घास काटने की जिद: पिता-पुत्र की जंग और बीच का जंगली मैदान
क्या आपके घर में भी कभी कोई चीज़ इतनी अहम हो जाती है कि उस पर पूरा परिवार बंट जाता है? वैसे तो हमारे यहाँ चाय की चुस्की या टीवी का रिमोट अक्सर झगड़े की जड़ बनते हैं, लेकिन सोचिए अगर कोई घास का मैदान आपकी आन-बान-शान बन जाए! आज हम आपको सुनाने जा रहे हैं एक ऐसी ही कहानी, जिसकी जड़ है – घास काटने की जिद, पिता-पुत्र की अनबन और एक जिद्दी मैदान, जो सालों से जैसा था वैसा ही पड़ा है।
घास की कहानी: घर की इज्ज़त या सिर्फ़ एक मैदान?
हमारे देश में अक्सर लोग अपने घर के सामने लगे बाग-बग़ीचे को बहुत संजोकर रखते हैं। कहीं तुलसी का पौधा, कहीं आम का पेड़, और कहीं बच्चों का झूला। लेकिन Reddit पर साझा की गई इस कहानी में, अमेरिका के एक परिवार में पिता जी के लिए उनकी घास ही उनकी इज्ज़त बन गई थी।
कहानी के नायक 'जूल्स' बताते हैं कि उनके पास एक छोटा ट्रैक्टर है, जिससे वे अपने घर के सामने की झाड़ियों और लंबी घास को काटते हैं। ये काम राज्य (स्टेट) के ट्रैक्टर वाले साल में दो-तीन बार ही करते थे, लेकिन जूल्स हर बार उस बीच की लंबी घास को भी खुद ही काट देते ताकि सब कुछ एक जैसा दिखे। न पिता को बताया, न कोई हंगामा – सिर्फ़ पाँच मिनट का काम।
एक छोटी सी ‘गलती’ और बड़ी तकरार
एक दिन गलती से जूल्स ने घास काटते समय घास की कतरनें अपने पिता के मैदान की तरफ फेंक दीं। अब आप सोच रहे होंगे, इसमें क्या बड़ी बात! हमारे यहाँ तो मोहल्ले की सफाई वाले भी झाड़ू के ढेर को इधर-उधर कर देते हैं, कोई इतना बुरा नहीं मानता। लेकिन जूल्स के पिता का गुस्सा सातवें आसमान पर चला गया।
उन्होंने तुरंत गाड़ी रोकी, घर जाकर कपड़े बदले, और झाड़ू लेकर मैदान में उतर आए – जैसे कोई मंत्री अपनी सफाई मुहिम पर निकला हो! उन्होंने मैदान से घास की कतरनें चुन-चुन कर हटाईं और बेटे पर बरस पड़े, "ये मेरी शान है, इसे ऐसे क्यों बिगाड़ा? तुम्हें घास काटने का कोई हक नहीं है!"
जिद vs जिद: मैदान का हाल बेहाल
जूल्स ने भी सोच लिया – अगर इतनी परेशानी है तो अब कभी नहीं काटूंगा। पिता ने ताना मारा, "अगर काटना है तो बाद में झाड़ू भी लगाओ।" बेटे ने जवाब दिया, "अब कभी नहीं काटूंगा।"
पिछले चार साल से वही घास, जैसा था वैसा ही पड़ा है। राज्य के ट्रैक्टर वाले जब अपनी तरफ की घास काटते हैं, तो बीच का लंबा जंगली हिस्सा वैसे ही रह जाता है। न पिता खुद काटते, न बेटे को कह सकते हैं। दोनों की जिद के बीच मैदान बन गया है 'नो मैन'ज़ लैंड' – न इधर का, न उधर का!
सोशल मीडिया की महफ़िल: हंसी-ठिठोली और सीख
Reddit पर लोगों ने इस कहानी पर खूब मज़ाक और कुछ गहरी बातें भी कीं। एक यूजर ने तंज कसते हुए लिखा – "मैं तो समझा था मैदान ऐसा होगा जैसे गोल्फ कोर्स, पर यहाँ तो सूखा, पीला-सा मैदान है! इतनी घास के लिए इतना बवाल?"
दूसरे ने कहा, "ये घास की कतरनें तो असल में खाद का काम करेंगी, इससे तो मैदान और हरा होता!" एक और कमेंट ने मज़ेदार अंदाज में लिखा – "बापू ने घास को इतना प्यार दिया कि बिचारा मैदान ही मर गया!"
कुछ ने तो सलाह भी दी – "इस मैदान को छोड़ो, जंगली फूल उगाओ, मधुमक्खियों के लिए अच्छा रहेगा।" कईयों को ये कहानी अपने घर के किस्सों की याद दिला गई – "अगर किसी का काम पसंद न आए, तो खुद ही करो, वरना फिर मदद मत मांगो।"
क्या सीख मिली?
इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है कि कभी-कभी घर के छोटे-छोटे मुद्दे, जैसे घास काटना, भी रिश्तों में बड़े बदलाव ला सकते हैं। जिद और अहंकार न सिर्फ़ मैदान को बर्बाद करते हैं, बल्कि आपसी समझदारी भी खा जाते हैं। और हाँ, कभी-कभी 'ये मेरी शान है' जैसी बातें हमें खुद को ही हास्यस्पद बना देती हैं – जैसे Reddit कम्युनिटी ने भी खूब हंसी उड़ाई।
अंत में, जूल्स खुद कहते हैं – "अब जब भी राज्य वाले अपनी घास काटते हैं और बीच का मैदान यूं ही रह जाता है, मुझे देखकर हंसी आती है।"
आप क्या सोचते हैं?
क्या आपके घर में भी कोई ऐसी अजीब जिद है? क्या आपके पापा/मम्मी भी घर की किसी चीज़ को अपनी शान समझते हैं? कमेंट में बताइए – कहीं आपकी कहानी भी इसी मैदान जैसी तो नहीं!
अगर आपको ये किस्सा मज़ेदार लगा, तो शेयर करें, और अगली बार जब कोई छोटे मुद्दे पर बड़ा झगड़ा करे, तो ये कहानी याद कर मुस्कुरा लें!
मूल रेडिट पोस्ट: Don't worry, I won't mow your weeds again