ऑफिस में 'जादू' की छोटी सी बदला-लीला: जब सहकर्मी को टारोट कार्ड्स मिला विदाई-गिफ्ट में
ऑफिस की दुनिया वैसे ही कम रंगीन नहीं होती, लेकिन जब उसमें थोड़ा सा "जादू-टोना" और हमारी देसी तड़का लग जाए, तो कहानी वाकई लाजवाब बन जाती है! आज की कहानी है दो सहकर्मियों—एमी और मे—की, जिनकी दोस्ती, ईर्ष्या, और एकदम फिल्मी बदले की कहानी पढ़कर आप भी सोचेंगे: "अरे वाह, ये तो हमारे ऑफिस में भी हो सकता था!"
दोस्ती, विश्वास और छल की कहानी
कहानी शुरू होती है एक साल पहले, जब ऑफिस में नई-नई एमी आई थी। एमी और मे देखते-देखते गाढ़ी सहेलियां बन गईं। मे वैसे तो खुद को 'विच' यानी जादू-टोना में विश्वास रखने वाली मानती थी, लेकिन ऑफिस में इस बात को छुपाकर रखती थी, क्योंकि हमारे समाज की तरह वहां भी "क्या लोग कहेंगे" का डर रहता है। मेरी और मे की दोस्ती भी क्रिस्टल्स के शौक के चलते हुई थी।
अब एमी ने भी खुद को 'विच' बताया, और दोनों की जुगलबंदी ऐसी चली कि एक साथ स्पिरिचुअल अवेकनिंग क्लास तक पहुंच गईं। सबकुछ ठीक चल रहा था, लेकिन जैसे ही ऑफिस में छंटनी (layoff) की खबर आई, दोनों की नौकरी खतरे में पड़ गई। और यहीं से कहानी ने ऐसा मोड़ लिया कि जैसे किसी बॉलीवुड ड्रामे में ट्विस्ट आता है!
दोस्ती में दरार: पार्टी, बीमारी और बेइमानी
एक महीने पहले अचानक एमी और मे की बातचीत बंद हो गई। इतना कि मे कारपूल तक नहीं करती थी अगर एमी साथ हो। ऑफिस के कई लोग मुझसे पूछने लगे—"क्या हुआ?" लेकिन असली वजह किसी को नहीं पता थी। फिर एक दोस्त ने बताया कि एमी, मे के बारे में उल्टा-सीधा बोल रही है।
सच्चाई जानने की कोशिश में मैंने दोनों से बात की। मे ने बताया कि एक पार्टी में एमी, उसे अकेला छोड़कर किसी लड़के के साथ चली गई। मे को एपिलेप्सी (मिर्गी) है—ऑफिस में सब जानते थे—और अकेलेपन व टेंशन से उसे दौरा पड़ गया, अस्पताल जाना पड़ा। लेकिन एमी ने माफी तो दूर, उल्टा मे को ही दोषी ठहरा दिया!
अब तो एमी ने यू-टर्न लिया और मे के 'विच' होने को बुरा-भला कहने लगी, जैसे अचानक कोई धार्मिक कट्टरता आ गई हो। "शैतानी" और "अपवित्र" जैसे शब्दों का इस्तेमाल होने लगा। हमारे यहां भी तो कभी-कभी लोग अपनी गलती छुपाने के लिए धार्मिकता का चोला ओढ़ लेते हैं, है ना?
बदला—वो भी देसी तड़के के साथ!
फिर आया छंटनी का दिन और विदाई पार्टी। मैंने सबको गिफ्ट दिए लेकिन एमी के लिए स्पेशल गिफ्ट बनाया—एक "विच/विकन गिफ्ट बास्केट" जिसमें टारोट कार्ड्स, कुछ क्रिस्टल्स और सुगंधित मोमबत्तियां थीं। एमी का चेहरा देखकर लगा जैसे कोई भारतीय सास-बहू सीरियल में बहू के ताने सुन रही हो—मुस्कान तो थी, लेकिन अंदर ही अंदर गुस्से से लाल!
ऑफिस में बैठे सब समझ गए कि ये गिफ्ट असल में "मीठा बदला" है। जैसा कि एक Reddit यूज़र ने मजाकिया अंदाज में लिखा, "भाभीजी, जाते-जाते देवी का आशीर्वाद भी लेती जाइए!" और किसी ने कहा, "तीन गुना कर्मा मिलेगा, बहनजी!"—यानि जो करोगे, वही लौटकर आएगा।
कम्युनिटी के रिएक्शन और देसी तड़का
ऑनलाइन कम्युनिटी ने भी इस बदला-लीला का खूब मजा लिया। एक कमेंट में किसी ने कहा, "ऐसा बदला तो कोई हमारी चाची ही ले सकती हैं!" वहीं किसी और ने लिखा, "अगर आपके साथ वाला बीमार हो जाए तो इंसानियत यही कहती है कि उसकी मदद करें—एमी ने तो मानवता की सारी सीमाएं पार कर दीं।"
एक और मजेदार कमेंट था—"एमी को तो अब टारोट कार्ड्स में अपना भविष्य देखना चाहिए—शायद अब समझ आए कि दोस्ती और विश्वास क्या होते हैं!" एक यूज़र ने तो ये भी कहा, "सही किया! ऑफिस में ऐसे लोग बहुत मिलते हैं जो धर्म-जाति का झंडा लेकर घूमते हैं, असलियत में खुद ही सबसे बड़े ड्रामेबाज़ होते हैं।"
हमारी सीख: ऑफिस की दुनिया और छोटी-छोटी बदले की कहानियां
ऐसी कहानियां हमें सिखाती हैं कि ऑफिस में सिर्फ काम ही नहीं, इंसानियत और दोस्ती भी मायने रखती है। कभी-कभी किसी की बुराई का जवाब मीठे बदले से देना ज्यादा सुकून देता है। जैसे हमारे यहां कहा जाता है—"जो बोएगा, वही काटेगा!"
तो अगली बार अगर आपके ऑफिस में कोई "एमी" मिले, तो याद रखिए—कभी-कभी टारोट कार्ड्स से भी बड़ी सीख मिल जाती है!
आपके विचार?
क्या आपके ऑफिस में भी कभी ऐसा किस्सा हुआ है? या कभी आपने भी किसी को ऐसा मीठा बदला दिया हो? अपने अनुभव नीचे कमेंट में जरूर साझा करें—शायद अगली कहानी आपकी हो!
मूल रेडिट पोस्ट: I gave my religious coworker tarot cards as a going away gift.