क्या आपकी प्रिंटर भी कभी 'भूतिया' हो जाती है? एक वकील और टेक्नोलॉजी की जंग
क्या आपने कभी सुना है कि किसी ऑफिस की प्रिंटर रात को खुद-ब-खुद प्रिंट निकालने लगती है? नहीं सुना? तो आज सुनिए एक सच्ची कहानी – जिसमें प्रिंटर को "भूतिया" समझ लिया गया और ऑफिस में मानो CID या 'भूत-पिशाच निकाले' जैसी स्थिति बन गई!
एक मिड-साइज़ लॉ फर्म में टेक्निकल सपोर्ट डेस्क पर काम करने वाले हमारे दोस्त का अनुभव कुछ ऐसा ही था। मंगलवार की सुबह उन्हें ऑफिस की सबसे सीनियर पार्टनर - चलिए नाम मान लें 'मार्गरेट' - का टिकट मिला। उसमें लिखा था कि उनकी प्रिंटर "पज़ेस्ड" है, यानी उसमें किसी आत्मा का वास है, और वह रात में अपने आप अजीब-अजीब प्रिंट निकालती है! टिकट में तीन-तीन एक्सक्लेमेशन मार्क और "intentional" शब्द को रेखांकित किया गया था। अब आप खुद सोचिए, ऐसे केस में टेक्निकल बंदा क्या सोचे?
जब प्रिंटर बना ऑफिस का 'चुड़ैल चौक'
मार्गरेट जी की मानें, तो उन्होंने पिछले छह हफ्ते से ये तमाशा झेला था – हर गुरुवार की सुबह सफाईवाले को फर्श पर कुछ अधूरे, आधे-अधूरे प्रिंट पड़े मिलते। वो खुद रोज रात 9 बजे तक ऑफिस में रुकतीं और प्रिंटर के पास वाली खिड़की पार्किंग की तरफ खुलती थी। अब चूंकि मामला 'सीनियर पार्टनर' का था, तो सिक्योरिटी भी शामिल हो गई – "कहीं कोई जान-बूझकर ऑफिस में घुसकर मुझे परेशान तो नहीं कर रहा!"
मार्गरेट ने सबूत के तौर पर सारे पन्ने मनीला फोल्डर में संभाल कर रखे थे। उन पन्नों पर कभी आधी फाइल तो कभी कुछ लाइनें, उसके बाद खाली पन्ना – सच में देखने में ऐसा लग रहा था मानों कोई प्रेत आत्मा प्रिंटर से खेल रही हो!
तकनीकी जाँच: प्रिंटर का भूत निकला 'पुराना शेड्यूल'
अब टेक्निकल सपोर्ट वाले भैया (जिन्हें सब 'भइया' कहते हैं) ने जब प्रिंटर की जांच शुरू की तो मामला कुछ और ही निकला। प्रिंटर तो पुरानी नेटवर्क वाली थी, जिसे अभी बदला नहीं गया था – और प्रिंट हिस्ट्री में देखा, तो हर बुधवार रात 11 बजे एक प्रिंट जॉब पूरी हो जाती थी।
जाँच में पता चला कि प्रिंट जॉब भेजने वाला लैपटॉप आठ महीने पहले ही ऑफिस से विदा हो चुका था! थोड़ी देर तो खुद टेक सपोर्ट वाले भी सोच में पड़ गए कि ये क्या माजरा है। बाद में मालूम हुआ कि पिछला एसोसिएट, जो अब जा चुका था, उसने केस समरी के लिए वीकली शेड्यूल्ड प्रिंट जॉब सेट कर रखी थी। लैपटॉप तो फॉर्मेट होकर वापस चला गया, लेकिन प्रिंट सर्वर पर वो शेड्यूल अभी भी पड़ा था। हाल ही में हुए एक अपडेट ने पुराने सारे शेड्यूल फिर से एक्टिव कर दिए थे। बस, 25 मिनट में सब ठीक हो गया – शेड्यूल हटाया, मशीन की एंट्री भी डिलीट कर दी।
मार्गरेट जी ने बड़ी देर तक भइया को घूरा, फिर बोलीं – “तो ये जान-बूझकर नहीं था।” देखिए, सवाल नहीं, सीधा बयान! उन्होंने फोल्डर बंद किया, ड्रॉअर में रखा और वो "थैंक यू" बोलीं जैसे भइया ने उनका दिल तोड़ दिया हो। शायद वो असली विलेन ढूंढ़ रही थीं। भइया भी मुस्कुरा दिए – "मार्गरेट जी, आपको समझ सकता हूँ!"
प्रिंटर और स्कैनर: ऑफिस की असली 'भूतिया' मशीनें
अब बात यहीं नहीं रुकी। Reddit पर इस किस्से को पढ़कर एक यूजर ने लिखा – "अगर कोई मशीन सच में भूतिया हो सकती है, तो वो प्रिंटर ही होगी!" एक और ने जोड़ा – "और स्कैनर हो तो समझिए, मामला नागिन सीरियल से भी आगे बढ़ जाएगा!"
अक्सर तो हमारे देश में भी ऑफिस के प्रिंटर-स्कैनर इतने तंग करते हैं कि लगता है मानो किसी बाबा की जरूरत पड़ जाए। कोई बोला – "हमारे यहां तो कभी-कभी L3 सपोर्ट ने सलाह दी थी कि प्रिंटर के ऊपर मुर्गी की बलि दे दो, तभी ठीक होगा!"
एक और मजेदार टिप्पणी आई – "HP अब Hewlett-Packard नहीं, बल्कि Haunted Printer कहलाना चाहिए!" कई लोगों ने तो यहां तक कह दिया कि प्रिंटर के ड्राइवर और टोनर अलग-अलग राक्षसों के बनाए हुए लगते हैं – किसी ने जोक मारा, "इतना मैजेंटा किसे चाहिए? जरूर कोई तांत्रिक पीछे पड़ा है!"
तकनीकी समाधान और भारतीय ऑफिस: 'भूत' से ज्यादा 'जुगाड़'
हमारे देश में भी ऐसे अजीबोगरीब तकनीकी मामले खूब आते हैं। कई बार प्रिंटर कागज चबा जाता है, कभी सबका डेटा उल्टा-पुल्टा प्रिंट कर देता है, तो कभी बिना वजह रात में ही आवाजें करने लगता है। लोग समझते हैं कोई अदृश्य शक्ति काम कर रही है, लेकिन असलियत में या तो कोई पुराना शेड्यूल, या नेटवर्क का लोचा, या कोई सॉफ्टवेयर अपडेट ही जिम्मेदार होता है।
हमारे टेक्निकल सपोर्ट वाले भी कभी-कभी बड़ी नाटकीय भाषा में समझाते हैं – "प्रिंटर में आत्मा नहीं, बस पुराने सेटिंग्स की जिद है!" और फिर एक क्लिक में सब ठीक। पर अफसोस, समस्या खत्म होते ही कई बार ग्राहक का रोमांच भी खत्म हो जाता है – आखिर, किस्से बिना विलेन के मजा नहीं आता!
निष्कर्ष: क्या आपके ऑफिस की मशीनें भी 'चमत्कारी' हैं?
तो मित्रों, अगली बार जब आपकी प्रिंटर या स्कैनर बिना वजह हरकत करे, तो डरिए मत – हो सकता है, वो भूत-प्रेत नहीं, बल्कि किसी पूर्व कर्मचारी का 'शेड्यूल' या कोई तकनीकी गड़बड़ हो!
क्या आपके साथ भी कभी ऐसी 'भूतिया' टेक्नोलॉजी की घटना हुई है? नीचे कमेंट में जरूर बताएं – और अगर आपके ऑफिस की प्रिंटर सच में तांत्रिक उपायों से ही ठीक होती है, तो वो किस्सा भी सुनाइए!
आखिरकार, टेक्नोलॉजी और जुगाड़ – दोनों में हमारे यहां खूब दम है!
मूल रेडिट पोस्ट: The printer was 'haunted.' Sure, Jan.