ग्राहक ने कहा 'तुम बेवकूफ हो', दुकानदार ने कर दी ज़िंदगी की सबसे छोटी बदला-कहानी!
अगर आपने कभी दुकान पर काम किया है, तो आपको पता होगा कि हर दिन किस तरह के ग्राहक आते हैं – कुछ शराफ़त की मिसाल, तो कुछ ऐसे कि भगवान बचाए! हमारी आज की कहानी भी एक ऐसे ही ग्राहक और दुकानदार की है, जिसमें गुस्से और शरारत का अनोखा तड़का है। पढ़िए, कैसे एक दुकानदार ने 'छोटे बदले' (petty revenge) के ज़रिए बदतमीज़ ग्राहक का मज़ा किरकिरा कर दिया, और इंटरनेट पर लोगों की वाहवाही लूट ली।
जब ग्राहक ने किया अपमान, दुकानदार ने रची चाल
कहानी Reddit पर वायरल हुई जब एक रिटेल कर्मचारी (तीन साल के अनुभव के साथ) ने अपना किस्सा साझा किया। एक दिन दुकान में एक अधेड़ उम्र का ग्राहक पहले से ही तमतमाया हुआ दाखिल हुआ। उसे एक खास स्पीकर चाहिए था, जो सेल पर था – मगर अफ़सोस, वो स्टॉक में नहीं था।
दुकानदार ने पूरी विनम्रता से कहा, "मैं दूसरे स्टोर्स में चेक कर सकता हूँ या फिर ऑनलाइन ऑर्डर कर सकता हूँ, उसी कीमत पर।" अब इतने अच्छे ऑप्शन सुनकर तो कोई भी ग्राहक मान जाए, लेकिन साहब को तो जैसे झगड़ा ही करना था। उन्होंने झल्लाकर कहा, "क्या तुम बेवकूफ हो? पीछे जाकर चेक करो!"
अब भारत में भी अक्सर ग्राहक यही सोचते हैं कि 'स्टोर के पीछे' कोई जादुई गोदाम है, जिसमें सब छुपा रखा है – और बेचारे कर्मचारी को बार-बार भेजते रहते हैं। Reddit के एक कमेंट में मज़ाक में कहा गया, "अरे भाई, उस 'बैक' में तो बस टूटी कुर्सी, चाय का कप और दो-चार डिब्बे ही होते हैं!"
'बैक' में जाने का असली मतलब – कर्मचारी की चाय-ब्रेक!
दुकानदार ने भी मुस्कुराकर 'पीछे' जाने का वादा किया और तीन मिनट बाद लौट आया – "माफ़ कीजिए, सर, हमारे पास नहीं है।" असल में, वो तीन मिनट वो अंदर बस खड़ा रहा या शायद फोन स्क्रॉल कर रहा था, जैसा कि एक कमेंट में एक व्यक्ति ने लिखा, "जब ग्राहक बार-बार पूछे, तो 'बैक' में जाकर थोड़ी देर सुस्ताने का बढ़िया बहाना है!"
अब ग्राहक को चाहिए था सस्ता स्पीकर, लेकिन मजबूरी में उसने महंगा स्पीकर खरीद लिया। दुकानदार के लिए तो "उसकी ही जेब ढीली, अपना क्या गया!"
असली बदला – रसीद का जादू
यहाँ पर कहानी में ट्विस्ट आता है। दुकानदार जानता था कि उनकी रिटर्न पॉलिसी में रसीद सबसे अहम है – बिना रसीद के लौटाना मतलब माथा-पच्ची, मैनेजर, आईडी, स्टोर क्रेडिट… यानी ग्राहक की मुसीबत! अब दुकानदार ने रसीद को ऐसे मोड़ा, जैसे माँ पर्ची में पैसे लपेटती है, फिर उसे टेप से बैग में चिपका दिया, और फिर उस बैग को दूसरे बैग में टेप कर दिया। रसीद को ऐसे छुपाया जैसे दादी की अलमारी में मिठाई!
अगर कभी वो ग्राहक स्पीकर लौटाने आएगा, तो उसे दोनों बैग फाड़ने पड़ेंगे, फिर भी रसीद टेप में चिपकी मिलेगी – एकदम सिकुड़ी-सी, चिपचिपी और गुमनाम! बड़ा नुकसान नहीं, लेकिन जितना सिरदर्द ग्राहक को होगा, उतना ही दुकानदार की छोटी-सी जीत!
रिटेल कर्मियों की जंग – जनता से दो-दो हाथ
Reddit पर इस कहानी ने हज़ारों लोगों को अपने अनुभव याद दिला दिए। एक यूज़र ने लिखा, "कई बार हम 'बैक' में जाकर बस पानी पीते हैं, बैठ जाते हैं, फिर लौटकर कहते हैं – माफ़ कीजिए, स्टॉक में नहीं है।" एक और ने कहा, "लोग समझते हैं कि हम उनके दुश्मन हैं और सामान छुपा रहा है!"
हमारे भारत में भी यही हाल है – ग्राहक को लगता है, दुकानवाले जान-बूझकर सामान नहीं दिखा रहे। लेकिन रिटेल की दुनिया का सच यही है – जितनी इज्ज़त देंगे, उतनी ही जल्दी सेवा मिलेगी। एक यूज़र ने बिल्कुल सही लिखा, "जितने अच्छे से पेश आओगे, उतना अच्छा रिस्पॉन्स मिलेगा।"
ग्राहक राजा, लेकिन कर्मचारी भी कोई गुलाम नहीं!
यह कहानी बताती है कि भले ही 'ग्राहक भगवान है' का नारा चलता हो, लेकिन कर्मचारी भी इंसान है। एक छोटे से बदले से दुकानदार ने अपनी नाराज़गी निकाल ली – बिना किसी बड़े नुकसान के, सिर्फ उस ग्राहक को थोड़ा सा परेशान करके।
तो अगली बार जब आप दुकान पर जाएं, याद रखें – सम्मान दें, सम्मान पाएं। कहीं ऐसा न हो कि आपकी रसीद भी किसी टेप के चक्रव्यूह में फँस जाए!
निष्कर्ष: आपकी भी कोई रिटेल की किस्सा है?
क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है – ग्राहक या दुकानदार बनकर? नीचे कमेंट में अपना अनुभव साझा करें! और ध्यान रखें, जिंदगी में कभी-कभी छोटी-छोटी शरारतें भी बड़ी राहत दे जाती हैं। पढ़िए, शेयर कीजिए, और अगली बार 'बैक' में भेजने से पहले थोड़ा सोचिए!
मूल रेडिट पोस्ट: a customer called me stupid so i made sure he'd never be able to return his purchase