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केविन और चॉकलेट फैक्ट्री: जब समझदारी छुट्टी पर हो

केविन चॉकलेट बनाने की प्रक्रिया का अन्वेषण कर रहा है, कारखाने के दौरे के दौरान उसकी उत्साह को प्रदर्शित करते हुए।
केविन के साथ चॉकलेट की मीठी दुनिया में डूब जाइए! यह रंगीन कार्टून-3डी चित्र उसके चॉकलेट फैक्ट्री के दौरे के दौरान की खुशी को पकड़ता है, जहाँ वह अपने सहकर्मियों में पहले से ही पहचान बना रहा है।

कभी-कभी ऑफिस में ऐसे लोग मिल जाते हैं, जिनकी मासूमियत और सवाल हमें सोचने पर मजबूर कर देते हैं कि 'ये कैसे हुआ?' आज की कहानी है केविन की, जो एक चॉकलेट बनाने वाली फैक्ट्री में नए-नए आए हैं। लेकिन भाई साहब, उनकी समझ और उनके सवाल ने सबको मिठास के साथ-साथ भरपूर हंसी भी दे दी।

चॉकलेट फैक्ट्री का 'गोलमाल' दौरा

अब सोचिए, अगर आपको चॉकलेट फैक्ट्री का दौरा कराया जाए, तो क्या आप सबसे पहले यही जानना चाहेंगे कि चॉकलेट बनती कैसे है? केविन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। ट्रेनिंग के दौरान गाइड ने बार-बार समझाया कि "हमारी पूरी प्रक्रिया बीन्स से बार तक है", यानी कच्ची कोको बीन्स से शुरू होकर तैयार चॉकलेट बार तक। हर कदम दिखाया गया – बीन्स की सफाई, भूनाई, पीसना, फिर उनसे चॉकलेट बनाना।

लेकिन जैसे ही सवाल-जवाब का वक्त आया, तो पूरे ग्रुप में सिर्फ केविन बोले। बोले भी तो क्या – "मुझे चॉकलेट बनाने की प्रक्रिया तो समझ आ गई, लेकिन ये बताइए कि ये शुरू कहां से होता है? क्या कंपनी पहले से बनी ड्रॉप्स या खरीदी हुई चॉकलेट बार पीसकर बनाती है?" अब गाइड साहब तो अवाक्! बाकी सब भी मन ही मन सोच रहे थे, "अरे भाई, अभी तो दो बार पूरी प्रक्रिया देखी-सुनी!"

एक कमेंट करने वाले ने तो यहां तक कह दिया, "केविन शायद उन्हीं लोगों में से हैं, जिन्हें लगता है चॉकलेट मिल्क भूरे गायों से आता है!" और सच पूछिए तो, कई बार हमारे आस-पास भी ऐसे लोग होते हैं, जिन्हें हर चीज़ का सीधा-सीधा मतलब समझना बेहद मुश्किल होता है।

कॉफी बनाने का 'रहस्य'

केविन की मासूमियत यहीं खत्म नहीं हुई। एक दिन ऑफिस में मेरी मंगेतर (जो इस फैक्ट्री में काम करती हैं) और उनकी सहकर्मी कॉफी बना रही थीं। तभी केविन आ गए और पूछने लगे, "क्या कर रहे हो?" जवाब मिला, "हम कॉफी बना रहे हैं, तुम्हें भी चाहिए क्या?" लेकिन जनाब ने कॉफी पीने की जगह, खामोशी से खड़े होकर कॉफी बनते देखना ही पसंद किया।

जैसे हमारे यहां कई बार मोहल्ले के बच्चे चूल्हे पर चाय बनते-बनते घेर लेते हैं, वैसे ही केविन कॉफी बनते-बनते 'जादू' देखना चाहते थे। एक Reddit कमेंट में किसी ने शरारती अंदाज में पूछा, "क्या वो कोई जादुई तरीका था, जो उन्होंने कभी देखा ही नहीं?" तो OP ने जवाब दिया, "भाई, बस वैसे ही बनाया जैसे तुर्की कॉफी बनती है!" इस पर और भी मजेदार प्रतिक्रियाएं आईं – किसी ने कहा, "मुझे तो तुर्की कॉफी बनाना ही नहीं आता!"

केविनिज़्म: ऑफिस की ताजगी

केविन की ये मासूमियतें, जिन्हें Reddit यूजर्स ने 'केविनिज़्म' नाम दे दिया, ऑफिस में ताजगी और हंसी का कारण बन गई हैं। एक कमेंट करने वाले ने तो मज़ाक में कह दिया, "सोचिए जब केविन को पता चलेगा कि कॉफी भी बीन्स से बनती है, तब क्या होगा!"

यही नहीं, कुछ लोग केविन की सोच का बचाव भी कर रहे थे – "हो सकता है वो सोचते हों कि हर चीज़ ऊपर वाले ने वैसे ही बना दी हो, जैसे चॉकलेट बार या कॉफी का कप। हम बस उसे दूसरी शक्ल में ढाल देते हैं।" लेकिन सच कहूं, तो ऐसे लोग ऑफिस के माहौल में मिठास और ठहाके दोनों ले आते हैं।

भारतीय संदर्भ में: ऐसे लोग हर जगह हैं!

हमारे अपने दफ्तरों में भी ऐसे 'केविन' अक्सर मिल जाते हैं – कभी नया कंप्यूटर देखकर अचरज में पड़ जाना, कभी प्रिंटर की स्याही कैसे भरती है ये पूछ लेना, या फिर ऑफिस के लंच में दही-चावल देखकर पूछना, "ये कैसे बनता है?" इनके सवाल भले ही बचकाने लगें, लेकिन ऑफिस लाइफ को ये ही रंगीन बनाते हैं।

वीडियो कॉल की मीटिंग में अचानक कोई पूछ बैठे, "आपके पीछे की दीवार किस रंग की है?" या फिर प्रोजेक्टर ऑन होते ही, "ये खुद से शुरू होता है या कोई बटन दबाना पड़ता है?" – ऐसे लोग हमें रोज़मर्रा की भागदौड़ में मुस्कराने की वजह दे जाते हैं।

एक मीठा निष्कर्ष

कहानी केविन की हो, या हमारे अपने किसी ऑफिस मित्र की – उनके मासूम सवाल और भोली हरकतें हमें रोज़मर्रा की ज़िंदगी की भागमभाग में थोड़ी सी मिठास घोल देती हैं। ऐसे 'केविन' हर जगह हैं, और शायद इसी वजह से दफ्तर कभी-कभी 'चॉकलेट फैक्ट्री' जैसा दिलचस्प बन जाता है।

दोस्तों, आपके ऑफिस में भी कोई ऐसा 'केविन' है? उनकी कौन सी हरकत आपको सबसे मजेदार लगी? कमेंट में ज़रूर बताइए और इस मीठी कहानी को अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिए – क्या पता आपके दोस्तों की लिस्ट में भी कोई छुपा हुआ केविन हो!


मूल रेडिट पोस्ट: Kevin and the Chocolate factory