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काली मिर्च चाहिए? जितनी मर्जी ले लो!' – जब ग्राहक की जिद पर कर्मचारी ने दिया करारा जवाब

एक एनिमे-शैली की चित्रण जिसमें एक खाद्य सेवा कर्मचारी QuickChek में पेपर के साथ सब सैंडविच बना रहा है।
इस एनिमे-प्रेरित चित्रण के माध्यम से खाद्य सेवा की रंगीन दुनिया में गोताखोरी करें, जो QuickChek में स्वादिष्ट सब बनाने की हलचल को दर्शाता है। हमारे नवीनतम ब्लॉग पोस्ट में खुदरा जीवन की पर्दे के पीछे की कहानियों की खोज करें!

हर दुकान, होटल या ढाबे में एक-न-एक ऐसा ग्राहक जरूर होता है, जो अपनी फरमाइशों से स्टाफ का जीना हराम कर देता है। चाहे वह चाय में कम चीनी हो, समोसे में ज्यादा आलू, या फिर सब्जी में ज़रा सी भी मिर्ची कम! ऐसे ग्राहकों के किस्से तो हर किसी ने सुने होंगे, लेकिन आज की कहानी थोड़ी हटकर है – इसमें शिकायत है ‘काली मिर्च’ की, और जवाब भी कुछ ऐसा मिला कि आप हँसते-हँसते लोटपोट हो जाएंगे।

ग्राहक की फरमाइशें और कर्मचारी की परेशानी

मान लीजिए, आप किसी बड़े मॉल के फूड कोर्ट में काम कर रहे हैं, और रोज़ाना एक ही ग्राहक आता है - अपनी वही घिसी-पिटी शिकायतें लेकर। कभी कहता है – “बेकन कुरकुरा नहीं है”, कभी “टोस्ट जला दिया”, तो कभी “काली मिर्च कम डाली है”। यकीन मानिए, ऐसे ग्राहक का सामना करना किसी ‘सास-बहू’ सीरियल की बहू बनने से कम नहीं! Reddit यूज़र u/Lurking_Moose की कहानी कुछ ऐसी ही है।

विदेशी फास्ट-फूड आउटलेट QuickChek में काम करते समय, उन्हें रोज़ एक ग्राहक आता था, जिसे पापी सीड बगेल (हमारे हिसाब से समझिए – तिल या पोस्ता लगे हुए ब्रेड रोल) पर मक्खन, मोटी-मोटी बेकन की परतें और ढेर सारी काली मिर्च चाहिए होती थी। एक महिला सहकर्मी थी, जो जैसी बगेल बनाती, ग्राहक खुश रहता। लेकिन जैसे ही पोस्ट के लेखक बनाते, शिकायतों की झड़ी लग जाती – “काली मिर्च कम!”, “बेकन कम!”, “टॉस्ट सही नहीं!” वगैरह-वगैरह।

"जितनी मिर्च चाहिए, उतनी लो!"

अब भाई, हर बात की एक हद होती है! एक दिन जब ग्राहक ने आते ही ताने मारे – “इस बार काली मिर्च सही से डालना!”, तो कर्मचारी ने सोचा – ‘जो बोलेगा, वो ही भरेगा!’। उन्होंने बगेल को काली मिर्च से कुछ इस तरह लपेट दिया कि अंदर का हिस्सा बाहर से भी ज्यादा काला दिखने लगा। जैसे हमारे यहाँ कहावत है – “नाम में काली, स्वाद में गाली!”

ग्राहक ने खाया, तो कुछ देर बाद मुंह लटका के वापस आया – “इतनी मिर्च कोई कैसे खा सकता है?” कर्मचारी ने सीधा-सा सवाल दाग दिया – “अब भी कम पड़ी?” ग्राहक बुदबुदाया – “ये तो ज़्यादा ही हो गई…”। बस, उसके बाद से ग्राहक भी समझ गया – ज्यादा बोलोगे तो ज्यादा मिलेगा!

कम्युनिटी की राय – हर गली में एक ‘शिकायती’!

Reddit की चर्चा में तो जैसे लोगों ने अपने-अपने अनुभवों की झड़ी लगा दी। एक यूज़र ने बताया, “मेरे थिएटर में भी एक ग्राहक था, जिसे पॉपकॉर्न पर अतिरिक्त मक्खन चाहिए होता था। एक दिन मैंने इतना मक्खन डाला कि पॉपकॉर्न की थैली से रिसने लगा और ग्राहक की गोदी भीग गई! उसके बाद उसने कभी शिकायत नहीं की।”

एक और प्रतिक्रिया आई – “कुछ लोग हमेशा शिकायत करने के लिए ही आते हैं। उन्हें खुशी तभी मिलती है जब बाकी सब दुखी हों।” सच कहें तो, हमारे मोहल्ले या ऑफिस में भी ऐसे लोग मिल जाते हैं – जिन्हें न खुद चैन है, न दूसरों को रहने देते हैं।

किसी ने तो यह भी सुझाव दिया – “ऐसे लोगों से कह दो, भाई, खुद ही बना लो या कहीं और चले जाओ!” एक और कमेंट में मज़ाकिया अंदाज में कहा गया, “ऐसे लोग तो वही हैं जो बस छांव देख के भी छाता खोल लेते हैं – खुद भी दुखी, दूसरों को भी परेशान करो!”

असली वजह – दिल का मामला या बस आदत?

कुछ लोगों ने शक जताया कि ग्राहक का असली मकसद शायद खाने में खराबी निकालना नहीं, बल्कि उसी महिला कर्मचारी से ही बगेल बनवाना था। एक ने लिखा, “शायद उसे उसी महिला से बात करना पसंद था, बाकी सबको तंग करता था ताकि सब हार मान लें।” हमारे यहाँ भी तो अक्सर देखा जाता है – कुछ लोग रेस्टोरेंट में बार-बार शिकायत करके उसी वेटर से सर्विस लेने की जिद करते हैं, क्योंकि उन्हें उससे बात करने में मज़ा आता है।

मूल लेखक ने भी पुष्टि की, “मेरी सहकर्मी इतनी मीठी थी कि डोनट भी उसके सामने फीका लगे। शायद ग्राहक को वही पसंद थी।”

अंत में: ‘अति सर्वत्र वर्ज्यते’

कहते हैं, किसी भी चीज़ की अति बुरी होती है – चाहे वो काली मिर्च हो, शिकायतें हों या फिर किसी से तकरार। Reddit की इस कहानी से यही सीख मिलती है कि कभी-कभी ‘तोड़’ का जवाब ‘तोड़’ से देना ही पड़ता है, लेकिन विनम्रता और हँसी-मजाक के साथ। अगली बार जब कोई ग्राहक या रिश्तेदार आपको परेशान करे, तो सोचिए – क्या उसे भी “काली मिर्च का डोज़” देना चाहिए?

आपकी क्या राय है? क्या आपके साथ भी ऐसा कोई मज़ेदार या झल्लाने वाला अनुभव हुआ है? कमेंट में जरूर बताइए, और पोस्ट पसंद आई हो तो शेयर करना मत भूलिए!


मूल रेडिट पोस्ट: You want more pepper? Sure!