जब एक अतिथि ने होटल के रिसेप्शनिस्ट को ‘शैतान’ बना डाला: होटल की दुनिया के कुछ अनसुने किस्से
होटल का रिसेप्शन—जहाँ हर दिन नए-नए चेहरे, अनगिनत कहानियाँ और कभी-कभी पुराने ज़माने के मेहमान भी आ धमकते हैं। यहाँ काम करने वालों के लिए हर दिन एक नया चैलेंज होता है। लेकिन क्या हो जब कोई मेहमान आपको ‘शैतान’ ही घोषित कर दे? आज हम एक ऐसी ही कहानी लेकर आए हैं, जो न सिर्फ़ आपको हँसाएगी, बल्कि होटल इंडस्ट्री के अनदेखे पहलुओं से भी रूबरू कराएगी।
स्वागत है ‘करेन जी’ का — पुराने दौर की याद में खोई मेहमान
यह किस्सा है एक बुटीक होटल का, जहाँ कुल मिलाकर ५० कमरे हैं, एक शानदार रेस्तरां और स्पा भी है। कभी ये होटल अपने ज़माने में ‘स्टार’ हुआ करता था—शाम को वाइन, दोपहर में चाय और स्कोन (ब्रिटिश बिस्किट जैसा नाश्ता)। होटल की विला भी थीं, जिनमें आउटडोर पूल हुआ करते थे, मगर अब वो प्राइवेट ओनर्स को बेच दी गई हैं।
इस माहौल में दाखिल होती हैं ‘करन सिल्वरस्मिथ’ (नाम बदला गया है), उम्र लगभग ७५ साल। इन्हें रिसेप्शनिस्ट ने बड़े ही सम्मान से चेक-इन किया, रूम की चाबी, सारी जानकारी—हर बात तसल्ली से समझाई। मगर करेन जी ने हर बात दोबारा पूछी, मानो पहली बार कुछ सुना ही न हो।
जब ड्राई क्लीनिंग स्लिप माँगी तो रिसेप्शनिस्ट ने नज़दीकी ड्राई क्लीनर का पता प्रिंट कर दिया, मगर करेन जी को यह खल गया कि होटल खुद उनकी ड्राई क्लीनिंग क्यों नहीं करेगा!
होटल के बदलते रंग—करेन जी को पुराना जमाना चाहिए!
जब करेन जी को पता चला कि होटल में अब वाइन सर्व नहीं होती, स्कोन भी दो साल से नहीं बने, और आउटडोर पूल अब आम मेहमानों के लिए नहीं है—तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया।
सोचिए, अगर हमारी दादी-नानी को पुराने ज़माने की मिठाइयाँ या शादी-ब्याह के पुराने रीति-रिवाज न मिले, तो वे भी कुछ ऐसा ही रिएक्ट करतीं! होटल वालों ने उन्हें स्पा का इंडोर पूल इस्तेमाल करने को कहा, मगर करेन जी को तो वही पुराना ‘रॉयल’ अनुभव चाहिए था।
होटल स्टाफ की अग्निपरीक्षा—‘आप तो शैतान हैं!’
डिनर के बाद करेन जी शिकायत लेकर फिर पहुँच गईं—“मुझे डेज़र्ट ऑफर ही नहीं किया!” जैसे कि किसी शादी में मेहमान को गुलाब जामुन न मिले। वहाँ की सर्वर ने बिल पकड़ाया, तो करेन जी ने गुस्से में मेज़ पर हाथ दे मारा—“तुम लोग तो बिलकुल भी मेहमाननवाज़ नहीं हो! चाय-स्कोन छुपा रखे हैं, वाइन भी नहीं दे रहे, कुछ करने ही नहीं देते, तुम तो शैतान हो!”
रिसेप्शनिस्ट ने शांति से सब संभालने की कोशिश की, करेन जी की तीसरी रात की बुकिंग कैंसल कर दी, स्पा की सारी अपॉइंटमेंट्स भी रद्द करने की कोशिश की। मगर करेन जी का गुस्सा ठंडा ही नहीं हुआ।
कम्युनिटी की चटपटी प्रतिक्रिया—‘होटल कैलिफ़ोर्निया’ की याद
रेडिट पर इस कहानी पर खूब चर्चा हुई। एक यूज़र ने मज़ाक में लिखा—“लगता है जैसे ‘होटल कैलिफ़ोर्निया’ में आ गए हों: ‘कृपया मेरी वाइन ले आइए!’—‘माफ़ कीजिए, यहाँ २०१९ के बाद से वाइन नहीं मिलती!’”
दूसरे ने तो यहाँ तक कह दिया—“कभी-कभी तो लगता है, मेहमान हर ‘ना’ को अपनी बेइज़्ज़ती समझते हैं, जैसे होटल वाले जानबूझकर उन्हें परेशान कर रहे हों!”
कुछ ने इस उम्र में भूलने-बिसरने को वजह बताया, तो किसी ने कहा—“अगर ज़ोरदार बहस कर लो, तो होटल वाले एक रात कम कर ही देंगे।”
एक मज़ेदार कमेंट था—“आपने तीसरी रात कैंसल कर दी? अरे, असली जीत तो आपकी हुई!”
होटल इंडस्ट्री का सच—कभी-कभी ग्राहक वाकई भगवान नहीं होते
हमें अक्सर सिखाया जाता है—‘ग्राहक भगवान है।’ लेकिन होटल या किसी भी सर्विस इंडस्ट्री में काम करने वाले जानते हैं कि कभी-कभी ग्राहक भगवान कम और ‘अतिथि देवो भयः’ ज़्यादा हो जाते हैं!
रिसेप्शनिस्ट ने जिस धैर्य और प्रोफेशनलिज़्म से करेन जी की हर माँग, हर शिकायत झेली, वो काबिल-ए-तारीफ़ है।
निष्कर्ष—अगली बार होटल जाएँ तो थोड़ा ‘रियल’ रहिए
तो दोस्तों, अगली बार जब आप किसी होटल जाएँ और वहाँ आपको पुराने ज़माने के पकवान या सुविधाएँ न मिलें, तो गुस्सा करने से पहले ज़रूर सोचिए—समय बदल गया है, होटल भी!
अगर आपको भी ऐसे कोई मज़ेदार होटल या रेस्तरां के अनुभव हुए हों, तो नीचे कमेंट में ज़रूर साझा करें। और हाँ, होटल स्टाफ़ को भी कभी-कभी ‘थोड़ा सा भगवान’ समझ लीजिए—शायद अगली बार डेज़र्ट भी मिल जाए!
मूल रेडिट पोस्ट: I guess I am the 'Devil'