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खर्चे का हिसाब-किताब: जब सरकारी नियमों ने जेब भर दी!

एक कार्टून 3D चित्र जिसमें अग्निशामक विभाग का कर्मचारी खर्च रिपोर्ट और रसीदें जमा कर रहा है।
यह जीवंत कार्टून 3D छवि खर्च रिपोर्ट को संभालने की प्रक्रिया को दर्शाती है, जिसमें एक अग्निशामक विभाग का कर्मचारी प्रशिक्षण यात्रा के बाद अपनी रसीदें मुआवजे के लिए प्रस्तुत करने के लिए तैयार है।

सरकारी नौकरी में काम करने वालों को अक्सर फॉर्म, रसीद और खर्चे के हिसाब-किताब से दो-चार होना पड़ता है। पर कभी-कभी ये नियम-कानून इतने उलझे हुए होते हैं कि आदमी जितना सोचता है, उससे कहीं ज़्यादा फायदे में निकल आता है। आज हम आपको Reddit पर वायरल हुई एक ऐसी ही मज़ेदार कहानी सुनाते हैं, जिसमें एक फायर डिपार्टमेंट के कर्मचारी ने जब ईमानदारी से खर्चा दिखाया, तो उसे मिलने लगा तीन गुना पैसा!

तो चलिए, जानिए उस किस्से को, जिसमें सरकारी कागज़ी कार्रवाई ने बना दिया मामूली ट्रेनिंग ट्रिप को मुनाफे का सौदा!

सरकारी फॉर्म और हमारी जुगाड़ू सोच

अगर आप कभी सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट चुके हैं, तो जानते ही होंगे कि वहाँ फॉर्म भरना अपने-आप में एक कला है। इस कहानी के ‘हीरो’ ने भी ट्रेनिंग के लिए चार घंटे दूर सफर किया, अपनी कार से गए, होटल में रुके, पेट्रोल डलवाया, और जैसा बताया गया, सारी रसीदें संभालकर रखीं।

आदमी ने ईमानदारी से हर खर्चा लिखा—पेट्रोल, खाना, होटल—कुल मिलाकर करीब 375 डॉलर (यानि लगभग 31,000 रुपये)। पूरा फॉर्म भरकर अकाउंटिंग विभाग में जमा कर दिया। अब उन्हें लगा था कि बस पैसा मिल जाएगा, मगर कहानी यहीं से शुरू होती है!

नियमों की भूल-भुलैया: जितना खर्चा, उसका तीन गुना वसूल!

अगले दिन अकाउंटिंग से मेल आई: “रसीदें फिर से कोड कीजिए, फॉर्म फिर से भरिए।” बंदे ने फिर से मेहनत की। अगले दिन फिर मेल आई: “यात्रा का खर्च सही से नहीं लिखा। असली पेट्रोल का खर्च नहीं चलेगा, हमें तो तय फॉर्मूले के हिसाब से किलोमीटर के आधार पर पैसे देने हैं।”

यहाँ से खेल पलट गया! असली खर्च की जगह जो फॉर्मूला लगा, उससे पेट्रोल का पैसा दुगना हो गया। फिर होटल का खर्च भी असली बिल की बजाय, सरकार द्वारा तय किए गए ‘फिक्स रेट’ में बदल गया। कुछ और सुधार करवाए गए, और हर बार ‘यह ठीक नहीं, वो ठीक करो’ कहा गया।

आखिरकार, 375 डॉलर की जगह करीब 900 डॉलर (यानि 74,000 रुपये से ऊपर) मिल गए! वो भी सिर्फ खर्चे के नाम पर, ऊपर से अपनी तनख्वाह तो अलग ही थी। अब भला कोई मानेगा कि नियम मानने से नुकसान नहीं, बल्कि फायदा भी हो सकता है?

Reddit की जनता क्या कहती है?

रेडिट पर इस किस्से पर लोग खूब हँसे और व्यंग्य भी कसा। एक यूज़र ने लिखा, “ये किलोमीटर की दर में पेट्रोल के साथ-साथ गाड़ी की घिसावट-टूट-फूट भी जुड़ी होती है, इसलिए पैसा ज़्यादा मिलता है।”

दूसरे ने बताया, “सरकारी दफ्तरों में असली खर्चे की चिंता नहीं, उनकी अपनी तयशुदा दरें होती हैं—जैसे हर शहर के हिसाब से खाना-होटल का फिक्स रेट, चाहे आप सादा खाना खाएँ या 5-स्टार होटल में जाएँ।”

एक साहब ने तो अपने अनुभव में बताया, “हमारे यहाँ भी बॉस ने कहा था—ईमानदारी से मत भरो, जितना सरकार देती है, उतना ही भरो। असली खर्चा कम है तो खुद की किस्मत समझो!”

कोई बोला, “सरकारी विभागों में ऐसे मौके कम मिलते हैं, जब कुछ फायदा हो जाए, तो चुपचाप ले लो!” और एक ने तो मज़ाक में कह दिया, “ये दर्द-भरी ट्रेनिंग का मुआवज़ा है, भाई!”

भारतीय नजरिए से—सरकारी दफ्तर और हमारा अनुभव

अगर आप कभी भारत में ट्रेवल एलाउंस या टीए/डीए फॉर्म भरे हैं, तो यह कहानी आपको बहुत अपनी-सी लगेगी। यहाँ भी अक्सर सरकारी नियम इतने घुमावदार होते हैं कि असली खर्चा कम, फॉर्मूला वाला खर्चा ज़्यादा निकल जाता है। चाहे रेलवे के टीए बिल हो या सरकारी दफ्तर का डीए, कई बार आदमी जितना खर्च करता है, उससे ज़्यादा क्लेम कर सकता है—अगर नियमों की किताब को ठीक से पढ़े!

यहाँ भी कई बाबू लोग कहते हैं, “अरे असली बिल मत दिखाओ, फिक्स रेट भरो!” और कई तो सलाह देते हैं कि हर बार सरकारी फॉर्म भरने से पहले पुराने अनुभवी कर्मचारी से पूछ लो—कहीं कुछ ‘नुकसान’ न हो जाए!

निष्कर्ष: नियमों का सही इस्तेमाल भी एक कला है!

इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है कि सरकारी सिस्टम में सिर्फ ईमानदारी नहीं, समझदारी भी ज़रूरी है। नियम-कायदे अगर सही से समझ लिए जाएँ तो कभी-कभी आदमी को ऐसा फायदा मिल जाता है, जिसकी उसने उम्मीद ही नहीं की थी।

तो अगली बार जब भी आप टीए/डीए या कोई सरकारी खर्चे का फॉर्म भरें, तो नियमों को ध्यान से पढ़िए, और अगर जरूरत हो तो अनुभवी साथी से सलाह भी लीजिए। क्या पता, आपकी अगली ट्रेनिंग ट्रिप भी मुनाफे का सौदा बन जाए!

क्या आपके साथ भी कभी ऐसा कोई मजेदार या अजीब वाकया हुआ है? नीचे कमेंट में ज़रूर बताइए, और अपने दोस्तों के साथ ये किस्सा शेयर कीजिए—क्योंकि सरकारी किस्सों में मजा ही कुछ और है!


मूल रेडिट पोस्ट: Expense report you say?