गर्मी में कुत्ते को कार में छोड़ना: इंसानियत की परीक्षा या दस रुपये की कंजूसी?
दोस्तों, गर्मी का मौसम आते ही भारत में तो हर कोई अपने जानवरों को दोपहर में छांव में ही बांधता है, पानी पिलाता है और छत पर भी नहीं छोड़ता। लेकिन कल्पना कीजिए, यूरोप के पहाड़ों में बसे एक सुंदर ईको-बीएनबी (Eco B&B) में कुछ मेहमान आए और उन्होंने अपने प्यारे कुत्ते को भरी गर्मी में कार में ही छोड़ देने की जिद पकड़ ली – वो भी सिर्फ दस यूरो (लगभग 900 रुपये) बचाने के लिए! क्या आप सोच सकते हैं, इंसानियत और जानवर के प्रति दया इतनी सस्ती हो सकती है?
जब मेहमान ने कहा – "डॉग तो कार में ही सोएगा!"
इस कहानी के नायक हैं ‘क्रिस’ और उनकी साथी, जिन्होंने यूरोप के खूबसूरत पहाड़ों में पर्यावरण-हितैषी (eco-friendly) गेस्टहाउस खोला है। आमतौर पर उनके यहाँ घूमने वाले, परिवार और डॉग-प्रेमी लोग ही आते हैं। लेकिन इस बार गर्मी कुछ ज्यादा ही पसीना छुड़ाने वाली थी – तापमान 35 डिग्री के पार!
एक दिन एक परिवार आया – पति-पत्नी, दो बच्चे, और एक शानदार मालिनोइस (Malinois) नस्ल का कुत्ता। चेक-इन के वक्त कुत्ते की कोई चर्चा नहीं हुई। सब सही चल रहा था, तभी अचानक पति पूछ बैठा – “डॉग स्विमिंग पूल में जा सकता है क्या?”
मेजबान ने मुस्कुराते हुए कहा, “हां, हमें डॉग्स बहुत पसंद हैं। बस आपको एडवांस में बताना होता है और डॉग के लिए दस यूरो प्रतिदिन शुल्क है। हम डॉग के लिए बिस्तर, प्याले, कंबल सब उपलब्ध करवा देंगे।”
लेकिन मेहमान का जवाब सुनिए – “कोई बात नहीं, हमारा सारा सामान साथ है। डॉग कार में ही सो जाएगा।”
अब भैया, गर्मी में कार का हाल किसी तंदूर से कम नहीं होता! ऐसे में जानवर को कार में बंद छोड़ना, वो भी रात भर – सीधा-सीधा जानवर की जान खतरे में डालना है। मेजबान ने साफ मना किया, “हमारे यहाँ यह मंजूर नहीं। डॉग को कार में छोड़ना खतरनाक है। आप चाहें तो अपार्टमेंट में रखिए, शुल्क लगेगा ही।”
कुछ देर तक ‘खींचतान’ चली, आखिरकार मेहमान बोले, “ठीक है, देखेंगे शाम को कितना गर्म है, तब कुत्ते को ले आएंगे।”
दस यूरो की कंजूसी या पशु-क्रूरता?
अब आप सोचिए, भारत में भी कई लोग अपने पालतू जानवर के लिए अच्छा खाना, छांव, बिस्तर का इंतजाम करते हैं, चाहे वो गली का कुत्ता ही क्यों न हो। उधर, ये परिवार महज दस यूरो की बचत के लिए अपने प्यारे कुत्ते की जान जोखिम में डालने को तैयार था!
रेडिट कम्युनिटी में कई लोगों ने इस हरकत को जमकर लताड़ा। एक कमेंट में लिखा, “ऐसे लोगों को खुद भी एक दिन कार में बंद करके छोड़ देना चाहिए, शायद तब इन्हें जानवर की हालत समझ आए।” कोई बोला, “कुत्ते की जिंदगी दस यूरो से ज्यादा कीमती है!” एक और यूज़र ने तंज कसा, “कभी-कभी तो कुत्तों में इंसानियत इंसानों से ज्यादा होती है।”
मेजबान भी हैरान थे – “हम तो डॉग्स के लिए केवल लागत भर लेते हैं, ताकि लोग अपने पालतू को भी साथ ला सकें। इसके बावजूद, कुछ लोग जानवरों से ज्यादा पैसों की फिक्र करते हैं।”
भारतीय नजरिए से – क्या हमारे यहाँ भी ऐसा होता?
हमारे देश में भी कई बार देखा जाता है कि लोग अपने पालतू को छांव में बांधना भूल जाते हैं, या गर्मी में पानी देना भूल जाते हैं। लेकिन जैसे ही कोई बच्चा या जानवर खतरे में दिखता है, मोहल्ले के लोग दखल देने में देर नहीं लगाते। यहां तो कोई भी बच्चा या जानवर कार में बंद दिख जाए, आस-पास वाले खुद ही हंगामा खड़ा कर देते हैं – “अरे, किसका कुत्ता है, बाहर निकालो!”
रेडिट पर एक यूज़र ने लिखा, “हमारे यहाँ तो अगर कोई बच्चा या जानवर कार में बंद दिखे, पुलिस बुलाकर शीशा तोड़ देते हैं।”
भारत में भी अब कानून सख्त हो रहे हैं, और सोशल मीडिया पर ऐसे मामलों की खूब चर्चा होती है। लेकिन इतना तय है कि दस रुपये बचाने के लिए जानवर के जीवन से खिलवाड़ करना न यहां सही है, न वहां!
सीख – जानवर भी परिवार का हिस्सा हैं
इस पूरी कहानी से हमें यही सीख मिलती है कि चाहे यूरोप हो या भारत, जानवर कोई सामान नहीं हैं, जिन्हें जहां चाहा छोड़ दिया। वे भी परिवार का हिस्सा हैं, उनकी देखभाल हमारी जिम्मेदारी है।
रेडिट के कई यूज़र्स ने सुझाव दिया कि बीएनबी को अपनी नीति में बदलाव लाना चाहिए – “डॉग फीस संपत्ति पर डॉग लाने के लिए हो, न कि केवल कमरे में। साथ ही, अगर कोई बिना बताए डॉग लाए, तो भारी जुर्माना लगे।”
मेजबान ने भी माना, “अगली बार से ऐसी गलती नहीं होगी। नियम और सख्त बनाऊंगा, ताकि किसी जानवर के साथ अन्याय न हो।”
निष्कर्ष – क्या आप जानते हैं अपने पालतू के लिए क्या सही है?
दोस्तों, इस घटना ने एक महत्त्वपूर्ण सवाल खड़ा कर दिया – क्या हम अपने पालतू जानवरों को परिवार का हिस्सा मानते हैं, या केवल ‘संपत्ति’? आपके पास पालतू है तो क्या आप उसकी देखभाल में कभी कंजूसी करेंगे?
कृपया कमेंट में बताइए – क्या आपने कभी ऐसे किसी मामले को देखा है? आपके हिसाब से जानवरों की सुरक्षा के लिए और क्या किया जा सकता है? चलिए, मिलकर पशु-प्रेम को बढ़ावा दें और ऐसी कंजूसी को जमकर लताड़ें!
मूल रेडिट पोस्ट: 'The dog will stay in the car'