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चीनी नहीं? साहब, आपने मेरी चाय में चीनी डाल दी!—पाँच सितारा होटल की अनोखी दास्तान

लक्ज़री होटल में स्पा रिसेप्शनिस्ट स्वागत पेय परोसते हुए, ग्राहक सेवा की चुनौतियों को दर्शाते हुए।
एक सिनेमाई पल में, हमारी स्पा रिसेप्शनिस्ट मेहमानों की अपेक्षाओं और आतिथ्य के बीच संतुलन बनाते हुए, स्वागत पेय परोसती हैं। हमारी नवीनतम ब्लॉग पोस्ट में मुस्कानों और चुनौतियों की कहानी जानें!

अक्सर हम सोचते हैं कि पाँच सितारा होटलों में काम करने वाले कर्मचारियों की ज़िंदगी बड़ी शाही होती होगी—एसी कमरे, टिप्स की बौछार, हर दिन नए-नए मेहमान, और शानदार माहौल। लेकिन असलियत में इन जगहों पर काम करने वालों की असली परीक्षा तब होती है जब सामने आ जाते हैं "स्पेशल" किस्म के मेहमान। आज की कहानी भी ऐसी ही एक मेहमान के इर्द-गिर्द घूमती है, जो चाय में चीनी को लेकर पूरे होटल को सिर पर उठा देती हैं!

“मिस ए”—विशेष ग्राहक या सिरदर्द?

तो साहब, बात है एक बड़े 5-स्टार होटल की जहाँ हमारी नायिका रिसेप्शनिस्ट का काम करती हैं, खासतौर पर स्पा के काउंटर पर। उनकी ड्यूटी में आता है मेहमानों का स्वागत, मुस्कुराहट के साथ ताज़ा तौलिया और महीने की स्पेशल वेलकम ड्रिंक—इस बार हिबिस्कस और बेरी वाली चाय। यहाँ दो तरह की चाय रखी जाती है—एक बिना चीनी, दूसरी रॉक शुगर (यानि मिश्री) के साथ, लेकिन मीठी वाली सिर्फ़ उन्हीं को मिलती है जो विशेष तौर पर माँगें।

अब मिलिए मिस ए से! पहली बार आईं, लेकिन होटल वालों की नाक में दम कर दिया। कभी बेटे के खाने में सब्ज़ियाँ गिनती हैं, कभी नूडल्स में तेल न हो ये फरमाइश; कभी ग्रीक योगर्ट बिना दाने के चाहिए। होटल के स्टाफ़ तो मानो सुबह-शाम उनकी शिकायतें सुनने के लिए ही रखे गए हों।

“मुझे बिना चीनी वाली चाय चाहिए—लेकिन क्या सच में?”

मिस ए ने जब स्पा में कदम रखा, तो रिसेप्शनिस्ट ने बढ़िया सी बिना चीनी वाली हिबिस्कस चाय पेश की। मिस ए इतनी इंप्रेस हुईं कि रेसिपी कार्ड भी माँग डाला—सोचा, चलो घर पर भी बना लूँगी। रिसेप्शनिस्ट ने खुशी-खुशी ईमेल कर दी रेसिपी।

बस फिर क्या था! चंद घंटों में ही मिस ए के पाँच-पाँच ईमेल आ गए—“क्या आपने मेरी चाय में चीनी मिला दी थी?” जबाब देने से पहले ही ताबड़तोड़ आरोप—“आपने तो मीठा सर्व किया, मुझे धोखा दिया, मेरी सेहत से खिलवाड़!”

यहाँ तक कि होटल के ऑपरेटर, रिसेप्शन, ड्यूटी मैनेजर और जीएम तक को फोन कर-करके परेशान कर डाला। आखिरकार, होटल की ‘कस्टमर इज़ किंग’ वाली नीति के चलते, मिस ए के कमरे में स्पेशल बाथ किट भेज दी गई। अब हर बार चाय देने से पहले बोतल की लेबल दिखाया जाता, बार-बार पूछा जाता—“मेमसाब, स्वाद तो ठीक है ना? कोई एलर्जी तो नहीं?”

“कुछ लोग बस शिकायत ही करना चाहते हैं...”

कम्युनिटी के एक पाठक ने बड़ा सही लिखा—“कुछ लोगों को बस शिकायत करने में मज़ा आता है। चाहे आप कितनी ही अच्छी सर्विस दे लें, वो तो अगले दिन या हफ्ते में फोन कर ही देंगे कि कुछ गड़बड़ थी। अगर वहाँ रहते हुए शिकायत करते तो आप फौरन ठीक कर सकते थे, लेकिन नहीं, बाद में तमाशा खड़ा करना है।”

एक और ने मज़ाक में कहा—“मिस ए को तो सुनकर लगा जैसे वो कटा हुआ उंगली का गुलदस्ता माँग लेंगी!” एक और कमेंट में बताया गया कि कई लोग खाना खाते हुए भी प्लान बनाते हैं कि कैसे फ्री में डेज़र्ट या खाना कंप्लेन से पा सकते हैं। हमारे यहाँ भी तो ऐसे ‘फ्री का माल’ पसंद करने वाले कई लोग देखे होंगे—‘भैया, समोसा ठंडा है, दूसरा दो!’ या ‘चाय में दूध कम है’ कहकर आधा पीने के बाद नया मग मांग लेते हैं।

“नेपोटिज्म कार्ड”—वीआईपी बनने की जुगाड़

मिस ए की कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। रिसेप्शनिस्ट (पोस्ट की लेखिका) ने अपडेट दिया कि मिस ए अगली बार फिर आईं, और इस बार तो ‘वीआईपी’ बनकर! होटल में सुना गया कि वो किसी बड़े आदमी की जान-पहचान से आई हैं, मतलब अपने यहाँ की ‘जुगाड़’ वाली परंपरा पश्चिम में भी खूब चलती है। एक पाठक ने चुटकी ली—“जिन्हें हमेशा सब कुछ प्लेट में मिला हो, उन्हें शिकायत करने की आदत पड़ ही जाती है।”

होटल वालों की मजबूरी—‘ग्राहक भगवान है’?

यहाँ एक बड़ी बहस भी छिड़ी—क्या हर बार ग्राहक को खुश करने के लिए स्टाफ़ को ही झुकना चाहिए? एक पाठक बोले—“मालिक सिर्फ़ पैसे के लिए ऐसे लोगों का सिर चढ़ाते हैं। पर इससे बाकी कर्मचारियों का मनोबल गिरता है।” हमारे देश में भी तो अक्सर देखा है, ‘ग्राहक राजा है’ के नाम पर स्टाफ़ को डाँट पड़ती है, चाहे गलती कहीं की हो।

निष्कर्ष—आपके साथ भी हुआ है कुछ ऐसा?

हर जगह ऐसे मिस ए जैसे लोग मिल जाते हैं—जो कभी खुश नहीं होते, जिनकी शिकायतें कभी खत्म नहीं होती। होटल हो या ढाबा, ऑफिस हो या शॉपिंग मॉल, हमें ऐसे किरदारों से दो-चार होना ही पड़ता है। लेकिन क्या सही में ‘ग्राहक भगवान’ है, या कभी-कभी भगवान को भी दूसरों के लिए थोड़ा सोच लेना चाहिए?

आपकी क्या राय है? क्या आपको भी ऐसे 'चीनी-नमक' वाले ग्राहक मिले हैं? या कभी आपने खुद मज़ेदार या अजीब शिकायत झेली है? अपने अनुभव नीचे कमेंट में जरूर बताइए, ताकि अगली कहानी आपकी हो!


मूल रेडिट पोस्ट: No sugar? How DARE you serve me a drink with sugar!