्कि खुद CEO के माता-पिता की क्लिनिक है, जो ऑफिस के बराबर में ही है और जिनका नेटवर्क भी ऑफिस के पीछे ही सेटअप है।
एक दिन, उनके साथी को एक नया डेमो सर्वर रैक लगाने का जिम्मा मिला। सोचा गया – लैपटॉप को Unifi Dream Machine (UDM) से LAN के जरिए जोड़ो, WiFi बंद रखो, बैकअप इमेज डालो, Enterprise Management में जोड़ो और काम तमाम। लेकिन जनाब, यह काम इतना सीधा कहाँ जाने वाला था!
नाम में क्या रखा है?—"बैकअप123" या "बैकअप 3"?
काम हो गया समझ कर सबने चैन की सांस ली, लेकिन जब UDM की वेब इंटरफेस एक्सेस करने की कोशिश की गई तो वह गुम ही हो गया। सब लोग सिर खुजाते रह गए कि आखिर दिक्कत क्या है। तभी बगल की क्लिनिक से कॉल आया—पूरा नेटवर्क बैठ गया है!
अब पता चला कि जिस UDM की सेटिंग्स में छेड़छाड़ हो रही थी, वह कोई डेमो यूनिट नहीं, बल्कि CEO के माता-पिता की क्लिनिक का असली नेटवर्क था। दोनों नेटवर्क का नाम भी एक जैसा था, इसलिए किसी को भनक तक नहीं लगी और बैकअप इमेज सीधा लाइव नेटवर्क पर डाल दी गई।
यहाँ एक Reddit यूज़र ने बहुत सही लिखा—"नाम रखने वाले ने यहाँ गड़बड़ कर दी, आपकी गलती नहीं है!" सच बात है, हमारे यहाँ भी अक्सर फाइल या डिवाइस का नामकरण इतना उलझा होता है कि 'backup1', 'backup12', 'backup123', 'backup2' देखकर ही माथा ठनक जाता है। एक और कमेंट में लिखा था, "आईटी में तीन सबसे मुश्किल काम हैं—नाम रखना, गिनती करना और डॉक्युमेंटेशन अपडेट रखना!" भाई, यह बात तो घर-घर की सच्चाई है, चाहे वह कोई सरकारी दफ्तर हो या प्राइवेट कंपनी।
सीख और सुधार – गलती से बना बड़ा सबक
अब सोचिए, मेडिकल क्लिनिक का नेटवर्क डाउन होना मतलब मरीजों की फाइलें, अपॉइंटमेंट्स, सब कुछ बंद! एक कमेंट में किसी ने बड़ा अच्छा लिखा—"ऐसी दो अलग-अलग कंपनियों के नेटवर्क को सीधे कनेक्ट करना, खासकर जब उनमें से एक मेडिकल क्लिनिक हो, सुरक्षा के लिहाज से बड़ी चूक है।" दूसरा बड़ा मुद्दा नामकरण का था, तीसरा डेमो अकाउंट का ना होना। ये सारी गलतियाँ किसी एक की नहीं, बल्कि सालों से चली आ रही प्रणाली की थीं।
हमारे यहाँ भी अक्सर देखा जाता है कि छोटे-छोटे अस्पताल या क्लिनिक में आईटी सिस्टम को लेकर लापरवाही बरती जाती है—कोई पासवर्ड नोटबुक में लिख देता है, कोई सब डिवाइसों को 'admin' नाम से चला देता है। जब तक गड़बड़ न हो, किसी का ध्यान नहीं जाता। Reddit पर भी एक यूज़र ने लिखा, "आप पहले नहीं हैं, जिसने ऐसी गलती की हो।" यानी, यह गलती नई नहीं है, लेकिन इससे सीखना जरूरी है।
हंसी-मजाक और आईटी की सच्चाई
अब जरा सोचिए, ऑफिस में सबके चेहरे फक्क, बॉस के माता-पिता की क्लिनिक का नेटवर्क ठप, और सब अपने-अपने सिर पकड़कर बैठे हों! किसी ने तो मज़ाक में लिखा, "कभी-कभी नामों का झंझट ऐसा हो जाता है कि जैसे घर में दो बच्चों का नाम एक जैसा रख दिया हो—माँ जब एक को बुलाती है, दोनों दौड़ते हैं!"
एक और मजेदार कमेंट था, "मैंने भी एक बार टेस्ट सर्वर समझ के असल क्लाइंट का प्रोडक्शन सर्वर बंद कर दिया था।" भाई, ऐसी घटनाएँ आईटी वालों के जीवन का हिस्सा बन चुकी हैं।
निष्कर्ष – तकनीक से सीख, हँसी के साथ
इस पूरी घटना से दो बातें साफ निकलकर आती हैं—पहली, नेटवर्किंग और आईटी में छोटी सी भी लापरवाही बहुत भारी पड़ सकती है; दूसरी, गलती सबसे होती है, लेकिन उससे सीखना जरूरी है। अब वहाँ एक नया नियम बना दिया गया—डेमो और असली नेटवर्क के लिए अलग-अलग अकाउंट होंगे, ताकि भविष्य में ऐसी गड़बड़ी न हो।
अगर आपके साथ भी कभी आईटी या नेटवर्किंग में ऐसी कोई मजेदार या डरावनी घटना हुई हो, तो कमेंट में ज़रूर बताइए। और हाँ, अगली बार जब ऑफिस में कोई नया सिस्टम सेटअप करें, तो नामकरण पर खास ध्यान दें—कहीं 'backup123' और 'backup 3' जैसी गलती न हो जाए!
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मूल रेडिट पोस्ट: That time we accidentally bricked the CEO’s parents’ clinic network