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ग्राहक ने झाड़ू छीनी और कहा 'तुम तो बेवकूफ़ हो!' – दुकान की ज़िंदगी का मज़ेदार किस्सा

ग्राहक हार्डवेयर स्टोर के एक कर्मचारी से झाड़ू लेते हुए, जीवंत एनीमे शैली में चित्रित।
इस रंगीन एनीमे दृश्य में, एक ग्राहक मजाकिया अंदाज में मेहनती कर्मचारी से झाड़ू छीनता है, जो हार्डवेयर स्टोर के एक सामान्य दिन का मजेदार पल दर्शाता है।

कभी-कभी दुकानों में ऐसी-ऐसी घटनाएँ हो जाती हैं कि सुनकर हँसी भी आती है और हैरानी भी होती है। सोचिए, आप मेहनत से अपनी ड्यूटी कर रहे हों, और कोई अनजान ग्राहक आए, आपकी झाड़ू ही छीन ले, और फिर आपको ही झाड़ू चलाने का "ज्ञान" बाँटने लगे! दुकानदारों की ज़िंदगी में ऐसे "गुरु ग्राहकों" की कोई कमी नहीं है।

आज हम आपको सुनाते हैं एक ऐसी ही कहानी जो Reddit की एक पोस्ट से आई है, लेकिन ऐसी घटनाएँ तो अपने भारत में भी खूब देखने को मिलती हैं। आखिर हमारे यहाँ भी हर इलाके में एक-दो "मोहल्ले के मास्टरजी" तो जरूर मिल जाते हैं, जो हर काम में उस्ताद बनकर ज्ञान देने से बाज़ नहीं आते।

ग्राहक बना झाड़ू गुरु: दुकान पर आई अनोखी मुसीबत

इसी तरह एक हार्डवेयर स्टोर में काम करने वाली महिला कर्मचारी (लेखिका) झाड़ू लगा रही थीं। ज़्यादातर समय वे खड़े-खड़े झाड़ू लगाती हैं, लेकिन जब कोने-कोने या मुश्किल जगह साफ़ करनी हो, तो वो बैठकर (स्क्वॉट करके) झाड़ू चलाती हैं। इससे उनकी कमर को भी आराम मिलता है, और सफाई भी बढ़िया हो जाती है।

तभी एक साहब अचानक प्रकट हुए, और बिना कुछ कहे कर्मचारी के हाथ से झाड़ू ही छीन ली। अब ज़रा सोचिए, भारत में भी अगर कोई ऐसे ही आपकी झाड़ू लेकर आपको ही तरीका समझाने लगे, तो क्या हो! खैर, यहाँ तो ग्राहक ने बाकायदा "लेक्चर" देना शुरू कर दिया, बोलने लगे – "तुम बिल्कुल ग़लत कर रही हो, देखो, ऐसे झाड़ू चलाते हैं।" मजे की बात ये थी कि वो तरीका वही था, जो कर्मचारी पहले से ही अपनाए हुए थीं!

जब महिला कर्मचारी ने विनम्रता से कहा – "मुझे ऐसे ही ठीक लगता है," तो ग्राहक का पारा चढ़ गया। बोले – "तुम्हें तो सब कुछ उल्टा ही अच्छा लगता है, क्योंकि तुम बेवकूफ़ हो!" ज़रा सोचिए, किसी के काम में टांग अड़ाना और फिर सीधा-सीधा बेइज्जती कर जाना – वाह, ग्राहक देवता की लीला भी निराली है!

"गुरु ग्राहकों" की कमी नहीं: टिप्पणीकारों की मज़ेदार प्रतिक्रियाएँ

इस कहानी पर Reddit पर भी खूब मज़ेदार कमेंट्स आए। एक यूज़र ने लिखा, "साहब, अब तक ठीक से समझ नहीं आया, क्या आप पूरा गलियारा झाड़ू लगाकर दिखाएंगे?" सोचिए, अगर ऐसे लोगों को सही में बोल दिया जाए, "सर, आप ही पूरी दुकान साफ कर दीजिए, हम तो आपको झाड़ू मास्टर मान लेते हैं!" भारत में तो लोग मज़ाक में कह ही देते – "भैया, नौकरी करोगे? 12 हज़ार महीना दूँगा!"

एक और यूज़र ने चुटकी ली – "आजकल तो लोग झाड़ू चलाना सिखाने के लिए हज़ारों रुपए लेते हैं, आपको तो मुफ्त में 'एक्सपर्ट' मिल गया!" इस पर मूल लेखक ने भी जवाब दिया – "काश, मुझे पता होता कि मेरे सामने कोई झाड़ू का जीनियस खड़ा है!"

कुछ ने भारतीय अंदाज़ में कहा – "अगर तुम्हारी राय चाहिए होगी, तो हम खुद ही दे देंगे!" वैसे, अपने यहाँ तो लोग बोल ही देते हैं – "अरे भैया, ज्ञान देना है तो घर में दीजिए, यहाँ तो हमें ही करने दो!"

एक महिला टिप्पणीकार ने बड़ा सही मुद्दा उठाया – "आमतौर पर पुरुष, खासकर उम्रदराज़, महिलाओं को ऐसे मामूली कामों में भी टोकना ज़रूरी समझते हैं।" अपने समाज में भी तो यही होता है, हर किसी को लगता है कि वो ही सबसे सही तरीका जानता है, चाहे वो झाड़ू हो या कुछ और।

ग्राहक देवता बनाम प्रोफेशनल: काम में टांग अड़ाने की आदत

अपने देश में भी अक्सर दुकानों, दफ्तरों या बस स्टैंड पर ऐसे लोग मिल ही जाते हैं जिन्हें दूसरों के काम में दखल देने की आदत है। कोई कहेगा – "बर्तन ऐसे धोओ!", कोई बोलेगा – "झाड़ू ऐसे चलाओ!" और अगर आप विनम्रता से मना कर दो, तो बस, सामने से बुरा-भला सुनने को तैयार रहो।

ऐसे में Reddit की मूल लेखिका की प्रतिक्रिया काबिल-ए-तारीफ थी – उसने बस हँसकर "धन्यवाद" कहा और अपना काम करती रही। एक टिप्पणी में चुटकी ली गई – "अगर ऐसे लोगों को बार-बार बोलते रहो कि 'समझ नहीं आया, फिर से समझाओ', तब तक बोलते रहेंगे जब तक पूरी दुकान साफ न हो जाए!"

जैसा कि एक और यूज़र ने कहा – "कभी-कभी ऐसे लोगों को उनकी ही चाल में उलझा देना चाहिए – 'आप मेरे तीन गलियारे साफ कर दो, मैं अगले तीन करता हूँ, देखेंगे कौन बेहतर करता है!'"

निष्कर्ष: सीख – हर सलाह जरूरी नहीं, और हर ग्राहक 'देवता' नहीं!

कहानी से साफ है, कभी-कभी सबसे अच्छी प्रतिक्रिया होती है – मुस्कुरा दो, धन्यवाद कह दो, और अपना काम करते रहो। ऐसे "गुरु ग्राहकों" से हर दुकानदार-पेशेवर दो-चार होता है। भारत में भी ऐसे लोग हर गली-मोहल्ले में मिलेंगे, जो बिना माँगे मुफ्त सलाह देने से बाज़ नहीं आते। लेकिन असली प्रोफेशनल वही है, जो मुस्कान के साथ अपना काम करता रहे और फालतू की टोकाटाकी को दिल पर न ले।

तो अगली बार जब कोई आपको झाड़ू चलाने, या कोई भी मामूली काम सिखाने लगे, तो याद रखिए – मुस्कुराइए, धन्यवाद दीजिए, और आगे बढ़ जाइए!

आपके साथ भी कभी ऐसा कुछ हुआ हो? या आपके मोहल्ले में भी ऐसा कोई "झाड़ू गुरु" है? नीचे कमेंट में जरूर बताइए – ऐसी मज़ेदार कहानियाँ सबसे अच्छी चाय के साथ चलती हैं!


मूल रेडिट पोस्ट: Customer Took My Broom and Called Me an Idiot