जब उबर ड्राइवर ने घमंडी सवारी को ठंड में छोड़कर सिखाया सबक
कभी-कभी ज़िंदगी में ऐसे लोग मिल जाते हैं जो खुद को राजा-रजवाड़ा समझते हैं और दूसरों से बात करते समय तमीज़ भूल जाते हैं। खासकर जब आप कस्टमर सर्विस जैसी नौकरी में हों, तो ऐसे ‘ग्राहक भगवान’ टाइप लोग रोज़ मिलते हैं। लेकिन हर बार ग्राहक की चलती नहीं! आज की कहानी है उबर ड्राइवर की, जिसने एक घमंडी पैसेंजर को ऐसा सबक सिखाया, जिसकी वो ठंड में कांपते हुए भी याद रखेगा।
उबर ड्राइवर की दास्तान: "मुझे कोई बाप का नौकर नहीं समझे!"
साल 2018-19 की बात है, डेट्रॉइट (अमेरिका) की सर्द रात। हमारे कहानी के हीरो—एक उबर ड्राइवर—घर से कुछ ही मिनट दूर तीन-चार लोगों को लेने जा रहे थे। मौसम उतना कड़क नहीं था, लेकिन शायद पैसेंजर का ‘मिज़ाज’ बहुत ठंडा था!
ड्राइवर जैसे ही जीपीएस पर बताए गए लोकेशन पर पहुँचे, वहाँ कोई नहीं दिखा। हमारे देश में जैसे कभी-कभी ओला/उबर बुलाने के बाद “भैया, कहाँ हो?” का कॉल आता है, वैसा ही इधर भी हुआ। पहले जिस आदमी ने उबर बुक की थी, वो शांति से बात कर रहा था, लेकिन उसके दोस्त ने फोन ले लिया—भारत या ब्रिटिश लहजे में, और शुरू हो गए ताने, “हम ठंड में जम रहे हैं, इतनी देर क्यों हो रही है? आपको क्या समझ नहीं आ रहा?”
ड्राइवर ने भी सोचा, “भैया, दो मिनट भी नहीं हुए, और इतना attitude!” कई बार लगता है कुछ लोग गाड़ी के इंतज़ार में खड़े होने की एक्टिंग भी धांसू करते हैं, ताकि ड्राइवर पर रौब जमाया जा सके। लेकिन यहाँ ड्राइवर ने वही किया जो हर सेल्फ-रिस्पेक्ट वाले इंसान को करना चाहिए—फोन काटा, राइड कैंसिल की, और अगले पैसेंजर की तरफ बढ़ गए!
ग्राहक का घमंड और ड्राइवर की चालाकी: कौन सही, कौन गलत?
हमारे यहाँ एक कहावत है—“जैसी करनी, वैसी भरनी।” Reddit पर इस कहानी के नीचे एक कमेंट ने बिल्कुल सही लिखा, “कस्टमर सर्विस में काम करने का मतलब ये नहीं कि आपके माथे पर लिखा हो—‘मुझे बेइज़्ज़त करो, मैं सब सह लूंगा!’”
कई ड्राइवरों ने भी अपनी-अपनी कहानियाँ साझा कीं। एक साहब ने बताया, “मैं तो ऐसे लोगों को देखता ही कैंसिल कर देता हूँ। खुद को बड़ा महाराज समझते हैं, लेकिन सच में इन्हें सबक सिखाना ज़रूरी है।”
एक दूसरी यूज़र ने सवाल उठाया—“क्या हमेशा ड्राइवर ही सही होता है? कभी-कभी कस्टमर भी सही जगह खड़े होते हैं, लेकिन ड्राइवर लोकेशन मिस कर देते हैं।” इस पर एक जवाब आया—“गलती किसी की भी हो, अगर कोई बत्तमीज़ी करेगा, तो मैं भी बर्दाश्त नहीं करूंगा।”
इस बहस में एक मज़ेदार कमेंट भी था—“अगर मेरी वजह से उबर कैंसिल हो जाए, तो मैं अपने दोस्त को कभी भी कहीं नहीं छोड़ूंगा!” यानी, दोस्ती में भी ये नियम लागू हो सकता है—“बदतमीज़ी करोगे, तो भुगतो!”
भारतीय नजरिए से: रोज़मर्रा की जिंदगी में तमीज़ कितनी ज़रूरी?
हमारे देश में भी ओला-उबर ड्राइवर और पैसेंजर के झगड़े आम हैं। कई बार पैसेंजर सोचते हैं कि चूँकि उन्होंने पैसे दिए हैं, इसलिए उन्हें भगवान की तरह ट्रीट किया जाए। लेकिन असल में इज़्ज़त दो तरफा होती है।
कितनी बार आपने अपने शहर में सुना होगा—“भैया, जल्दी आओ! मैं 10 मिनट से खड़ा हूँ!” और फिर ड्राइवर आता है, तो सामने कोई नहीं दिखता। कई बार सही जगह, सही वक्त, और सही बातचीत—तीनों की कमी रह जाती है।
एक कमेंट में किसी ने लिखा—“अगर सब लोग शांति और इज़्ज़त से बात करें, तो कोई भी समस्या मिनटों में हल हो सकती है। लेकिन जैसे ही कोई घमंड दिखाता है, मामला बिगड़ जाता है।”
ये बात हमारी हिंदी फिल्मों के डायलॉग की तरह लगती है—“इंसान की पहचान उसके बर्ताव से होती है, कपड़ों से नहीं!”
मजेदार मिसालें और पाठक की राय
Reddit पर कई और मजेदार किस्से शेयर हुए—किसी ने लिखा, “एक बार ड्राइवर होटल गलत ले गया, इतना गुस्सा आया कि पैसे देकर दूसरा टैक्सी बुलवा ली!” किसी ने बताया, “अगर दोस्त ने ड्राइवर को नाराज़ किया, तो अगली बार मैं उसे लिफ्ट नहीं दूँगा।”
ऐसे किस्से सुनकर मन करता है, काश हमारे यहाँ भी हर बार बदतमीज़ी का ऐसा जवाब मिल जाए। लेकिन क्या करें, कभी-कभी ड्राइवर भी मजबूर होते हैं—कमाई का सवाल है।
आपका क्या कहना है? क्या आपने कभी ओला-उबर या किसी और सर्विस में ऐसा अनुभव किया है? क्या आपको लगता है कि ग्राहक हमेशा सही होता है या इज़्ज़त दो तरफा होनी चाहिए?
निष्कर्ष: सबक वही—इज़्ज़त बांटो, इज़्ज़त पाओ
इस कहानी से यही सीख मिलती है—चाहे आप ग्राहक हों या सर्विस देने वाले, तमीज़ और धैर्य सबसे बड़ी पूंजी है। जिंदगी में कभी-कभी थोड़ा ‘ठंडा’ रहना भी ज़रूरी है—वरना कहीं ऐसा ना हो कि आप भी किसी उबर ड्राइवर की वजह से सर्दी में खड़े रह जाएँ!
अपना अनुभव जरूर शेयर करें—क्या आप कभी ऐसे किसी झगड़े का हिस्सा बने हैं? कमेंट में बताइए, और अगर पोस्ट पसंद आई हो तो दोस्तों के साथ शेयर करना मत भूलिए!
मूल रेडिट पोस्ट: This guy spoke rudely to me on the phone while I tried picking him up for Uber so I taught him a lesson