ऑफिस में कंपनी के क्रेडिट कार्ड चार्ज करना – एक मज़ेदार और सिरदर्दी अनुभव!
क्या आपने कभी सोचा है कि होटल के रिसेप्शन पर बैठे कर्मचारी किस तरह रोज़-रोज़ कंपनी के क्रेडिट कार्ड चार्ज करते हैं? भाई साहब, अगर आपको लगता है कि ये काम बड़ा आरामदायक है, तो ज़रा सुनिए ये कहानी – एकदम देसी अंदाज़ में। होटल की दुनिया अंदर से कितनी रंगीन और सिरदर्दी है, इसका अंदाजा ज़्यादातर मेहमानों को नहीं होता। यहाँ हर दिन, हर बुकिंग के साथ, एक नया ‘माइन्सवीपर’ खेल शुरू होता है – फर्क बस इतना है कि यहाँ बम फूटता नहीं, पैसे फँस जाते हैं!
कंपनी कार्ड चार्ज करना – रोमांच का नया नाम!
सोचिए, सुबह की चाय भी पूरी नहीं हुई और आपके सामने एक लंबी लिस्ट – "Arrivals List"। सबसे पहले, आपको ढूंढना है कि किस-किस की बुकिंग का बैलेंस 'ज़ीरो' है। जैसे ही ‘कंपनी बुकिंग’ दिखी, दिल की धड़कन बढ़ जाती है – "आज कुछ गड़बड़ न हो जाए!"
अब बारी आती है असली खेल की – बुकिंग पर क्लिक किया, सामने खुला रिज़र्वेशन का सारा ब्यौरा। फिर नोट्स में लिखा मिलता है – "कृपया PIBA कार्ड से पेमेंट लें"। मन ही मन सोचते हैं, "चलो, आज फिर वही झंझट!"
फिर नीचे जाकर कुल खर्च कॉपी करना – अरे भाई, अगर गलती से एक रुपया भी ऊपर-नीचे हो गया तो या तो कम पैसे आएंगे (चलो, बाद में संभाल लेंगे) या फिर ज़्यादा कटेंगे (फिर तो मैनेजर की क्लास पक्की!)। सबकुछ सही-सही कॉपी-पेस्ट करना किसी पुरानी हिंदी फिल्म के गाने की तरह जरूरी हो जाता है – "एक भी नोट गलत बजा, तो पूरी धुन बिगड़ जाएगी!"
"I Want To..." – सिस्टम का वो रहस्यमय बटन
अब सिस्टम में जाना – "I Want To..." बटन पर क्लिक करना पड़ता है, और कोई नहीं जानता कि ये बटन है तो क्यों! देसी ऑफिसों में जैसे बिना वजह फाइलें घूमती रहती हैं, वैसे ही ये बटन भी बस क्लिक होते रहता है। फिर बिलिंग विंडो खोलो, और जैसे ही पेमेंट पोस्ट करने जाओ – सिस्टम अपने आप ‘Cash Refund’ पर डिफॉल्ट कर देता है! सोचिए, जैसे कोई ग्राहक कह दे – "भैया, बिना पैसे दिए ही रिफंड कर दो।"
अब भागदौड़ शुरू – जल्दी से बिजनेस कार्ड की विंडो चुनो, वरना कंपनी का पैसा हवा में उड़ जाएगा। फिर एक-एक कदम सोच-समझकर, जैसे घर में शादी की लिस्ट बनाते हैं, वैसे ही करना पड़ता है – कहीं कोई गलती न हो जाए! आखिर में "Apply Payment" दबाकर, कंप्यूटर की मेहरबानी का इंतजार करो – लगता है जैसे 1998 वाला कंप्यूटर दोबारा चल पड़ा हो!
कम्युनिटी के अनुभव – हँसी, गुस्सा और कानून का डर
रेडिट पर एक सज्जन (u/sdrawkcabstiho) ने तो अपनी कहानी और भी मजेदार अंदाज में सुनाई। वे कहते हैं – "सबसे मजेदार वो बुकिंग होती है जिसमें नोट लिखा रहता है – 'CREDIT CARD PROVIDED FOR GUARANTEE ONLY. DO NOT CHARGE CARD.' ऊपर से जो कार्ड दिया जाता है, वो तो फर्जी नंबर निकलता है – 5656 5656 5656 5656! अब बताइए, ऐसे में गारंटी का क्या मतलब?"
उन्होंने तो यहां तक लिखा कि महीनों इस कंपनी से लड़ते रहे कि असली कार्ड दो, लेकिन वो हर बार टाल जाते। यहां तक कि कनाडा का कानून भी भेजा – "गलत कार्ड देना दस साल की सजा है!" – पर सामने वाले को कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार, उन्होंने अपने मैनेजर से पूछकर ये नियम बना दिया – "अगर कार्ड से पहली रात का पैसा तुरंत नहीं कटा, तो बुकिंग कैंसिल!" अब मजा आ गया, जैसे हिंदी फिल्मों में हीरो आखिर में अपना हिसाब बराबर करता है।
एक और यूज़र (u/krupseth) ने लिखा – "Opera Cloud सिस्टम सीखने में तो पसीने छूट गए, लेकिन जब बैच डिपार्चर और बैच सीसी ऑथ आ गया, तो लगा जैसे UPSC का पेपर पास कर लिया!"
हर दिन वही दोहराव – उबासी, तनाव और थोड़ा सा ड्रामा
अब सोचिए, यही काम आपको दिन में 10 से 40 बार करना पड़े – हर बार वही लिस्ट, वही कॉपी-पेस्ट, वही कंप्यूटर की सुस्ती। कुछ गलती हो गई तो या तो कम पैसे आएंगे (चलो, थोड़ा बहुत तो चलता है), या ज़्यादा कट गए तो मैनेजर के सामने सफाई दो। रोज-रोज यही दोहराव, जैसे गाड़ी में बार-बार रिवर्स-गियर लगाना – और ऊपर से हर बार डर कि कहीं कोई बम ना फूट जाए!
कई बार तो लगता है, जैसे यह सब कोई मज़ाक है – लेकिन असल में यह हर रिसेप्शनिस्ट की सच्चाई है। हमारे यहाँ भी अक्सर ऐसा होता है – कोई बड़ा अफसर होटल में आने वाला है, उसकी कंपनी का कार्ड है, और नोट लिखा है – "बिल बिलकुल मत भेजना, सिर्फ गारंटी है!" अब इसमें कर्मचारी बेचारा क्या करे? ऊपर से सिस्टम ऐसा कि गलती का डर हमेशा सिर पर!
निष्कर्ष – हँसी के साथ थोड़ी सीख
तो साथियों, कंपनी के क्रेडिट कार्ड चार्ज करना होटल या ऑफिस के फ्रंट डेस्क पर बैठे कर्मचारी के लिए रोज़ का ‘माइन्सवीपर’ है – फर्क बस इतना कि यहाँ हर गलत कदम पर बॉस की डांट और मेहमान की शिकायत मिलती है। अगर आप कभी रिसेप्शन पर जाएं और कर्मचारी को थोड़ा परेशान या थका हुआ देखें, तो समझ जाइए – शायद उन्होंने अभी-अभी कंपनी कार्ड का 'महा-युद्ध' लड़ा है!
अगर आप भी ऐसे किसी अनुभव से गुज़रे हैं, तो कमेंट में जरूर बताएं – आपकी कहानी भी शायद किसी और की मुस्कान बन जाए! और हाँ, अगली बार होटल बुक करें तो असली कार्ड ही दें – वरना रिसेप्शनिस्ट की आत्मा आपको दुआ नहीं, बद्दुआ देगी!
मूल रेडिट पोस्ट: Charging company cards nightmare