विषय पर बढ़ें

चोर केविन की अजीब दलीलें: 'मैं 27 साल का हूँ!

कैविन के साथ चोरी के प्रयास का एनीमे चित्रण, तनावपूर्ण दुकान का दृश्य दर्शाता है।
कैविन, बदनाम चोर, की नवीनतम कारस्तानी में डूब जाइए! यह जीवंत एनीमे-शैली का चित्रण आमने-सामने की घड़ी को दर्शाता है, जिसमें बहानों और हरकतों की एक रोमांचक कहानी का मंच तैयार किया गया है, जिसे आप मिस नहीं करना चाहेंगे!

हमारे भारत में दुकानदारी करना जितना मुश्किल है, उतना ही मनोरंजन से भरपूर भी! हर दिन कोई न कोई ऐसा किरदार मिल ही जाता है, जो हँसी का कारण बन जाता है। आज मैं आपको एक ऐसी कहानी सुनाने जा रहा हूँ, जिसमें दुकान का मालिक और बार-बार चोरी करने वाला ‘केविन’ नाम का लड़का, दोनों ही अपने-अपने अंदाज में शानदार हैं। तो ज़रा सोचिए, जब कोई ग्राहक चोरी करते रंगे हाथों पकड़ा जाए, और उसके बाद भी ऐसे-ऐसे बहाने बनाए कि सुनकर हँसी छूट जाए — तो क्या हो?

परिचय: दुकान और केविन की पहली भिड़ंत

कहानी शुरू होती है एक छोटे से पश्चिमी देश के कस्बे में, जहां एक दुकानदार (कहानी के लेखक) रोज़ाना ग्राहकों को सामान बेचते हैं। लेकिन यहाँ का माहौल कुछ-कुछ हमारे मोहल्ले की किराना दुकान जैसा है—जहाँ हर किसी की पहचान होती है, और हर रोज़ वही जाने-पहचाने चेहरे आते हैं।
इसी दुकान में एक छोकरे की एंट्री होती है, जिसका नाम केविन है। पिछले महीने दुकानदार ने केविन को कई बार चोरी करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया था। जब पकड़ा गया, तो केविन ने फौरन नया बहाना गढ़ दिया—“मैं तो अभी-अभी इस शहर में आया हूँ, आपको कभी देखा ही नहीं!”
अब भला, दुकानदार कैसे न पहचानते? उनके अनुसार, “उसका बाल कटवाने का स्टाइल और ब्रेसेस (दाँतों पर लगे तार) कहीं से भी छुप नहीं सकते!” यानी, जैसे अपने यहाँ कोई मोहल्ले का बच्चा हर साल राखी बँधवाने के लिए बहाने बनाता है, वैसे ही केविन यहाँ चोरी करते पकड़े जाने पर मासूमियत का नाटक करता है।

इस बार का बहाना: “पर मैं तो 27 साल का हूँ!”

अब, कहानी में असली मसाला तब आया, जब कुछ हफ्ते बाद वही केविन फिर दुकान में घुस आया। सीधा काउंटर पर पहुँचकर बोला, “भैया, वेप्स (इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट) के बारे में बताइए।” दुकानदार की नज़र तो तुरंत पहचान गई—‘अरे, ये तो वही पुराना चोर है!’
दुकानदार ने बिना समय गँवाए कह दिया, “भाई, दुकान से निकल जाओ, तुम्हें कुछ नहीं मिलेगा।”
यहाँ केविन का नया मास्टरस्ट्रोक—“लेकिन मैं तो 27 साल का हूँ!”
अब सोचिए, भाई चोरी पकड़े जाने के बाद उम्र बताकर क्या सिद्ध करना चाहता था? दुकानदार के अनुसार—“यह क्या तर्क हुआ? उम्र से क्या साबित होता है?”
यहाँ हमारे देश में भी कई बार पुलिस की रेड के समय लोग कहते मिल जाते हैं—“सर, मेरी उम्र तो 18 के ऊपर है, मुझे क्यों पकड़ रहे हो?” लेकिन चोरी और उम्र का क्या रिश्ता?

सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया: लोगों की जबरदस्त टिप्पणियाँ

इस घटना की चर्चा जैसे ही Reddit नाम की वेबसाइट पर पहुँची, लोगों ने खूब चटकारे लिए।
एक प्रमुख टिप्पणीकार ने लिखा—“यह केविन अपनी ही दुनिया में इतना खो गया है कि उसे लगता है दुकानदार उसे पहचान ही नहीं सकते। शायद उसे लगा, आप उसे इसलिए निकाल रहे हैं क्योंकि आप सोचते हैं वह नाबालिग है।”
इस पर दुकानदार ने भी मज़ेदार जवाब दिया—“हो सकता है, आप सही कह रहे हैं!”
एक अन्य पाठक ने तो केविन की तर्कशक्ति की तुलना हिन्दी फिल्मों के विलेन से कर दी—“कुछ लोगों के कानों के बीच में इतना बड़ा गैप होता है, डॉक्टर को भी वहाँ वैक्यूम से बचकर रहना चाहिए!”
सोचिए, अगर अपने गाँव के चौपाल पर यह किस्सा सुनाया जाए, तो चाय की चुस्कियों के साथ कितना हँसी-ठहाका होता!
एक मज़ेदार टिप्पणी में किसी ने तो लिख दिया—“अरे भाई, उम्र का यही तो लॉजिक है! 27 साल के हो गए, अब चोरी भी जायज़ है?”
यह सुनकर हमारे यहाँ का मशहूर डायलॉग याद आ गया—“बच्चा समझकर माफ कर देंगे क्या, अब!”

क्या भारत में भी ऐसे केविन मिलते हैं?

अगर आप सोच रहे हैं कि ऐसे किरदार सिर्फ विदेशों में होते हैं, तो ज़रा अपने मोहल्ले की दुकान, या स्कूल-कॉलेज के दिनों को याद कीजिए। हर जगह कोई-न-कोई ‘केविन’ जरूर होता है—जो पकड़े जाने पर कभी बीमारी का बहाना बनाता है, कभी ‘घर में शादी थी’ कहता है, कभी ‘माँ ने मना किया था’...
हमारे देश में भी, दुकानदारों का धैर्य किसी तपस्वी से कम नहीं!
यहाँ भी दुकानदार अपने पुराने ग्राहकों को बालों की स्टाइल, आवाज़, या चाल-ढाल से पहचान लेते हैं। और जब कोई बार-बार चोरी करते पकड़ा जाए, तो उसकी दलीलें सुनकर पूरा मोहल्ला गवाह बन जाता है।

निष्कर्ष: बहानेबाज़ी की हद भी कोई चीज़ होती है!

कहानी से यही सिखने को मिलता है कि चाहे अमेरिका हो या भारत, बहानेबाज़ी की कोई सीमा नहीं है। उम्र, शहर, या पहचान—कोई भी तर्क अगर गलत काम को जायज़ ठहराने की कोशिश करे, तो वो सिर्फ हँसी का पात्र बनता है।
तो अगली बार जब अपने मोहल्ले या ऑफिस में कोई ‘केविन’ टाइप किरदार आपको अजीब-ओ-गरीब दलीलें दे, तो मुस्कराकर याद करिए—दुनिया गोल है, और हर जगह एक ‘केविन’ जरूर मिलता है!

आपके मोहल्ले या ऑफिस में भी ऐसा कोई किरदार है? अपनी मज़ेदार यादें नीचे कमेंट में जरूर साझा करें—शायद अगली कहानी आपकी हो!


मूल रेडिट पोस्ट: His excuse this time may very well be even worse than his last one