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ऑफिस की राजनीति: जब बॉस को उनकी ही चाल उल्टी पड़ गई

कार्यालय में सहकर्मियों की रिपोर्ट को sabotaging करते हुए एक चालाक सामाजिक चढ़ाई करने वाले का कार्टून-शैली चित्रण।
यह जीवंत कार्टून-3D छवि एक चालाक सामाजिक चढ़ाई करने वाले की शक्ति की लालसा को दर्शाती है, जो सहकर्मियों को कमजोर करने और कार्यस्थल में नियंत्रण पाने की उसकी चालाकी को उजागर करती है।

अगर आप कभी किसी ऐसे ऑफिस में काम कर चुके हैं जहाँ लोग पोस्ट पाने या बॉस की चमचागीरी के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं, तो यह कहानी आपको ज़रूर अपनी लगेगी। ऑफिस की राजनीति, जलन, और "ऊपर चढ़ने" की होड़ – ये सब हमारे भारतीय दफ्तरों का भी हिस्सा हैं। आज की कहानी Reddit पर वायरल हुई एक ऐसी घटना की है, जिसे पढ़कर आपको मज़ा भी आएगा और थोड़ी राहत भी मिलेगी कि कभी-कभी चालाकी पर भी अक्ल भारी पड़ जाती है।

राजनीति की रानी – और उसकी कमज़ोरियाँ

हर ऑफिस में एक न एक ऐसी 'राजनीति की रानी' होती है, जो सिर्फ अपने फायदे के लिए लोगों को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ती। इस कहानी में भी एक ऐसी ही महिला थीं – बेहद महत्वाकांक्षी, चालाक, लेकिन असल काम में ज़ीरो। उनके कारनामे सुनकर आपको अपने ऑफिस की याद आ जाएगी – रिपोर्ट्स छपने से रोकना, किसी को झूठे आरोप में फँसाना, और ऊपर चढ़ने के लिए किसी भी हद तक जाना। ऐसे लोग बड़े अफसोस की बात है, अक्सर प्रमोशन भी पा जाते हैं, जैसे हमारे यहाँ "जुगाड़" से लोग DM या Manager बन जाते हैं।

लेकिन असली कहानी तब शुरू हुई, जब पोस्ट के लेखक की बॉस अचानक बीमार हो गईं और ये राजनीति की रानी उनकी जगह बैठ गईं। अब सत्ता मिल गई थी, तो घमंड भी आसमान छूने लगा।

आदेश का जवाब – कानून से!

नए बॉस बनते ही उन्होंने हमारे लेखक से एक रिपोर्ट तुरन्त मांगी, वो भी समय सीमा से पहले। लेखक ने बड़े अदब से कहा – "कानून के मुताबिक हमारे पास 48 घंटे हैं।" लेकिन बॉस तो बॉस, कहने लगीं – "कानून-वून छोड़िए, अब मैं आपकी बॉस हूँ, मुझे ASAP चाहिए!" अब भारत में भी कई बार होता है – नये बॉस आते ही सब पर रौब झाड़ना शुरू।

लेकिन असली चाल तो अब चली गई! लेखक ने सोचा – "ठीक है, माँग तो पूरी करनी है।" उन्होंने रिपोर्ट बना तो दी, मगर इतना तकनीकी और गूढ़ भाषा में, कि बॉस के पल्ले ही कुछ न पड़े! मेडिकल रिपोर्टिंग, anatomical references, तकनीकी शब्द… जितना उलझा सकते थे, उतना उलझा दिया। जैसे हमारे यहाँ वकील लोग कोर्ट में बड़ी-बड़ी धारा घुमा देते हैं, ताकि सामने वाला कन्फ्यूज हो जाए।

चाल उल्टी पड़ी – और चैन की बंसी!

अब मज़ा देखिए – बॉस उस रिपोर्ट को समझ ही नहीं पाईं। न तो साइन करने की हिम्मत, न ऊपर शिकायत करने की! अगर शिकायत करती, तो सबको पता चल जाता कि खुद समझ नहीं पा रहीं। एक कमेंट में किसी पाठक ने लिखा, "ऐसी स्थितियों में सिर्फ नियम का पालन ही काफी है, बाकी बेवकूफी खुद-ब-खुद सामने आ जाती है।" सच ही कहा, कभी-कभी 'मालिक' को उनकी ही भाषा में जवाब देना पड़ता है।

आखिरकार, बॉस ने अपनी इज्ज़त बचाने के लिए पूरी रिपोर्ट डिलीट कर दी और खुद एक आसान सी रिपोर्ट बना दी – वही घिसी-पिटी भाषा, जिसमें कोई गहराई नहीं। मज़ेदार बात ये रही कि उसके बाद उन्होंने लेखक को कभी परेशान नहीं किया। लेखक को भी थोड़ी "शैतानी" करने की खुशी तो हुई, लेकिन असली सुकून इस बात का था कि बाकी महीने शांति से काम करने को मिला।

एक और कमेंट ने लिखा, "ऐसा प्रमोशन तो हर जगह होता है – जिसे काम नहीं आता, वही ऊपर पहुँच जाता है।" और वाकई, हमारे यहाँ भी 'पीटर प्रिंसिपल' खूब चलता है – लोग तब तक प्रमोट होते रहते हैं, जब तक वे किसी ऐसे पद पर नहीं पहुँच जाते जहाँ उन्हें कुछ समझ ही नहीं आता!

भारतीय दफ्तरों में ऐसे किस्से आम हैं

अगर आप सोच रहे हैं कि ये सब बस विदेशी दफ्तरों में होता है, तो आप गलत हैं। हमारे यहाँ भी बॉस के आदेश और राजनीति, दोनों का जवाब सिर्फ अक्ल से ही दिया जा सकता है। चाहे रिपोर्ट लिखना हो, या मीटिंग में जवाब देना – 'सही तरीके' से काम करना और नियमों का पालन करना ही सबसे बड़ी चालाकी है। कई बार चापलूसी, जुगाड़ और राजनीति वाले लोग ऊँचाई पा जाते हैं, लेकिन असली जीत समझदारी वालों की ही होती है।

एक पाठक ने बड़ी प्यारी बात कही – "ये चालाकी नहीं, समझदारी है। और जो ऐसे लोगों को उनके ही जाल में फँसा दे, वो तो असली हीरो है!"

निष्कर्ष – आपकी राय क्या है?

इस कहानी से एक सीख तो मिलती है – राजनीति और चमचागीरी से दूर रहना ही अच्छा है। अगर कभी ऐसे बॉस से सामना हो जाए, तो नियमों और अपनी अक्ल का इस्तेमाल करें। और हाँ, कभी-कभी थोड़ा 'मालिशियस कम्प्लायंस' यानी अजीबोगरीब तरीके से नियम मानना, भी बड़े काम आ सकता है।

क्या आपके साथ भी कभी ऐसा कोई वाकया हुआ है? या आपके ऑफिस में भी कोई "राजनीति की रानी/राजा" है? कमेंट में अपने अनुभव ज़रूर साझा करें – शायद अगला किस्सा आपका ही हो!


मूल रेडिट पोस्ट: Kind of a malicious compliance: social climber on a power trip wanted a report ASAP