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खुद ही कर लो, जब इतना शौक है!' – फल गोदाम की मज़ेदार कहानी

फलों के डिब्बों और फोर्कलिफ्ट के साथ व्यस्त लोडिंग डॉक का कार्टून 3D चित्र, पैकिंग प्लांट का दृश्य दर्शाता है।
फल पैकिंग प्लांट की हलचल में डूब जाइए! यह कार्टून 3D चित्र उस जीवंत माहौल को दर्शाता है जहाँ मेहनत और ताजगी मिलती है।

क्या आपने कभी किसी ऐसे सहकर्मी के साथ काम किया है, जो खुद को सबका बॉस समझे, लेकिन असल में सबको चिढ़ा दे? अगर हाँ, तो आज की कहानी आपको अपने ऑफिस या फैक्ट्री के ही किसी 'शेण' की याद दिला देगी।

यह कहानी एक फल पैकिंग प्लांट की है, जहां सेबों की पेटियां, धूल भरे डिब्बे और भारी-भरकम काम रोज़ का हिस्सा थे। वहाँ के कर्मचारियों की मेहनत और एक 'खास' सहकर्मी की चालाकी, दोनों ही बेमिसाल थे।

काम का महौल और 'शेण' की लीला

अब सोचिए – दिनभर ठंडे गोदाम में से भारी-भरकम सेब की पेटियां उठाना, फिर हाथों-हाथ उन्हें अलग-अलग ट्रकों के लिए सजाना। ये काम कोई बच्चों का खेल नहीं था। धूल, पसीना और कभी-कभी बॉस का डंडा – सब कुछ चलता था। लेकिन सब मिलकर काम निपटाते थे, सिवाय एक के – जिसे हम यहाँ 'शेण' कहेंगे।

यह 'शेण' साहब हमेशा अपने आपको सबसे 'चतुर' समझते थे, लेकिन असलियत में वो थोड़े 'खोखले' थे। जब भी भारी काम आता, वो या तो 'गायब' हो जाते या फिर ऐसे बहाने बनाते जैसे मोहल्ले की किसी शादी में बुलावा आ गया हो। लेकिन जब दूसरों की बारी आती, तो खुद को "Assistant to the Regional Manager" समझते हुए सबको सलाह देने लगते।

जब 'शेण' ने खुद ही फँदा गले में डाला

एक दिन की बात है – सब अपने-अपने काम में लगे थे। पिछले ऑर्डर में मैंने सबसे ज्यादा पेटियां उठाईं, तब 'शेण' का कहीं पता नहीं था। अबकी बार उनकी बारी थी। मैं चाहती तो तुरंत मदद कर देती, लेकिन सोच रही थी, चलो थोड़ा अपने हाथ-पैर भी सीधा कर लूँ और बाकी जरूरी काम निपटा दूँ। जब तक मेरा काम खत्म हुआ, 'शेण' अभी भी पसीना बहा रहे थे।

मैं मदद करने पहुंची, डिब्बा उठाया ही था कि 'शेण' ने गुस्से में कहा, "तुम रहने दो, मुझे ही खुद करने दो!" असल में, ये डायलॉग हमारे सुपरवाइजर पिछले कुछ दिनों से मज़ाक में बोल रहे थे, लेकिन 'शेण' ने उसे गम्भीरता से ले लिया।

मैंने बिना बहस किए डिब्बा वहीं छोड़ दिया और बाकियों के पास जाकर खड़ी हो गई। सब चुप थे, सुपरवाइजर भी कुछ नहीं बोले। अब 'शेण' अकेले-अकेले पसीना-पसीना होते रहे, और बाकियों ने चैन की बंसी बजाई। दो मिनट में ही 'शेण' का 'जयकारा' निकल गया।

कमेंट्स में छुपा देसी तड़का

रेडिट पर इस पोस्ट को पढ़ने वाले भी मज़े से पीछे नहीं रहे। एक पाठक ने तो मज़ाक में पूछा, "क्या ये वही 'शेण' है जो वॉलमार्ट में भी काम करता था?" इस पर लेखक ने हँसते हुए जवाब दिया, "काश! अगर मेरा 'शेण' इतना मज़ेदार होता तो मैं भी मजा लेता!"

एक और कमेंट पढ़कर तो हँसी छूट गई – "कुछ लोग स्लिंकी (सीढ़ी पर गिरने वाली स्प्रिंग) जैसे होते हैं, खुद तो किसी काम के नहीं, लेकिन जब फिसलते हैं तो सबका मूड अच्छा कर देते हैं।" सही बात है – हर ऑफिस में एक 'शेण' जरूर होता है!

कुछ लोगों ने अपने पुराने डिलीवरी या वेयरहाउस के अनुभव भी बाँटे – जैसे एक साहब ने बताया कि कैसे उनके बॉस ने भी उन पर बेवजह हुकुम चलाया, और जब सबने काम छोड़ दिया तो वही बॉस तीन लोगों का काम अकेला करता रहा।

कुछ पाठकों ने तो मजाक-मजाक में ये भी लिखा कि "यहाँ भी वही पुराना फॉर्मूला है – जब कोई खुद को सुपरस्टार समझे, तो उसे खुद ही करने दो।" एक पाठक ने कहा, "अगर ऑफिस में बोर्ड लगा देते कि 'यहाँ आपकी मम्मी काम नहीं करती', तो भी शेण समझते नहीं!"

देसी दफ्तरों में 'शेण' की वैल्यू

हमारे यहाँ भी दफ्तरों, कारखानों, दुकानों या फिर कॉल सेंटर में ऐसे 'शेण' मिल ही जाते हैं – जो काम कम, सलाह ज्यादा देते हैं। जब तक उनकी बारी नहीं आती, वो बड़े 'बुद्धिमान' बनते हैं, लेकिन जब खुद पर आ जाए तो हालत पतली हो जाती है।

कई बार हमारे सीनियर या बॉस भी ऐसे लोगों की तरफदारी कर लेते हैं, जिससे बाकी टीम का मनोबल गिरता है। लेकिन आज की कहानी बताती है – कभी-कभी 'मालिशियस कंप्लायंस' (यानि सामने वाले की ही बात मानकर उसे उसकी औकात दिखाना) सबसे अच्छा जवाब होता है।

निष्कर्ष: हर ऑफिस का 'शेण' और आपकी मुस्कान

किसी ने सही कहा है, "जहाँ सब बराबरी से मेहनत करें, वहाँ काम भी जल्दी और खुशी से होता है।" लेकिन अगर कोई 'शेण' आपको परेशान करे, तो कभी-कभी उसकी ही बात मान लेना – उसे खुद अपनी गलती का एहसास करा जाता है।

तो अगली बार आपके ऑफिस या दुकान में कोई 'शेण' आपको ज्ञान देने लगे, तो मुस्कुरा कर सोचिए – "भैया, जब इतना शौक है, खुद ही कर लो!"

क्या आपके ऑफिस में भी कोई ऐसा 'शेण' है? अपनी कहानी कमेंट में जरूर शेयर करें – शायद अगला किस्सा आपका ही हो!


मूल रेडिट पोस्ट: “You might as well let me finish it myself!”