ऑफिस में बॉडी शेमिंग? बॉस को उसी की भाषा में जवाब देना पड़ गया भारी!
ऑफिस में काम करने वालों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द क्या होता है? टारगेट्स, मीटिंग्स या फिर बॉस के ताने? कई बार हमारे अपने साथी या सीनियर ऐसी बातें बोल देते हैं, जो दिल पर लग जाती हैं – खासकर जब बात शरीर या वजन की हो। आज मैं आपको एक ऐसी ही कहानी सुनाने जा रहा हूँ, जिसमें एक 'पतले-दुबले' कर्मचारी ने अपने बॉस को ऐसी पटखनी दी कि बॉस की बोलती ही बंद हो गई!
"सपोलिया" कहलाने की कहानी: ऑफिस में बॉडी शेमिंग का किस्सा
हमारे नायक हैं 36 साल के एक सज्जन, जिनकी लंबाई 185 सेंटीमीटर और वजन 70 किलो है। यानि कद-काठी से वो दुबले-पतले ही लगते हैं। ऑफिस पूरा पुरुषों का है – और सबसे ऊपर हैं 'हाई सेप्टन' (बॉस), जिनका शौक है दूसरों का मज़ाक उड़ाना। बॉस अकसर हल्के-फुल्के अंदाज़ में इन्हें 'चिड़िया' (या सपोलिया जैसी उपाधि) कहकर तंज कसते रहते – जो आमतौर पर कमजोर या पतले लोगों के लिए बोला जाता है।
अब ये बात तो है कि हर किसी का मेटाबोलिज्म अलग होता है, कोई खाना खाते-खाते भी दुबला रहता है, तो कोई थोड़ा सा खा कर भी गोल-मटोल हो जाता है। लेकिन बॉस का बार-बार मज़ाक उड़ाना सही नहीं था। खुद OP (हमारे नायक) को फर्क नहीं पड़ता, मगर सोचिए किसी और को बुरा लग जाए तो? आखिर कब तक सहें!
पलटवार का मास्टरस्ट्रोक: "मैं तो डाइट पर हूँ!"
एक दिन बॉस फिर से आकर बोले, "आज कुछ खाओगे भी, चिड़िया?" यानी जैसे ये बेचारे खाते ही न हों! अब OP ने सोचा – क्यों न बॉस की ही चाल में उसे उलझाया जाए। उन्होंने बिलकुल शांत चेहरे से जवाब दिया, "नहीं, मैं तो डाइट पर हूँ। वजन कम करना है, थोड़ा फूला-फूला सा लग रहा हूँ।"
बस फिर क्या था, बॉस की हालत देखने लायक थी – "क्या? तुम्हें और वजन घटाना है?" वो हक्का-बक्का रह गए। OP ने कंधे उचका दिए और अपनी सीट पर काम करने लगे। बॉस को जैसे सांप सूंघ गया, पूरा दिन नजरें नहीं मिला पाए। उस दिन के बाद बॉस ने वजन या खाने पर कोई कमेंट नहीं किया!
कम्युनिटी की राय: "ऐसे लोगों को उन्हीं की भाषा में जवाब देना चाहिए"
इस कहानी पर Reddit कम्युनिटी में खूब चर्चा हुई। एक यूज़र ने लिखा – "बहुत ही बढ़िया तरीका है, बिना लड़ाई के सामने वाले को उसकी गलती का एहसास करवा दिया!" किसी ने कहा – "ऐसे लोगों को सीधे जवाब नहीं, बल्कि उनकी सोच को ही आईना दिखाना चाहिए।"
एक और कमेंट था, "अगर आपके बॉस को शक हो गया कि उनकी वजह से आप सच में खाने-पीने से डरने लगे हैं, तो उनकी नींद उड़ जाएगी!" यही हुआ – बॉस को डर लगने लगा कि कहीं उनके मज़ाक की वजह से कोई गंभीर समस्या न हो जाए।
कई लोगों ने ये भी कहा कि भारत में भी बॉडी शेमिंग बहुत आम है – कभी किसी को 'हड्डी का ढांचा', तो कभी 'मोटू' कहकर बुला लेते हैं। लेकिन क्या ये सही है? एक पाठक ने लिखा – "लोग समझते हैं पतले लोगों को कुछ भी बोल सकते हैं, लेकिन किसी मोटे को बोल दो तो बवाल मच जाता है। भाई, सबका शरीर उसका अपना है!"
"शरीर पर टिप्पणी करना बंद करें!" – सीख और संदेश
इस पूरी घटना में सबसे बड़ी सीख यही है कि किसी के शरीर, वजन, रंग-रूप पर मज़ाक या टिप्पणी करना कभी ठीक नहीं। चाहे वो मज़ाक में कहें या प्यार से, सामने वाले को चोट लग सकती है। कमेंट्स में एक यूज़र ने लिखा – "हमारे ऑफिस में भी लोग बिना सोचे-समझे बोल देते हैं। एक बार किसी ने मुझसे कहा, 'तुम्हें देखकर एक डाक्यूमेंट्री याद आई, 'एनोरेक्सिया'।' मैंने बस मुस्कुरा कर जवाब दिया, 'मैं तो बस तेज़ मेटाबोलिज्म वाला हूँ।'"
OP ने भी यही कहा, "शरीर पर कोई भी टिप्पणी – मोटा हो या पतला – दोनों ही गलत हैं।" एक और मज़ेदार कमेंट आया – "कभी-कभी लोगों को उनकी ही बेवकूफी में और ज्यादा उलझाकर ही चुप कराया जा सकता है।"
निष्कर्ष: बॉडी शेमिंग का जवाब हिम्मत और ह्यूमर से दें
तो दोस्तों, इस कहानी से यही सीख मिलती है कि अगर कोई आपके शरीर या वजन का मज़ाक उड़ाए, तो घबराएं नहीं। कभी-कभी शांत चुप्पी, कभी ह्यूमर, और कभी सीधा जवाब – ये तरीके सामने वाले की बोलती बंद कर सकते हैं। और सबसे जरूरी – खुद को लेकर कोई हीनभावना न पालें। हर शरीर खूबसूरत है, बस नजरिया बदलना चाहिए।
आपका क्या अनुभव रहा है बॉडी शेमिंग को लेकर? क्या आपने कभी ऐसे सिचुएशन में स्मार्ट जवाब दिया है? कमेंट में जरूर बताइए!
मूल रेडिट पोस्ट: Ask me about my weight? Let's make it awkward.