जब असली गड़बड़ खुद टेक्निकल सपोर्ट वाला निकला: एक मज़ेदार किस्सा
हमारे देश में जब भी कोई कंप्यूटर या मोबाइल गड़बड़ करता है, तो सबसे पहले घर में वही 'एक्सपर्ट' खोजा जाता है, चाहे वो भतीजा हो या पड़ोस का बच्चा। लेकिन सोचिए, अगर वही एक्सपर्ट खुद गलती कर बैठे? आज की कहानी टेक्निकल सपोर्ट की दुनिया की ऐसी ही एक घटना है, जिसमें न तो ग्राहक दोषी था, न ही मशीन... असली गड़बड़ खुद सपोर्ट वाले से हो गई!
तकनीक और भूल-चूक: एक अनोखा संगम
कहानी Reddit के एक पोस्ट से ली गई है, जहाँ u/BitBird- नामक यूज़र ने अपना दिलचस्प अनुभव साझा किया। हुआ यूँ कि उन्हें एक यूज़र से हड़बड़ाया हुआ फोन आया – "भैया, ये नई-नवेली, महंगी Docking Station चल ही नहीं रही! स्क्रीन पर कुछ नहीं आ रहा, USB भी मरी पड़ी है!"
अब हमारे यहाँ भी जब टीवी नहीं चलता, तो रिमोट की बैटरी बदलने से लेकर झाड़ू मारने तक हर उपाय आज़माते हैं। वैसे ही BitBird- ने भी घंटे भर तक वो सारे नुस्खे आज़माए, जो हर टेक सपोर्ट वाला करता है – ड्राइवर अपडेट, फर्मवेयर चेक, केबल बदलना, पोर्ट बदलना। मगर सब बेकार!
आखिर में उन्होंने यूज़र से Dock का मॉडल नंबर पढ़वाने को कहा। जवाब आया – "नीचे लिखा है – AC/DC Adapter।"
यहीं से असली कॉमेडी शुरू हुई!
असली वजह: 'पावर' का खेल
असल में, यूज़र ने लैपटॉप का पावर ब्रिक Dock के USB-C पोर्ट में ठूंस दिया था, और Dock का असली पावर सप्लाई तो डिब्बे में ही आराम कर रहा था। Dock तो जैसे बिना बिजली के पंखा – न चलेगा, न चलेगा! घंटा भर दोनों 'एक्सपर्ट' एक बंद मशीन को चालू करने में लगे रहे।
फोन पर जैसे ही ये बात सामने आई, दोनों तरफ ऐसी चुप्पी छा गई, जैसी एग्जाम में पेपर खोलते ही आती है जब कुछ भी समझ नहीं आता। BitBird- ने लिखा, "मैंने तो 'मैंने तो कहा था' भी नहीं बोला। ऐसी मूर्खता सबका सिर झुका देती है।"
सबकी अपनी-अपनी 'प्लग' वाली कहानियाँ
यह किस्सा जितना मज़ेदार है, उतना ही आम भी है। Reddit के बाकी यूज़र्स ने भी अपनी-अपनी 'प्लग' वाली कहानियाँ साझा कर दीं। एक यूज़र ने लिखा – "कई साल पहले मैंने केबल कंपनी को फोन किया कि राउटर खराब है। घंटा भर troubleshooting के बाद पता चला, केबल ही लगी नहीं थी।"
एक और मज़ेदार कमेंट आया – "कंपनी का टेक्नीशियन पूछता है – राउटर पर ऊपर कोई बटन है? मैंने कहा – हाँ, बड़ा सा बटन है। उसने कहा – दबाइए। बस, बटन दबाते ही वाईफाई चल पड़ा! बाद में याद आया, बिल्ली वहीं खेल रही थी जब इंटरनेट बंद हुआ था।"
यहाँ तक कि एक यूज़र ने तो सुझाव दिया, "क्या आपके पास बिल्ली है?" ये troubleshooting का स्टैण्डर्ड सवाल होना चाहिए!"
हमारे यहाँ भी घर में अक्सर टीवी या डीटीएच 'अपने-आप' बदल जाता है, और बाद में पता चलता है – रिमोट पर कोई बैठ गया था, या बच्चा छेड़ गया था। एक यूज़र ने भी लिखा, "हमने रिमोट को डेकोरेटिव बॉक्स में रखा था, बिल्ली बैठी और टीवी अपने-आप बदल गया!"
'प्लग' चेक करना – भारतीय ऑफिस की सबसे बड़ी टेक ट्रिक
अगर आप किसी भारतीय ऑफिस में काम कर चुके हैं, तो ये डायलॉग खूब सुना होगा – "अरे भाई, पहले देख लो, प्लग लगा है या नहीं?" हमारे देश में भी, चाहे प्रिंटर हो या कंप्यूटर, सबसे पहली सलाह यही मिलती है – "एक बार निकाल के फिर से लगाओ।"
एक अनुभवी यूज़र ने बताया, "मैंने सिख लिया – troubleshooting की शुरुआत हमेशा power से ही करनी चाहिए।" और एक ने तो यहाँ तक कहा, "कभी-कभी इतनी छोटी गलती होती है कि मानते हुए भी शर्म आती है।"
कुछ ने तो अपने किस्से भी सुनाए – जैसे एक ने gaming PC का गलत HDMI पोर्ट लगा दिया, तो किसी ने कंपनी को मेल कर दिया कि RGB strip नहीं लगी, बाद में पता चला, वो तो पहले से ही थी, बस दिख नहीं रही थी!
सबक: गलती किससे नहीं होती!
इस पूरी चर्चा में सबसे प्यारी बात ये रही कि किसी ने भी एक-दूसरे का मज़ाक नहीं उड़ाया। सबने माना, "गलती सबसे होती है।" खुद OP ने लिखा, "हम सबने तो दादी-नानी की बेकार तकनीकी समस्याएँ हल करते-करते ही सीखा है।"
एक और कमेंट ने दिल छू लिया – "अगर आप भी ऐसी गलती कर बैठते हैं, तो चिंता मत कीजिए – हम सब करते हैं!"
निष्कर्ष: हँसते-हँसते सीखिए
तो मित्रों, अगली बार जब लैपटॉप, प्रिंटर या मोबाइल बंद हो जाए, troubleshooting शुरू करने से पहले एक बार 'पावर' और 'प्लग' ज़रूर चेक कर लें। कहीं ऐसा न हो कि आप भी खुद ही अपनी समस्या के जिम्मेदार निकल जाएँ, और बाद में घरवाले 'बड़े एक्सपर्ट' कहकर चाय के साथ मज़ाक उड़ाएँ!
और हाँ, ऐसी मज़ेदार गलतियों को दिल छोटा करके नहीं, मुस्कुराकर अपनाइए। आखिर, "गलती सबसे होती है, और सही में, हँसी सबसे अच्छी दवा है!"
क्या आपके साथ भी कभी ऐसी कोई टेक्निकल गड़बड़ हुई है? कमेंट में ज़रूर बताइए – शायद अगली बार आपकी कहानी ही छप जाए!
मूल रेडिट पोस्ट: My favorite tech support story is the one where I was the problem