विषय पर बढ़ें

किरायेदार, ऊंट और लालची मकान मालिक: जब सहनशीलता की हदें पार हो गईं

एक ऊंट की फोटो रियलिस्टिक चित्रण, जो एक अजीबोगरीब परिदृश्य में भारी उपमा घास उठाए हुए है।
हमारे रंगीन ऊंट से मिलिए, जिसे भारी उपमा घास उठाने का काम सौंपा गया है। यह फोटो रियलिस्टिक छवि हमारे मजेदार मकान मालिक की कहानी का सार beautifully कैद करती है। आइए जानते हैं कि हमारा यह ऊंट वास्तव में कितना भार सहन कर सकता है!

कहते हैं “ऊँट की कमर आख़िर एक तिनके से टूट जाती है।” अब आप सोच रहे होंगे, ऊंट और किराएदार का क्या रिश्ता? तो जनाब, आज जो कहानी मैं आपको सुनाने जा रहा हूँ, उसमें ऊंट तो नहीं, पर एक किराएदार की सहनशीलता जरूर है, जिस पर मकान मालिक रोज़ नया बोझ डालता रहा – और आखिरकार, सब्र का बांध टूट ही गया!

हम सबने कभी न कभी किराए के मकान में रहकर वो दुख-दर्द झेले हैं, जिन्हें सुनकर लोग कहते हैं – “यार, मकान मालिक तो बड़े खड़ूस होते हैं!” लेकिन आज की ये कहानी अमेरिका के एक छोटे शहर से आई है, जहां मकान मालिक की खुदगर्जी और किरायेदार की चतुराई ने मिलकर ऐसी लाजवाब जुगलबंदी पेश की, कि आप भी मुस्कुरा उठेंगे।

ऊँट की पीठ पर पहला तिनका: जब मकान मालिक निकला जातिवादी

कहानी की शुरुआत होती है एक प्यारे से स्टूडियो अपार्टमेंट से, जिसका किराया था – पूरे $1200 (आसपास 1 लाख रुपए)! सुनकर आप भी चौंक गए ना? ऊपर से बिजली-पानी अलग से। हमारे नायक और उनकी पत्नी बड़ी उम्मीदों के साथ यहाँ शिफ्ट हुए, लेकिन मकान मालिक यानी “Scumbeater” ने आते ही ऐसा ताना मारा – “कम से कम आप लोग मेक्सिकन नहीं हो!”

अब भारत में तो जात-पात की बातें आम हैं, लेकिन अमेरिका में इस तरह की टिप्पणी सुनकर ही हमारे किरायेदार के मन में पहला तिनका आ गया – ये मकान मालिक तो बड़ा रंगभेदी है!

“अपने ही किराए से, मेरा काम भी कर दो!” – मकान मालिक की जुगाड़ू सोच

यहाँ तो कई मकान मालिक किराएदार से पंखा ठीक करवा लें, तो समझिए गनीमत है। लेकिन Scumbeater तो एक कदम आगे निकला! जैसे ही किराएदार ने अपनी टूल्स से भरी गाड़ी पार्क की, मकान मालिक ने तुरंत पूछ लिया – “बढ़ईगिरी आती है? घर का काम कर दोगे?”

और मजेदार बात – जो काम के लिए $30 प्रति घंटा देने की बात की, वो भी उसी पुराने, खराब घास काटने वाली मशीन से! जब किराएदार ने कहा – “भैया, किराए में कुछ छूट दो, तभी करूंगा”, तो मकान मालिक मुंह बना कर चला गया।

कमेंट्स में एक यूज़र ने मजाकिया अंदाज में लिखा – “भैया, क्या अपने पैसे से अपना ही घर साफ करवाओगे?”

मकान की हालत – बिलकुल ‘जुगाड़ू’! और बिजली का बिल देख रो पड़े किराएदार

अब आते हैं मकान की असली हालत पर – दीवारों में चींटियां, किचन में चमगादड़, और छत में गिलहरियों का अड्डा! ऊपर से सर्दियों में गर्मी का एकमात्र सहारा – पुराना मिनी-स्प्लिट मशीन, जो कि बिजली का मीटर ही घुमा दे। हर महीने $500 (लगभग 40,000 रुपये) सिर्फ बिजली का बिल!

यहाँ एक कमेंट करने वाले ने लिखा – “$1200 किराया और ऊपर से इतना बिजली का बिल? ये तो जैसे मुंबई की चॉल में AC लगवा लिया हो!”

‘लीज़’ का खेल – मकान मालिक को उसी के दांव से मात!

एक साल पूरा होते ही मकान मालिक ने किराया बढ़ाने की जुगत लगाई – 3% ज्यादा! किराएदार और उनकी पत्नी (जो पेशे से लीगल असिस्टेंट रह चुकी थीं), दोनों ने लीज़ को ध्यान से पढ़ा। उसमें लिखा था – अगर नई लीज़ साइन नहीं की, तो किराया $280 बढ़कर महीने-महीने पर चलता रहेगा।

मकान मालिक ये सोचकर खुश था कि किराएदार घबरा जाएंगे, लेकिन किराएदार बोले – “भैया, हम दूसरी लीज़ साइन नहीं करेंगे, लीज़ के मुताबिक जितना देना है, देंगे।”

कमेंट्स में किसी ने लिखा – “वाह! जैसे किसी ने ‘चाणक्य नीति’ पढ़ ली हो – मकान मालिक को उसकी ही चाल में फंसा दिया!”

आखिर ऊँट गिरा कैसे? किराएदार की जीत, मकान मालिक की हार

असल जीत तब हुई जब किराएदारों को अपने ऑफिस कैंपस में ही, उसी किराए में दो बेडरूम वाला शानदार फ्लैट मिल गया – वो भी जनरेटर और फ्री यूटिलिटी के साथ! पुराने मकान मालिक के फ्लैट में आज भी ताले लगे हैं, और ज़ोरदार बर्फबारी में उसमें कोई रहना नहीं चाहता।

एक कमेंट में लिखा गया – “मकान मालिक 3% किराया बढ़ाकर $36 महीने के पीछे पड़ा था, अब साल भर में $3,600 (लगभग 3 लाख रुपये) का घाटा झेल रहा है!”

पाठकों के लिए सबक – छोटी-छोटी जीतें भी ज़रूरी हैं!

कई लोगों ने कमेंट किया कि – “ये तो सब जगह आम बात है, किराया बढ़ना, मकान की खराबी…” लेकिन खुद OP ने जवाब दिया – “अगर हम छोटी-छोटी जीतों को सेलिब्रेट नहीं करेंगे, तो बड़ी जीतें कभी नहीं आएंगी।”

भारतीय संदर्भ में भी यही सच है – मकान मालिक हो या ऑफिस बॉस, हर जगह अपने अधिकार जानना और चतुराई से काम लेना ज़रूरी है।

निष्कर्ष: ऊँट की कमर आखिर टूट ही जाती है!

कहानी का सार यही है – चाहे अमेरिका हो या भारत, अगर कोई आपको “लीज़” या “कॉन्ट्रैक्ट” की शर्तों के पीछे छुपकर परेशान कर रहा हो, तो आप भी उनकी ही चाल में उन्हें मात दे सकते हैं।

तो अगली बार जब आपका मकान मालिक या ऑफिस बॉस आपको अनुचित तिनकों से लादे, याद रखिए – ऊँट की कमर एक तिनके से टूट ही जाती है!

आपकी क्या राय है? क्या आपने भी कभी ऐसे मकान मालिक या बॉस का सामना किया है? अपने अनुभव ज़रूर शेयर करें – और हाँ, छोटी जीतों को सेलिब्रेट करना न भूलें!


मूल रेडिट पोस्ट: Scumbeater and the Proverbial Camel - A story about my landlord