जब इंटरनेट सर्विस वालों ने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा, ग्राहक ने उन्हें घुमा-घुमा कर नचाया!
आजकल हर घर में इंटरनेट हमारी रोटी, कपड़ा और मकान जैसा जरूरी हो गया है। सोचिए, अगर वर्क फ्रॉम होम करते वक्त आपका इंटरनेट गायब हो जाए, और सर्विस प्रोवाइडर आपकी मदद करने की बजाय उल्टा आपको ही घुमा दे! ऐसे में कोई क्या करेगा? आज की कहानी है ब्राजील के एक आम आदमी की, जिसने इंटरनेट कंपनी की लापरवाही का ऐसा तोड़ निकाला कि कंपनी के कर्मचारी हर हफ्ते उसके घर की डोरबेल बजाते रह गए, और वो मज़े से अपनी जीत का लुत्फ़ उठाता रहा।
इंटरनेट का झोल – पड़ोसी के सहारे कटे दिन
कहानी की शुरुआत होती है जब हमारे नायक ने अपने घर के लिए नई इंटरनेट कनेक्शन ‘A’ कंपनी (जो ब्राजील में Vivo है) से लगवाने की सोची। टेक्नीशियन आया, लेकिन आधे-अधूरे काम के बाद केबल्स दीवार से हटाकर बस एक टुकड़ा छोड़ गया। बेचारा ग्राहक पूरे तीन महीने तक नीचे के फ्लैट वाले पड़ोसी की वाई-फाई से जैसे-तैसे काम चलाता रहा। आप सोचिए, हमारे देश में भी, अगर कोई आपका Jio या Airtel वाला इंटरनेट यूज कर ले तो कैसा लगेगा? ऊपर से वर्क फ्रॉम होम का जमाना, बॉस की मीटिंग और वीडियो कॉल – सब कुछ अधर में लटक गया।
सपोर्ट टीम – “हम देखेंगे”, पर हल कुछ भी नहीं!
अब शुरू हुआ असली ड्रामा। डेढ़ महीने तक ग्राहक बार-बार टेक्निकल सपोर्ट मांगता रहा। हर बार नए-नए टेक्नीशियन आते, दीवार ताकते, सिर हिलाते, और बिना कुछ किए वापस चले जाते। सात टेक्नीशियन आए, पर किसी ने समस्या हल नहीं की। किसी हिंदी फिल्म के सरकारी बाबू की तरह – “साहब, फाइल तो चल रही है, देखते हैं कब होता है।”
एक कमेंट करने वाले ने बड़ा मज़ेदार तंज कसा – “ये तो हमारी सरकारी टेलीफोन कंपनियों जैसी ढीली चाल है। वहाँ भी लाइन ठीक करने में हफ्ते निकल जाते हैं, और आखिर में ग्राहक ही सिर धुनता रह जाता है।”
जब गुस्सा फूटा – “अब तो बदलेंगे कंपनी!”
इतनी परेशानियों के बाद, आखिरकार ग्राहक ने ठान लिया, “अब बस! इस A कंपनी से पीछा छुड़ाना है।” उसने दूसरी कंपनी ‘B’ से बात की। B ने कहा – “पहले पुरानी केबल्स हटवाइए, तभी नया कनेक्शन देंगे।” अब ग्राहक ने फिर A को फोन किया, तो जवाब मिला – “हमारी अब कोई जिम्मेदारी नहीं है, जो करना है खुद करो!”
यहाँ पर एक पाठक ने कमेंट किया – “भैया, ये तो वही हुआ ‘आ बैल मुझे मार’! जिम्मेदारी से भागना तो कोई इनसे सीखे।”
धैर्य का घड़ा फूटा, बदला शुरू – ‘घुमा-घुमा के नचाना’
अब ग्राहक ने सोचा – “जब ये मुझे घुमा सकते हैं, तो मैं क्यों न इन्हें घुमाऊँ?” उसने A कंपनी से फिर नया इंस्टॉलेशन रिक्वेस्ट कर दिया, और साथ ही एक तीसरी कंपनी ‘C’ भी चुन ली। A वाले फिर आए, लेकिन वो पुरानी ही समस्या लेकर लौट गए – “पहले बिल्डिंग के मेन बॉक्स का मसला सुलझाओ।”
इसी बीच C के टेक्नीशियन ने कमाल कर दिया – जान लगाई और इंस्टॉलेशन पूरा कर दिया। ग्राहक ने चैन की सांस ली, लेकिन A वालों की कहानी अभी बाकी थी!
अब ग्राहक हर हफ्ते A कंपनी से इंस्टॉलेशन शेड्यूल करवाता, लेकिन जब टेक्नीशियन आते, तो दरवाजा ही नहीं खोलता। फोन भी नहीं उठाता। वो लोग फिर नई तारीख तय करते, और ग्राहक फिर से वही करता – एकदम ‘चककर में पक्का घुमा दिया’ वाला खेल!
एक कमेंट में किसी ने लिखा – “भैया, ये तो मस्त रिवेंज है! कंपनी को उसकी ही दवा चखाई है। कभी-कभी छोटी-छोटी शैतानियाँ भी दिल को तसल्ली देती हैं।”
टेकअवे – ग्राहक भगवान है, पर उसका भी सब्र टूट जाता है
यह कहानी सिर्फ ब्राजील की नहीं, भारत में भी ऐसी कहानियाँ आम हैं। चाहे BSNL हो या निजी कंपनी, जब सर्विस देने का वक्त आता है तो जिम्मेदारियाँ इधर-उधर टालना और ग्राहक को बार-बार दौड़ाना आम बात है। लेकिन कभी-कभी, ग्राहक भी अपना तरीका निकाल लेता है – ‘जैसे को तैसा’!
तो अगली बार जब आपकी भी कोई सर्विस कंपनी आपको घुमाए, तो इन जनाब की तरह थोड़ा सा शरारती बन जाइए। क्या पता, आपकी छोटी सी बदमाशी से कंपनी का सिस्टम सुधर जाए!
आप क्या सोचते हैं?
क्या आपके साथ भी कभी किसी सर्विस कंपनी ने ऐसा व्यवहार किया है? क्या आपने भी कभी किसी कंपनी को सबक सिखाया? कमेंट में अपनी मजेदार कहानियाँ जरूर साझा करें – क्योंकि असली मज़ा तो हमारे अपने अनुभवों में है!
मूल रेडिट पोस्ट: A provedora de internet me disse que o bloqueio dos cabos na parede não eram de responsabilidade, então eu dei trabalho a eles.