ऑफिस में 'केविन' का कमाल: जब हर परेशानी का पैमाना एक ही हो गया
अगर आप कभी-कभी अपने ऑफिस के अजीब सहकर्मियों को देखकर सोचते हैं कि "ऐसे लोग सिर्फ हमारे यहाँ ही होते हैं", तो जनाब, आप गलत हैं! दुनिया भर के दफ्तरों में 'केविन' जैसे लोग मिल ही जाते हैं, जिनकी हरकतें ऑफिस की 'चाय की प्याली' में तूफ़ान ला देती हैं। आज हम एक ऐसे ही फ्रांसिसी ऑफिस की कहानी सुनाने जा रहे हैं, जहां केविन नाम का एक कर्मचारी, अपने अनोखे अंदाज और मासूम गलतियों के लिए कुख्यात है।
केविन की लाजवाब ऑफिस एंट्री: सिर्फ 'नमस्ते' से आगे कुछ नहीं!
हर दिन की शुरुआत होती है—"नमस्ते केविन! कैसे हो?" और जवाब, "ठीक हूं, आप?"। बस, इसके आगे दोनों तरफ़ से कोई चर्चा नहीं। लेकिन जैसे हमारे भारतीय दफ्तरों में चाय वाले की चाय से ज्यादा चर्चा उसकी बातें होती हैं, वैसे ही यहां केविन की चर्चा उसके काम से ज्यादा उसके कारनामों की होती है।
प्रक्रिया की दीवार और केविन की आंखों में अंधेरा
एक दिन ऑफिस में क्वालिटी कंट्रोल (गुणवत्ता निरीक्षण) चल रहा था। क्वालिटी की टीम (जिसमें सब महिलाएं थीं) ने केविन से पूछा, "क्या आपके पास कोई प्रक्रिया (Process) है?"
अब होता क्या—केविन सीधे-सीधे बोल देता है, "नहीं, काश होती!"।
क्वालिटी ऑफिसर ने फिर पूछा, "पक्का?"। वो दीवार पर टंगी प्रक्रिया की फाइल को घूर रही थी, जो ठीक केविन के पीछे थी।
फिर भी केविन का जवाब वही—"नहीं है!"
साथ में बैठे सुपरवाइजर 'एफ' का चेहरा देखने लायक था—एकदम जैसे किसी शादी में डीजे पर 'बद्रीनाथ की दुल्हनिया' की जगह 'भजन' चल जाए!
केविन का अनोखा काम: जब 'अपनी मर्जी' से बनती बिगड़ती है प्रोडक्शन
केविन की खासियत ये है कि पूरी फैक्ट्री में एक खास टैंक (संसाधन टैंक) को सिर्फ वही ऑपरेट करता है। उसका काम है तापमान वगैरह कंट्रोल करना, कच्चा माल मिलाना, वगैरह-वगैरह।
अब, कभी-कभी केविन का दिमाग 'जुगाड़ू इंजीनियर' की तरह चल पड़ता है—सोचता है, "आज थोड़ा तापमान बढ़ा दूं, देखते हैं क्या होता है!"
अब भैया, ऐसा करते-करते पूरा दिन की प्रोडक्शन कबाड़ा हो जाता है।
जैसे हमारे यहां के 'रामलाल इलेक्ट्रिशियन' बिना पूछे फ्यूज़ बदल दे, और फिर पूरा मोहल्ला अंधेरे में डूब जाए!
नई चीज़ की 'टेस्टिंग' और केविन का जादू
एक बार प्रोडक्शन के ट्रेनी 'बी' को नया इंग्रीडिएंट टेस्ट करना था। 'बी' ने केविन से कहा, "भैया, टेस्ट वाले टैंक में नया इंग्रीडिएंट डाल दो।"
अब, प्रक्रिया थी—कच्चा माल + एक्सीपिएंट + (कभी-कभी नया इंग्रीडिएंट)।
केविन ने क्या किया? एक्सीपिएंट ही निकालकर उसकी जगह नया इंग्रीडिएंट डाल दिया!
भैया, ऐसी गलती तो नये ट्रेनी से हो जाए तो समझ में आती है, पर केविन तो इसी काम के लिए रखा गया है!
अंत में रिजल्ट—बिल्कुल फुस्स पटाखा।
एक कमेंट करने वाले (u/LeahInShade) ने बड़ा सही लिखा, "पता नहीं कंपनी को केविन को रखने में कितना खर्चा आ रहा है, शायद बदलना मुश्किल है, तभी झेल रहे हैं!"
ऑफिस का 'केविन पैमाना' और कुछ मज़ेदार किस्से
ऑफिस में चलती थी 'केविन की स्केल'—यानि कोई अगर गुस्सा दिला दे तो बोला जाता, "भैया, तू आधा केविन हो गया है!"
अब सोचिए, हमारे यहां जैसे कोई बहुत गुस्सा दिला दे तो कहते हैं, "भाई, तू तो शर्मा जी से भी आगे निकल गया!"
इसी तरह, यहां 'केविन' पैमाना बन गया था।
एक दिन केविन बोला, "हमेशा तो ऑफिस में फॉर्म भरने के लिए मिलते हैं, कभी चाय पर मिलना चाहिए।"
अब, ऐसे ऑफहैंड कमेंट्स सुन के लोग अक्सर सोचते हैं—भैया, ये किस मिट्टी के बने हो?
ऑफिस की क्वालिटी टीम में सब महिलाएं थीं, और केविन उनके साथ व्यवहार में भी 'एहंकारी' था।
एक सहकर्मी ने बड़े चुटीले अंदाज में कहा, "ऐसा लगता है, जैसे केविन के बिना ऑफिस चल ही नहीं सकता!"
हमारे यहां भी ऐसे लोग मिल ही जाते हैं, जो बिना काम के भी 'स्थायी संपत्ति' बन जाते हैं।
आखिर क्यों नहीं जाता केविन?
अब सवाल उठता है—कंपनी उसे बदलती क्यों नहीं?
OP (मूल लेखक) कहता है, "मैं बॉस नहीं हूं, पर सालों से सुन रहा हूं कि केविन को हटाना है, पर हर बार कोई नई समस्या आ जाती है, और केविन फिर भी बना रहता है। उसके बॉस को लगता है, अब पहले से ठीक है।"
जैसे भारतीय दफ्तरों में कहते हैं, "अरे, पुराने लोग हैं, अपना नुकसान तो नहीं करते!"
निष्कर्ष: हर ऑफिस का एक 'केविन' होता है!
तो दोस्तों, चाहे फ्रांस हो या भारत, हर ऑफिस में एक न एक 'केविन' जरूर मिलता है—जो अपनी मासूम गलतियों, अजीब आदतों और ठेठ अंदाज से रोज़मर्रा की जिंदगी में हंसी-ठिठोली और कभी-कभी सिरदर्द भी बन जाता है।
आपके ऑफिस में भी कोई केविन है? या कोई ऐसा किस्सा जो आप शेयर करना चाहें?
नीचे कमेंट में जरूर लिखिए, और अगर कहानी पसंद आई हो तो अपने दोस्तों को भेजिए—क्या पता उनके ऑफिस में भी कोई छुपा हुआ केविन बैठा हो!
मूल रेडिट पोस्ट: Ce Kevin au travail