जब इंटरनेट नहीं चला तो 'डस्ट' ने बचाई इज़्ज़त: टेक्निकल सपोर्ट की मज़ेदार कहानी
आजकल के ज़माने में, घर हो या ऑफिस, इंटरनेट का रुक जाना किसी आफ़त से कम नहीं। लेकिन जब तकनीकी सहायता (टेक्निकल सपोर्ट) को कॉल करना पड़े, तो कई बार असली झगड़ा वहां से शुरू होता है! आज हम आपको इंटरनेट की इसी दुनिया से एक मज़ेदार किस्सा सुनाने जा रहे हैं, जिसमें न तो मशीन की खराबी थी, न ही कोई बड़ा तकनीकी दोष — बल्कि सारा मामला एक "डस्ट" (धूल) के बहाने का था!
"राउटर रीस्टार्ट किया है?" — वो क्लासिक सवाल
ये किस्सा है एक बड़ी कार कंपनी के टेक्निकल सपोर्ट में काम करने वाले एक कर्मचारी का। एक दिन एक यूज़र ने कॉल किया, "भैया, इंटरनेट बहुत स्लो है।" कंपनी का सिस्टम देखता है कि शिकायत पहले से दर्ज है और उसमें लिखा है — "राउटर को रीस्टार्ट करें।" अब टेक्निकल सपोर्ट ने वही पुराना मंत्र दोहराया, "राउटर का पावर केबल निकालिए, 10-15 सेकंड रुकिए, फिर वापस लगाइए।"
यूज़र ने तुरंत जवाब दिया, "हाँ-हाँ, कर लिया, नहीं हुआ कुछ।" अब भला टेक्निकल सपोर्ट वाले को कौन उल्लू बना सकता है? उन्होंने राउटर में लॉगइन किया और देखा — राउटर की अपटाइम 3500 दिन! यानी लगभग 9 साल से कभी ऑफ ही नहीं हुआ। मतलब भाई साहब ने केबल तो छोड़िए, शायद राउटर को हाथ भी नहीं लगाया होगा।
"धूल झाड़ो, इंटरनेट चालू करो!" — भारतीय जुगाड़ का विदेशी तड़का
अब दिक्कत ये थी कि यूज़र बार-बार कह रहा था उसने रीस्टार्ट कर लिया, जबकि असल में कुछ नहीं किया। ऐसी स्थिति में सीधे-सीधे बोलना, "भाई, तुमने झूठ बोला है," कई बार उल्टा पड़ सकता है। जैसा एक कमेंट करने वाले ने भी लिखा — "अगर किसी को आप सीधा झूठा बोल देंगे, तो वो नाराज़ भी हो सकता है।"
तो टेक्निकल सपोर्ट वाले ने एक बड़ा ही दिलचस्प तरीका अपनाया। उन्होंने यूज़र से कहा, "भैया, आपको गेमबॉय के पुराने वीडियो गेम कैसेट याद हैं? उनमें अगर धूल आ जाती थी तो हम फूंक मारकर उसे साफ़ करते थे, तभी गेम चलता था। वैसे ही, आपके राउटर के पावर केबल में भी शायद धूल आ गई हो। एक बार केबल निकालिए, उसमें फूंक मारिए और फिर लगाइए।"
बस भाई, यूज़र ने जैसा कहा वैसा किया, और चमत्कार — राउटर डिस्कनेक्ट हो गया, यानी असली में रीस्टार्ट हुआ! और इंटरनेट फिर से दौड़ने लगा। टेक्निकल सपोर्ट ने हँसते हुए कहा, "देखिए, शायद केबल में सच में धूल थी!"
"यूज़र बोले तो राम भरोसे!" — कम्युनिटी के मज़ेदार तजुर्बे
Reddit के इस पोस्ट पर बहुत लोगों ने अपने अनुभव बांटे। एक ने लिखा, "हमारे यहाँ भी ग्राहक हमेशा बोलते थे — सब चेक कर लिया, पर असल में कुछ नहीं करते।" एक और कमेंट में किसी ने चुटकी ली, "अगर यूज़र से बोलो — मैं आपके राउटर में लॉगिन कर रहा हूँ, और देख रहा हूँ कि राउटर 9 साल से बंद ही नहीं हुआ, तो शायद वो नाराज़ हो जाए।" यानी भारतीय कॉल सेंटर वाले जिस तरह "सर, केबल निकालिए, फिर लगाइए" बोलते हैं, वही जुगाड़ यहाँ भी चला।
एक और मजेदार कमेंट ने बचपन की याद दिलाई — "अरे भाई, गेम कैसेट में फूंक मारना तो हमारी भी आदत थी। पर सोचिए अगर डॉक्टर ऐसे ही ऑपरेशन करे — 'थोड़ा फूंक मार दो, देखो सही हो जाता है!'"
कुछ ने तो यह भी लिखा कि कई बार यूज़र कंप्यूटर रीस्टार्ट करने के बजाय सिर्फ मॉनिटर ऑन-ऑफ कर देते हैं, और बोलते हैं — "हो गया रीस्टार्ट!"
"जुगाड़ और सोशल इंजीनियरिंग — भारतीय आईटी का असली अस्त्र"
इस कहानी से एक और बात सामने आती है — टेक्निकल सपोर्ट वालों को असली काम तो तब आता है जब उन्हें यूज़र को सही काम करवाना हो, चाहे वो "फूंक मारना" ही क्यों न हो! एक कमेंट ने इसे "सोशल इंजीनियरिंग" कहा — यानी यूज़र की नासमझी को समझकर, उसे मनवाने के लिए बहाने और कहानियों का सहारा लेना।
हमारे यहाँ भी, बिजली चली जाए तो लोग कहते हैं, "पंखे का प्लग निकाल के फिर लगाओ, देखो चालू हो गया!" यानी हर जगह जुगाड़ चलता है, बस नाम अलग-अलग होते हैं।
निष्कर्ष: तकनीक हो या जुगाड़, दोनों चाहिए!
ये कहानी हमें सिखाती है कि हर टेक्निकल समस्या का हल सिर्फ मशीन में ही नहीं, बल्कि इंसान की सोच और जुगाड़ में भी छुपा होता है। कभी-कभी छोटी सी चालाकी, थोड़ी सी हँसी-मजाक और बचपन की यादें — जैसे गेम कैसेट में फूंक मारना — भी बड़ा काम कर जाती है।
अब आप ही बताइए, आपके साथ कभी ऐसा कुछ हुआ है? क्या आपने भी कभी "जुगाड़" से अपने कंप्यूटर, वाई-फाई या टीवी को ठीक किया है? नीचे कमेंट जरूर करें और अपनी मजेदार कहानियाँ साझा करें!
टेक्नोलॉजी की दुनिया में ऐसे और किस्सों के लिए जुड़े रहिए — क्योंकि असली मज़ा तो जुगाड़ में है!
मूल रेडिट पोस्ट: Dusty cables