चीयर प्रतियोगिता वाले सप्ताहांत: होटल कर्मचारियों की असली अग्निपरीक्षा!
होटल में काम करना वैसे तो रोज़ की बात है, लेकिन कभी-कभी कुछ ऐसे सप्ताहांत आ जाते हैं कि कर्मचारी सोचने लगते हैं—“काश आज छुट्टी मिल जाती!” ऐसा ही एक अनुभव हाल ही में एक होटल रिसेप्शनिस्ट के साथ हुआ, जब उसे पता चला कि उस सप्ताहांत होटल में चीयर प्रतियोगिता चल रही है। अब, सोचिए—एक ओर चमचमाते कपड़ों में ढेर सारी किशोर लड़कियां, दूसरी ओर उनकी ‘शेरनी’ मम्मियाँ, और फिर बेचारे होटल कर्मचारी!
अगर आप सोचते हैं कि होटल में सिर्फ वीआईपी या गुस्सैल मेहमान ही मुश्किल पैदा करते हैं, तो जनाब, आपने अभी तक चीयर गर्ल्स और उनकी माताओं से पाला नहीं पड़ा!
होटल कर्मचारी की 'चीयर' आफत
बीस साल के अनुभव के बाद भी हमारे रिसेप्शनिस्ट साहब को कभी डर नहीं लगा, चाहे सामने कोई बड़ा व्यापारी हो या बाइकर गैंग का सदस्य। लेकिन जैसे ही चीयर प्रतियोगिता का सप्ताहांत आया, उनकी हिम्मत जवाब देने लगी। इन छोटे-छोटे चीयर गर्ल्स और उनकी माताओं के आगे तो बड़े-बड़े सूरमा भी हार मान जाते हैं! हालत ये कि मैनेजर साहब भी उन्हें छुट्टी नहीं देते, क्योंकि उनका मानना है कि बाकी स्टाफ इन 'चीयर डेमनों' का सामना नहीं कर पाएगा।
इन प्रतियोगिता वाले दिनों में सबसे बड़ी समस्या आती है—लेट चेकआउट की। हर कोई चाहता है कि रविवार को देर से चेकआउट मिले, लेकिन जब एक साथ 75 कमरे खाली करवाने हों, तो यह मुमकिन नहीं। हाउसकीपिंग मैनेजर तो वैसे ही गुस्से में रहते हैं, ऊपर से अगर किसी ने गलती से लेट चेकआउट दे दिया, तो नई लड़की की खैर नहीं!
तौलियों और तकरार का महायुद्ध
अब बात आती है तौलियों की। भारतीय शादी में जैसे फूलों की मांग रहती है, वैसे ही इन चीयर गर्ल्स को छह-छह तौलिये चाहिए होते हैं। हालत ये कि होटल में तौलिये ही खत्म हो जाएं! ऊपर से हर किसी को बस अपनी ही पड़ी रहती है—“भैया, एक तौलिया और दे दो ना!” अब सोचिए, स्टाफ की हालत कैसी होती होगी?
इसी बीच, एक 'क्रिश्चियन' बाइकर अपनी पत्नी और दोस्त के साथ रात के ढाई बजे होटल लौटते हैं। आते ही स्टोर में घुस जाते हैं, जैसे कोई खजाना ढूंढ रहे हों। दस मिनट बाद पूछते हैं—दूध मिलेगा क्या? जब बताया गया कि दूध नहीं है, तो साहब बिफर पड़े—“होटल में दूध नहीं? ये कैसे हो सकता है!” फिर बीयर मांगी, लेकिन रात के साढ़े तीन बजे किस देश में बीयर मिलेगी? साहब गुस्से में बड़बड़ाते चले गए, और पत्नी व दोस्त वहीं शर्म से खड़े रह गए।
चीयर मॉम्स: ‘सास बहू’ का नया संस्करण
अब आते हैं असली सिरदर्द पर—चीयर मॉम्स! जैसे हमारे यहाँ शादी में दुल्हन की बुआ और मामी का रौब होता है, वैसे ही इन प्रतियोगिताओं में इन माताओं का आतंक होता है। एक कमेंट करने वाले ने तो लिखा, "बच्चे तो फिर भी सीधे हैं, असली शैतान तो उनकी माएं हैं!" ये माताएँ मानती हैं कि होटल के सारे नियम इनके लिए नहीं बने। बाहर का खाना लाकर रेस्तराँ में खाना है, तो खाना ही है! मैनेजर ने मना किया तो पूरा हंगामा—“हमने पैसे दिए हैं, हमें कोई कुछ नहीं कह सकता!”
एक और मजेदार बात, इन माताओं को हर समय वाइन या एस्प्रेसो मार्टिनी चाहिए। प्लेट गर्म है या नहीं, बस झपट लेना है। अगर स्टाफ ने टोका, तो तुरंत शिकायत—“आपने हमें कैसे टोक दिया!” जैसे कोई अपराध कर दिया हो।
बाकी मेहमानों की परेशानी और होटल स्टाफ की मजबूरी
इन चीयर ग्रुप्स के कारण बाकी मेहमान भी परेशान हो जाते हैं। कोई नीचे नाश्ता करने नहीं आ सकता, कोई पूछता है—“ये कब तक रहेंगे?” बच्चों से ज़्यादा माताएँ रात में गलियारों में शोर मचाती हैं, दरवाज़े पीटती हैं, पार्टी करती हैं। नियम समझाओ तो जवाब—“हमने पैसे खर्च किए हैं, हमें मत सिखाओ!”
होटल स्टाफ तो चाय पीते-पीते सोचता है—कब ये चीयर प्रतियोगिता खत्म हो और चैन से सांस लें!
क्या करें, कैसे झेलें?
असल में, ये चीयर वीकेंड होटल स्टाफ के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं। हर कोई चाहता है कि उसके लिए खास इंतज़ाम हो, नियम बदल जाएँ, और अगर कुछ न मिले तो शिकायतों का पिटारा खुल जाता है। एक कमेंट करने वाले ने तो मजाक में लिखा, “हाउसकीपिंग स्टाफ को बचाओ, मैनेजर तो फिर भी भाग सकते हैं!”
सच तो ये है, ऐसे सप्ताहांत में होटल का हर कर्मचारी ‘घरवाले’ जैसा धैर्य और ‘मुहल्ले के प्रधान’ जैसी सूझ-बूझ लेकर ही टिक पाता है। वरना एक दिन में ही छुट्टी की अर्जी लिखनी पड़ जाए!
आपकी राय?
क्या आपके साथ भी कभी ऐसे नखरेबाज़ मेहमानों का सामना हुआ है? क्या आप होटल इंडस्ट्री या किसी सेवा क्षेत्र में काम करते हैं? अपने अनुभव कमेंट में जरूर साझा करें। आखिर, मुसीबत में हँसी ही तो सबसे बड़ी राहत है!
अगर आपको ये किस्सा पसंद आया हो तो शेयर करना न भूलें। अगली बार जब होटल में ठहरें, तो कर्मचारियों की मेहनत को ज़रूर याद करें—क्योंकि हर मुस्कान के पीछे, कई बार चीयर वीकेंड की आँधी छुपी होती है!
मूल रेडिट पोस्ट: Cheer Competition Weekends Are Not Fun