केविन और चॉकलेट फैक्ट्री की मस्तानी कहानियाँ: स्वाद के महारथी की नई करतूतें
क्या आपको कभी ऐसा सहकर्मी मिला है, जो ऑफिस के नियमों को ऐसे तोड़ता है जैसे बचपन में हम छुट्टियों में पतंग उड़ाते थे? अगर नहीं, तो मिलिए केविन से, जिसके किस्से सुनकर आप कहेंगे — "भैया, ये तो अपने मोहल्ले के गप्पू से भी दो कदम आगे है!"
आज हम लाए हैं केविन के चॉकलेट फैक्ट्री के किस्से, जिन्हें पढ़कर आपकी हंसी नहीं रुकेगी। अगर आपको पहली कड़ी नहीं मिली, तो चिंता मत कीजिए — आगे की कहानी और भी मज़ेदार है।
जब केविन ने 'मत छुओ' का मतलब ही बदल दिया
अब बात करते हैं उस दिन की जब केविन को फैक्ट्री में चॉकलेट बार की प्रोसेसिंग लाइन दिखाई जा रही थी। वैसे हमारे यहाँ हर गली-मोहल्ले में एक "फॉरबिडन फ्रूट" वाला दोस्त होता है — जिसको जितना मना करो, उतनी ही जोर से वही काम करता है। चॉकलेट फैक्ट्री में साफ-साफ लिखा था — "प्रोडक्शन लाइन को मत छुओ" (फैक्ट्री का 'रामबाण' नियम)।
पर केविन तो केविन है! भाईसाहब चुपचाप लाइन के पास गए, किसी से पूछे बिना, एक चॉकलेट बार उठाई और सबके सामने मुँह में डाल ली। वहाँ मौजूद कर्मचारियों के चेहरे पर ऐसा भाव था जैसे किसी ने मुँह से उनकी चाय छीन ली हो।
एक कमेंट में किसी ने लिखा, "इसे देखकर मुझे अपनी फैक्ट्री की 'केवीना' याद आ गई, जो बिस्कुट की फैक्ट्री में हर सही-सलामत बिस्कुट तोड़कर खुद ही खा लेती थी।" सच कहें तो ऐसी हरकतें हर देश-विदेश के ऑफिसों में किसी न किसी रूप में होती ही हैं।
'सबका हिस्सा, केविन का स्वाद' – जब टीमवर्क का मज़ाक बन गया
दूसरा किस्सा और भी दिलचस्प है। चॉकलेट फैक्ट्री में नए उत्पाद (यानि प्रोडक्ट डेवेलपमेंट टीम की मेहनत) का टेस्टिंग चल रहा था। यहाँ नियम था कि चूंकि सैंपल कम है, तो सबको बराबर-बराबर बाँटकर थोड़ा-थोड़ा चखना है।
टीम के दस लोग, पाँच चॉकलेट कप्स (असल में ये 'रीसेज़' पीनट बटर कप्स जैसे होते हैं, जिसमें चॉकलेट के अंदर कोई भरावन होती है)। सब लोग चाकू से काट-काटकर स्वाद ले रहे थे। तभी हमारे केविन साहब आते हैं, और बिना किसी की परवाह किए, दो कप्स झट से एक साथ मुँह में डाल लेते हैं!
टीम के बाकी लोग तो गिनती ही करने लगे कि अब किसे मिलेगा और किसे नहीं। एक कमेंट में किसी ने मज़ाकिया अंदाज में लिखा — "लगता है चॉकलेट में ही तख्तापलट (coup d'état) हो गया!"
ऐसी हरकतें हमारे भारतीय ऑफिसों में भी खूब देखने को मिलती हैं — कभी समोसे का हिस्सा, कभी केक की आखिरी स्लाइस, कोई न कोई बिना पूछे ले ही जाता है। बस केविन का स्तर थोड़ा ऊँचा है!
विदेशी फैक्ट्री के केविन, हमारे देश के 'शरारती लाल'
अगर सोचें तो हर ऑफिस, हर फैक्ट्री में ऐसा एक 'केविन' जरूर होता है — जिसे न नियमों की चिंता, न टीमवर्क का ख्याल। कमेंट्स में किसी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनकी फैक्ट्री में एक लड़की थी, जो पॉपकॉर्न मशीन में अपना खाना गर्म करने लगी, जबकि वही पॉपकॉर्न ग्राहक खाते थे! जब पकड़ी गई, तो बड़ी मासूमियत से बोली — "मैनेजर ने कहा था, ठीक है।" ऐसे जवाब सुनकर लगता है कि ये शरारती बुद्धि तो इंटरनेशनल लेवल की है।
हमारे यहाँ भी जब ऑफिस में कोई बर्थडे केक आता है, तो "थोड़ा सा टेस्ट करने" के बहाने कौन कब पूरा टुकड़ा उड़ा ले जाए, पता ही नहीं चलता! और जब बात छोटी टीम की हो, तो ऐसे लोग कोई मौका नहीं छोड़ते।
क्यों हर ऑफिस को चाहिए एक केविन?
अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसे लोगों से परेशान कौन नहीं होता? लेकिन सोचिए, अगर ये 'केविन' न हों, तो ऑफिस की बोरियत कौन दूर करेगा! इनकी छोटी-छोटी शरारतें, कभी-कभी गुस्सा दिलाती हैं, लेकिन बाद में वही सबसे मजेदार यादें बन जाती हैं।
जैसे एक कमेंट में किसी ने लिखा, "केविन कभी असफल नहीं होते, हर बार नया कारनामा कर दिखाते हैं।" यही बात हमारे मोहल्लों, स्कूलों और ऑफिसों में भी लागू होती है।
इन किस्सों से हमें याद आता है कि काम के साथ-साथ हँसी-मजाक भी जरूरी है। हाँ, नियमों का पालन करना चाहिए, लेकिन कभी-कभी चॉकलेट का स्वाद और मस्ती, नियमों से बढ़कर हो जाती है!
आपकी टीम में कौन है 'केविन'?
तो दोस्तों, केविन की फैक्ट्री की ये कहानियाँ बताती हैं कि थोड़ा सा 'मस्तीखोर' हर जगह मिलता है। आपके ऑफिस या मोहल्ले में भी ऐसा कोई है? अगर हाँ, तो उसके किस्से हमसे जरूर शेयर कीजिए!
हमें कमेंट में बताइए — क्या आपने भी कभी चॉकलेट, समोसा या केक के लिए ऐसा कोई 'कारनामा' किया या देखा है?
और हाँ, अगर केविन की अगली कहानी जानना चाहते हैं, तो जुड़े रहिए। क्योंकि अगली बार, फिर कोई नया स्वाद, नई शरारत लेकर आएंगे!
मूल रेडिट पोस्ट: Kevin and the chocolate factory ~ The Connoisseur