क्या होटल रिसेप्शनिस्ट सच में आपकी जानकारी बेचता है? एक मज़ेदार हकीकत
क्या आपने कभी होटल में चेक-आउट करते वक्त रिसेप्शनिस्ट को शक की निगाह से देखा है? या फिर सोचा है कि कहीं आपकी ईमेल आईडी से जुड़ी सारी दुनिया के सौदे तो नहीं हो रहे? अरे भई, हमारे देश में भी हर गली-मोहल्ले में ये जासूसी वाला फितूर खूब चलता है—'भैया, मोबाइल नंबर क्यों चाहिए?', 'आधार कार्ड की फोटो क्यों ले रहे हो?', 'कहीं मेरी जानकारी बेच तो नहीं दोगे?'
आज हम आपको ऐसी ही एक मज़ेदार कहानी सुनाने वाले हैं, जिसमें होटल के रिसेप्शन पर खड़ा कर्मचारी (फ्रंट डेस्क एजेंट) अपने आप को 'छोटा कर्मचारी' बताते हुए, गेस्ट की डेटा प्राइवेसी वाली फिक्र और उस पर हुए ड्रामे का दिलचस्प किस्सा सुना रहा है। पढ़िए और सोचिए—क्या वाकई आपकी जानकारी बिक रही है या सिर्फ आपकी टेंशन?
होटल रिसेप्शन पर डेटा का ड्रामा—'ईमेल आईडी देंगे या नहीं?'
मान लीजिए आप किसी बढ़िया होटल में ठहरे हैं (वो भी थर्ड पार्टी वेबसाइट से बुकिंग करके, जैसे हम में से कई लोग करते हैं)। चेक-आउट के समय रिसेप्शनिस्ट आपसे नम्रता से पूछता है—"सर, आपकी ईमेल आईडी दे दीजिए, फोलियो (बिल) भेज दूंगा।"
अब साहब, गेस्ट का पारा चढ़ जाता है—"तुम मेरी ईमेल आईडी का क्या करोगे? क्या बेच दोगे, या सिर्फ फोलियो भेजोगे?"
रिसेप्शनिस्ट (मुस्कराते हुए)—"सर, सिर्फ फोलियो भेजूंगा।"
लेकिन गेस्ट का शक खत्म नहीं होता—"यार, आजकल हर जगह हमारी जानकारी बेच दी जाती है, पता नहीं क्या-क्या हो सकता है..."
अंत में, रिसेप्शनिस्ट ने हार मान ली और बोला, "ठीक है साहब, प्रिंट आउट निकाल के दे देता हूँ।"
गेस्ट विजयी भाव से बिना ईमेल दिए निकल लिए—मानो कोई बड़ी जंग जीत ली हो!
अब सोचिए, जिस वेबसाइट से उन्होंने बुकिंग की, वहाँ तो क्रेडिट कार्ड, पता, मोबाइल सब दे दिया, पर होटल वाले से बच गए!
गेस्ट की अजीब हरकतें—नंबर, ईमेल और आईडी पर हंगामा
ये तो बस शुरुआत थी। ऐसा ही एक कमेंट आया कि एक गेस्ट ने आईडी दिखाने से भी मना कर दिया, बोला—"मेरा नाम बता दिया, अब और क्या चाहिए?" फिर जब आईडी ली, तो पता पूछने पर नाराज हो गया—"भाई, मैं अपना सामान नहीं भूलूंगा!"
कई मेहमान अपना क्रेडिट कार्ड, आधार, यहां तक कि खून की जानकारी भी दे देंगे, पर ईमेल आईडी मांगो तो जैसे उनकी जान निकल जाए! एक कमेंट में किसी ने हंसी-मजाक में लिखा—"सर, हम यहाँ सिर्फ किडनी बेचते हैं, डेटा नहीं।" (सोचिए, अगर रिसेप्शन में लिखा हो—'ऑर्गन डोनर लिस्ट से अनसब्सक्राइब करना है क्या?')
कई बार तो लोग आईडी स्कैन कराने पर भी हंगामा करते हैं—मानो होटल वाले उनका पूरा खानदान ट्रैक करने वाले हैं! पर जब थर्ड पार्टी वेबसाइट पर बुकिंग करते हैं, तो वहीं सब जानकारी खुशी-खुशी दे आते हैं।
ईमेल आईडी का डर—मजेदार तर्क-वितर्क
सोचिए, जहां लोग अपने क्रेडिट कार्ड नंबर, आधार और यहां तक कि SSN (विदेशी पहचान नंबर) तक दे देते हैं, वहां ईमेल आईडी मांगने पर नाटक क्यों? एक कमेंट में लिखा गया—"बुजुर्ग लोग SSN आराम से दे देंगे, लेकिन ईमेल मांगो तो मानो उनकी पहली संतान मांग ली हो!"
कई बार मेहमान होटल वालों पर शक करते हैं कि कहीं उनका डेटा किसी 'नाइजीरियन प्रिंस' को ना भेज दिया जाए। पर वही लोग सोशल मीडिया पर, फ्री वाई-फाई पर, दुकान में लकी ड्रा के कूपन के लिए सबकुछ दे आते हैं।
एक और मजेदार किस्सा—किसी ने गुस्से में बोला, "पेपर और बिल सुबह-सुबह मेरे दरवाजे पर चाहिए, इको-फ्रेंडली का बहाना मत दो!" अब भैया, पेपर का खर्चा बचे या पर्यावरण, गेस्ट को तो बस अपनी आदत नहीं बदलनी!
होटल-कर्मचारियों की मजबूरी और गेस्ट का भ्रम
असलियत ये है कि होटल वाले आपकी जानकारी यूं ही नहीं मांगते। कई बार तो कानूनन जरूरी होता है—जैसे विदेश में होटल में आईडी दर्ज करना अनिवार्य है। अगर कोई बड़ी घटना हो जाए, या बिल का विवाद हो, तो यही जानकारी काम आती है।
एक कमेंट में किसी ने सही लिखा—"हमें आपकी जानकारी लेकर कोई खास खुशी नहीं है, बस आपकी सुरक्षा और सुविधा के लिए जरूरी है।"
कई बार तो गेस्ट खुद ही मुसीबत मोल लेते हैं—जैसे एक ने ईमेल नहीं दी, फिर शिकायत की कि कन्फर्मेशन मेल क्यों नहीं मिला! कर्मचारी ने झट से जवाब दिया—"सर, आपने ईमेल ही नहीं दी थी।"
कभी-कभी लोग बेवजह डर जाते हैं (कई बार वाजिब भी होता है), लेकिन आजकल तो फेक कॉल्स, साइबर फ्रॉड, डेटा लीक जैसी खबरें हर जगह हैं। फिर भी, जानकारी बांटने में सतर्कता और शंका में फर्क समझना जरूरी है।
निष्कर्ष: शक-शुबहे छोड़िए, होटल वाले जासूस नहीं!
तो प्यारे पाठकों, अगली बार जब आप होटल में जाएं और रिसेप्शन वाला आपसे ईमेल मांगे, तो ये न सोचें कि आपकी इनफॉर्मेशन किसी 'ब्लैक मार्केट' में बिक जाएगी। होटल कर्मचारी भी इंसान हैं, उनका काम है आपकी सुविधा, ना कि आपकी जासूसी।
और हां, अगर आपको वाकई चिंता है, तो एक अलग ईमेल आईडी बना लें—सिर्फ इन साइट्स के लिए।
तो बताइए, आपको भी ऐसे शक करने वाले गेस्ट मिलते हैं या आप खुद भी कभी ऐसे रहे हैं? कमेंट में जरूर शेयर करें!
आपकी राय, अनुभव और किस्से का हमें इंतजार रहेगा।
आखिर में, डेटा प्राइवेसी जरूरी है, लेकिन हर जगह डरना भी ठीक नहीं—वरना रिसेप्शन वाले से 'ऑर्गन डोनर लिस्ट' से अनसब्सक्राइब करने की चिट्ठी भी आ सकती है!
मूल रेडिट पोस्ट: I, a lowly front desk agent, am personally selling your data.