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ऑफिस में बर्नआउट की बात करना मना था, फिर जो हुआ वो देखने लायक था!

तनावमुक्त कार्यालय कर्मचारी का 3D कार्टून चित्रण, आत्म-देखभाल करते हुए।
यह जीवंत कार्टून-3D चित्रण कार्यस्थल में आत्म-देखभाल के महत्व को दर्शाता है, जो तनाव प्रबंधन पर जोर देता है। जब हम केवल तनाव के बारे में बात करने से आगे बढ़ते हैं और कल्याण को बढ़ावा देते हैं, तो यह हमें अपने लिए समय निकालने और ज़रूरत पड़ने पर सहायता लेने की याद दिलाता है।

क्या आपने कभी सोचा है कि ऑफिस में अपनी थकान, तनाव या परेशानी खुलकर बताना गलत साबित हो सकता है? आजकल की दौड़ती-भागती ज़िंदगी में 'बर्नआउट' एक आम शब्द बन चुका है। लेकिन सोचिए, अगर आपकी कंपनी कह दे कि अब इसके बारे में बात करना मना है, तो क्या होगा? कुछ ऐसा ही हुआ Reddit यूज़र u/insiderecess के साथ – और आगे जो हुआ, वो किसी हिंदी फिल्म की कहानी से कम नहीं!

जब ऑफिस ने "खुलकर बात करो" कहा, लेकिन...

हमारे देश में भी अक्सर ऑफिस मीटिंग्स में कहा जाता है - "कोई भी दिक्कत हो तो खुलकर बताइए, हम सपोर्ट करेंगे।" लेकिन असलियत में मैनेजमेंट के कान में तेल पड़ा होता है! यही हाल Reddit वाले OP (यानी Original Poster) के साथ भी हुआ। उनके काम का क्षेत्र भारी तनाव और कर्मचारी पलायन के लिए बदनाम था, इसलिए कंपनी ने सबको भरोसा दिलाया कि "ट्रांसपेरेंसी" यानी पारदर्शिता से ही समाधान निकलेगा।

पर OP के जीवन में अचानक दो बेहद करीबी लोगों का निधन हो गया। दुखी मन और घटती उत्पादकता के कारण उन्होंने अपने मैनेजर से उम्मीद की थी कि समझदारी मिलेगी। लेकिन जो मिला, वो था एक नोटिस – जिसमें लिखा था कि "1:1 मीटिंग्स में बार-बार बर्नआउट की बात करना टीम के लिए स्ट्रेसफुल है।" ऊपर से आदेश आया – "अब बर्नआउट की बात मत करना।"

"ठीक है, अब नहीं करेंगे बर्नआउट की बात!"

यह सुनते ही OP ने मन ही मन सोचा – "जैसी करनी, वैसी भरनी!" अब न बर्नआउट की चर्चा, न सहायता की गुहार, न पारदर्शिता। लगभग दो महीने तक कोई शिकायत नहीं, सबकुछ चुपचाप चलता रहा। फिर एक दिन, OP ने 7 हफ्तों के लिए लंबी छुट्टी की अर्जी डाल दी – वजह थी "अत्यधिक बर्नआउट और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्या।"

अब मैनेजमेंट के चेहरे देखने लायक थे! सब हैरान और परेशान, जैसे किसी ने उनके पैरों तले से ज़मीन खींच ली हो। पूछने लगे, "आपने पहले क्यों नहीं बताया?" OP ने मुस्कुराते हुए अपना नोटिस दिखा दिया – "आपने ही तो मना किया था!"

यह मामला इतना तूल पकड़ गया कि मैनेजमेंट को ऊपर से डांट पड़ी – "ऐसा माहौल क्यों बनाया कि कर्मचारी मदद मांगने से डरने लगे?"

कम्युनिटी की प्रतिक्रियाएँ: सबको लगा मज़ा भी, चिंता भी

Reddit पर इस किस्से ने जैसे तूफान ला दिया! एक कमेंट करने वाले ने लिखा, "उम्मीद है अब आप बेहतर महसूस कर रहे होंगे।" OP ने जवाब दिया – "अब बहुत बेहतर हूँ!" किसी ने मज़ाकिया अंदाज़ में कहा – "अब तो मैनेजमेंट के घमंड की हवा निकल गई होगी!"

एक और यूज़र ने गहरी बात कही – "कई बार मैनेजमेंट सोचता है कि समस्या का नाम ही न लो, तो सब ठीक रहेगा। लेकिन दिक्कतें चुपचाप दबती नहीं, एक दिन फट पड़ती हैं।" क्या हमारे देश के दफ्तरों में भी ऐसा ही नहीं होता – ऊपर-ऊपर मुस्कराहट, अंदर-अंदर घुटन?

कुछ लोगों ने चिंता जताई – "ऐसे माहौल में काम करना खुद के लिए खतरा है।" और एक जनाब ने तो यहां तक कह दिया, "HR आपका दोस्त नहीं होता – अपना रिकॉर्ड हमेशा अपने पास रखिए!"

बर्नआउट: सिर्फ पश्चिमी समस्या नहीं, हमारे यहां भी हकीकत

अक्सर लोग सोचते हैं कि 'बर्नआउट' या 'मेंटल हेल्थ' की बातें सिर्फ विदेशों में होती हैं। लेकिन हकीकत तो यह है कि हमारे देश के दफ्तरों में भी कर्मचारी ओवरटाइम, टारगेट्स और बॉस के दबाव से जूझ रहे हैं। फर्क बस इतना है कि यहां लोग खुलकर बोलने से डरते हैं – "कहीं लोग सोचेंगे, ये कमजोर है..."

OP की कहानी इसीलिए इतनी असरदार है क्योंकि यह हर उस कर्मचारी की कहानी है, जो अपनी तकलीफ छुपाकर मुस्कुराता है। Reddit के एक और यूज़र ने खूब कहा – "अगर मैनेजमेंट से मदद मांगो तो वे आपको ही दोषी ठहरा देते हैं। इससे मनोबल टूटता है और पलायन बढ़ता है।"

क्या सीख मिली? – "हम भी कभी चुप न रहें!"

इस किस्से से साफ है – अगर ऑफिस में खुलकर बोलना मना हो जाए, तो दिक्कतें और बढ़ जाती हैं। बर्नआउट को नजरअंदाज करना, या उसकी चर्चा पर रोक लगाना, समस्या का हल नहीं – उल्टा वह और बड़ी हो जाती है। जैसे हमारे यहां कहते हैं – "सिर दर्द का इलाज पेनकिलर से नहीं, कारण दूर करने से होता है।"

अंत में, OP को 7 हफ्ते की छुट्टी और कुछ हद तक इंसाफ जरूर मिला, लेकिन असली बदलाव तभी आएगा जब दफ्तरों में इंसानियत को अहमियत दी जाएगी।

आपके ऑफिस का माहौल कैसा है?

क्या आपके ऑफिस में भी बर्नआउट, तनाव या मानसिक परेशानी की खुलकर चर्चा होती है? या फिर वहां भी सबकुछ 'ठीक-ठाक' दिखाने का दिखावा चलता है? नीचे कमेंट में अपने अनुभव जरूर साझा करें – हो सकता है आपकी कहानी किसी और को हिम्मत दे दे!

आखिर में, जैसा एक Reddit यूज़र ने लिखा – "बर्नआउट मज़ाक नहीं, हकीकत है। इसका इलाज है – वक्त पर मदद मांगना, और सही माहौल बनाना।"

तो अगली बार, जब कोई सहकर्मी आपकी परेशानी पूछे – तो झिझकिए मत, खुलकर बात कीजिए। आखिर, 'काम भी जरूरी है, लेकिन खुद की सेहत सबसे ऊपर है!'


मूल रेडिट पोस्ट: Stop reporting about office burn out? Okay, done