विषय पर बढ़ें

कंप्यूटर खराब? ज़रा अपना पैर तो देखिए जनाब!

एक कारखाने के माहौल में यांत्रिक उपकरणों के बीच काम कर रहे कर्मचारी का एनीमे चित्रण, चुनौतियों और समस्या समाधान को उजागर करता है।
इस जीवंत एनीमे दृश्य में, एक कारखाने का कर्मचारी यांत्रिक समस्या समाधान की चुनौतियों का सामना कर रहा है। यह छवि तकनीकी दिक्कतों और एक मांगलिक माहौल में सामान्य ज्ञान के मिश्रण को दर्शाती है, जो एक ऐसे कहानी का मंच तैयार करती है जिसमें हेरफेर और अधूरे वादे शामिल हैं।

क्या आपने कभी सोचा है कि ऑफिस में कंप्यूटर बार-बार क्यों बंद हो जाता है? आप सोच रहे होंगे—कोई सॉफ्टवेयर, कोई वायरस या बिजली की समस्या! मगर एक फैक्ट्री में असली वजह कुछ ऐसी निकली, जिसे सुनकर आप हँसते-हँसते लोटपोट हो जाएंगे।

फैक्ट्री की शिफ्ट और अजीब सी परेशानी

कुछ साल पहले की बात है। एक टेक्निकल सेटअप एक्सपर्ट की नौकरी थी, जिसमें 90% काम मशीनों की मुरम्मत और 10% काम था—साधारण समझदारी। लेकिन दुर्भाग्य से, वहां के कुछ लोग ‘साधारण समझदारी’ में जरा कमजोर थे।

दूसरी शिफ्ट की शुरुआत ही होती थी कि कंपनी के सारे बड़े अफसर मुस्कुराते हुए घर निकल जाते। बाकी जो बचे थे, वे इतने ‘स्मार्ट’ कि अगर कोई पंखा भी बंद हो जाए, तो टेक्निकल एक्सपर्ट को बुला लेते!

इसी दौरान, एक दिन रेडियो पर कॉल आई—“भैया, मेरा कंप्यूटर नहीं चल रहा।” अब तक तो आदत सी हो गई थी ऐसे सवालों की, तो बड़े ठंडे दिमाग से पूछा, “प्लग चेक किया आपने?”

जवाब—“तुम आकर देख लो ना!”

समस्या का असली कारण: कंप्यूटर या पैर?

जब मैं वहां पहुंचा, तो सुपरवाइज़र साहब कंप्यूटर मॉनिटर के बटन ऐसे दबा रहे थे जैसे कोई लॉटरी जीतने की कोशिश कर रहा हो। मॉनिटर काला, कंप्यूटर बेजान! गौर से देखा तो ये छोटा सा ‘माइक्रो पीसी’ ट्यूब के आकार का, बिना पावर कॉर्ड के shelf पर पड़ा था।

अब इन साहब की आदत थी—खड़े-खड़े काम करना और पैर उसी छोटे से shelf पर टिकाकर रखना, जिस पर कंप्यूटर रखा था। मैंने पूछा, “कंप्यूटर गिरा था क्या?”

“हां, पता नहीं कैसे गिर गया, फिर उठा के रख दिया...अब चालू ही नहीं हो रहा!”

मैंने मुस्कुराकर कहा, “भैया, प्लग तो लगाओ—शायद भगवान का भेद खुल जाए!”

प्लग लगाया, कंप्यूटर चालू! साहब खुश, और अगले ही दिन ‘हैप्पी हेल्पर’ बोर्ड पर मेरा नाम चमक रहा था—‘बढ़िया काम!’

बार-बार वही गलती: इंसान सुधरे या मशीन?

मगर मामला रुका नहीं। अगले कुछ दिनों तक यही ड्रामा चलता रहा—कंप्यूटर बार-बार बंद और मैं बार-बार प्लग लगाने वाला मसीहा!

एक दिन साहब पूछ बैठे, “कंप्यूटर बार-बार क्यों बंद हो जाता है?” मैंने पूछा, “घर पर भी ऐसा होता है क्या?”

“नहीं!”

“तो क्या घर पर भी कंप्यूटर पैरों के नीचे shelf पर रखते हो?”

“नहीं!”

“तो फिर समझो—जहां पैर, वहीं कंप्यूटर की शामत!”

आखिरकार, मैंने साहब को एक मजबूत लकड़ी का टुकड़ा लाकर दिया—“अब इस पर पैर रखो, कंप्यूटर को छोड़ दो!”

फैक्ट्री की हलचल और मज़ेदार प्रतिक्रियाएँ

इस किस्से का सबसे मजेदार हिस्सा तब आया, जब पहले और तीसरे शिफ्ट के लीडर को यह ‘समस्या समाधान’ पता चला। पहले शिफ्ट का लीडर तो मुझे देखकर मुस्कुरा उठा, “वाह! आईटी का कमाल कर दिया भाई!”

तीसरे शिफ्ट वाले से जब बताया गया कि ‘अब ब्लॉक पर पैर रखो, कंप्यूटर shelf पर रहेगा’, तो उसने ऐसा चेहरा बनाया मानो उसके सिर पर सींग निकल आए हों! मैं हँसी रोक नहीं पाया, और असली वजह बताई तो वे पेट पकड़कर हँस पड़े।

कम्युनिटी की सीख और चुटकुले

जैसे ही ये किस्सा Reddit पर पहुँचा, लोगों ने भी अपनी-अपनी राय दी। एक यूज़र ने लिखा—“समस्या मशीन में नहीं, यूज़र में थी। असली तकनीकी समाधान तो वहीं था!”

दूसरे ने चुटकी ली, “ऐसे पीसी को NUC कहते हैं, तो ये साहब हुए—NUC-klehead!” (यानि कंप्यूटर के साथ-साथ सिर भी थोड़ा हल्का!)

ये बात बिल्कुल वैसी है, जैसे हमारे देश में ‘बल्ब जल नहीं रहा’ कहने पर दादी पूछती हैं—‘बेटा, स्विच देखा है?’

निष्कर्ष: ऑफिस की छोटी-छोटी आदतें, बड़ी-बड़ी समस्याएँ

कहानी से ये सबक मिलता है कि कभी-कभी ऑफिस की तकनीकी समस्याएँ, असल में हमारी आदतों की वजह से होती हैं। कंप्यूटर खराब हो, पंखा बंद हो या गाड़ी स्टार्ट न हो—पहले बुनियादी चीज़ें जाँचिए, फिर एक्सपर्ट को याद कीजिए!

आपके ऑफिस में भी कोई ऐसा ‘पैर वाला’ किस्सा हुआ हो, तो कमेंट में जरूर बताइएगा। और हाँ, अगली बार कंप्यूटर बंद हो जाए तो पहले देखिए—कहीं आपका पैर तो नहीं उलझा?

धन्यवाद, पढ़ते रहिए, मुस्कराते रहिए!


मूल रेडिट पोस्ट: Just don't put your foot there