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ऑफिस की टाई: जब ‘फैशन’ बना विरोध का हथियार

सूट और टाई पहने एक आदमी की एनीमे चित्रण, विषाक्त कार्य वातावरण को दर्शाता है।
इस एनीमे शैली की चित्रण के साथ कॉर्पोरेट संस्कृति की दुनिया में गोताखोरी करें, जिसमें एक आदमी सूट और टाई में है, जो मेरे पहले नौकरी के अनुभव की तनाव को व्यक्त करता है। जानें कि कैसे एक औपचारिक ड्रेस कोड ने विषाक्त वातावरण में काम करने की चुनौतियों को छिपाया है, नवीनतम ब्लॉग पोस्ट "यह एक टाई है" में।

अगर आपके ऑफिस में कभी-कभी अजीबो-गरीब नियम बनते हैं, तो यकीन मानिए, आप अकेले नहीं हैं। ऑफिस की दुनिया में ऐसे कई किस्से हैं जहाँ नियमों का पालन करना ही विरोध का सबसे मजेदार तरीका बन जाता है। आज की कहानी भी कुछ ऐसी ही है – जहाँ एक साधारण सी टाई, पूरे ऑफिस की चर्चा का विषय बन गई!

टाई का आतंक: जब नियमबाज़ी बनी सिरदर्द

हमारे देश में भी ऑफिस ड्रैस को लेकर अक्सर कड़े नियम होते हैं – कभी फॉर्मल शर्ट, कभी सफेद जुराबें, तो कभी ‘कॉलर वाला कुर्ता पहनना जरूरी’ जैसी बातें सुनने को मिलती हैं। पश्चिम में भी कुछ अलग नहीं। Reddit पर एक यूज़र ने अपनी पहली नौकरी का दिलचस्प किस्सा सुनाया, जहाँ ऑफिस का कोई ऑफिशियल ड्रेस कोड नहीं था, लेकिन सब लोग फॉर्मल कपड़े पहनते थे – सूट, टाई, और सलीकेदार जूते।

अब टीम में एक नया आईटी डेवलपर आया। काम में बेहद तेज, व्यवहार में शानदार, लेकिन उसके गले में टाई नहीं थी! बस, ऊपर बैठे किसी अफसर को ये नागवार गुज़रा और मैनेजर ने फरमान सुना दिया – “भैया, टाई पहनना जरूरी है।”

‘मालिक का हुक्म, गुलाम का जवाब’ – पीली टाई की जंग

अब ये जनाब, जिनका मन वैसे ही कंपनी के माहौल से उचट चुका था (सुना है, वे नई नौकरी पाने वाले थे), उन्होंने नियम का पालन तो किया, लेकिन अपने ही अंदाज में। अगले दिन आए तो गले में चमकीली पीली टाई, जिस पर बड़ा सा कार्टून कैरेक्टर छपा था – सोचिए, ऑफिस में सबका क्या हाल हुआ होगा!

इन साहब ने पूरे ऑफिस का चक्कर लगाकर, हर केबिन में जाकर सबको अपनी ‘एलीगेंस’ दिखा डाली। उनके चेहरे पर जो मुस्कान थी, उससे साफ था – “लो भाई, पहन ली टाई!” और फिर कभी उन्होंने टाई नहीं पहनी।

यहाँ एक मजेदार कमेंट याद आता है – किसी ने लिखा, “हमारे ऑफिस में भी टाई जरूरी थी, तो मैंने स्पाइडरमैन, बग्स बनी जैसी टाई जमा ली। कोई टाई कभी कपड़ों से मैच ही नहीं करती थी!” एक और कमेंट में किसी ने अपनी मछली के आकार वाली टाई का किस्सा सुनाया, और किसी ने तो पुराने कारपेट से टाई बना डाली थी। सच में, ऐसे अजीब-गरीब जुगाड़ हमारे देसी ऑफिसों में भी खूब चलते हैं – याद कीजिए, ‘फंकी फ्राइडे’ की शर्ट्स या ‘थीम डे’ वाली मस्ती!

जब 10 मिनट का काम बना लाखों की डील

अब असली ट्विस्ट आया। हमारे टाई वाले इंजीनियर साहब ने इस्तीफा दे दिया, लेकिन HR ने याद दिलाया – “भैया, कंपनी ने जो ट्रेनिंग कराई थी, अगर एक साल के अंदर छोड़ोगे तो उसके पैसे लौटाने पड़ेंगे।” महंगी ट्रेनिंग थी, जेब पर भारी पड़ना तय था।

इसी बीच एक बड़ा मैनेजर आया, बोला – “देखो, एक सीक्रेट प्रोजेक्ट है। सॉफ्टवेयर में थोड़ा बदलाव करना है, ऑफिस के बाहर काम करोगे, किसी को बताना नहीं, यहाँ तक कि अपने मैनेजर को भी नहीं। बदले में ट्रेनिंग की रकम माफ कर देंगे।” मैनेजर को लगा, 4-5 दिन का झंझट है, बराबर का हिसाब हो जाएगा।

लेकिन असलियत? असलियत ये थी कि कोड में कोई बड़ा बदलाव था ही नहीं! बस एक टेबल में एक ‘फ्लैग’ बदलना था – कुल जमा 10 मिनट का काम! इंजीनियर ने मुस्कुराकर ‘डील’ कर ली और 10 मिनट में कंपनी का लाखों का ‘बोझ’ उतार दिया।

OP ने खुद लिखा – “जब उसने मुझे काम समझाया, मैंने कहा – ‘भाई, ये तो बस एक छोटा सा फ्लैग बदलना है!’ उसने मुस्कुराकर सिर हिलाया – ‘हाँ।’ मैंने कहा – ‘वाह, कमाल कर दिया!’” Reddit पर एक कमेंट में किसी ने लिखा, “कंपनी वालों को लगा, उन्हें 5 दिन की फ्री मेहनत मिल गई, और इंजीनियर को ट्रेनिंग का पैसा माफ!” किसी ने तो इसे ‘आईटी का जादू’ भी कहा – जब काम की असली वैल्यू सिर्फ दिखावे से बनती है।

ड्रेस कोड का ड्रामा और देसी दफ्तरों की यादें

ऐसे किस्से हमारे यहाँ भी कम नहीं! कोई ‘फॉर्मल शूज़’ न पहनने पर बॉस की डाँट, कोई ‘कॉलर वाला कुर्ता’ न पहनने पर HR का नोटिस, और कभी-कभी तो महिला कर्मचारियों के लिए भी अजीब नियम – जैसे एक कमेंट में किसी ने लिखा, “मेरे मैनेजर ने मुझे जूते के लिए टोका, जबकि वही जूते वो खुद पहनते थे!”

हमारे दफ्तरों में भी, कुछ लोग ऐसे नियमों का बड़ा मजेदार जवाब देते हैं – जैसे ‘डोडी टाई डे’, जिसमें सब सबसे अजीब टाई पहनकर आते हैं, या कोई टीचर हर दिन नई-नई कार्टून टाई पहनकर बच्चों का मन बहलाता है। एक कमेंट के मुताबिक, “कोविड के बाद तो टाई जैसे ड्रेस कोड लगभग गायब ही हो गए!”

अंत में: ऑफिस की राजनीति में ह्यूमर का तड़का जरूरी है!

दोस्तों, ऑफिस के नियम-कायदे कभी-कभी जरूरी होते हैं, लेकिन जब ये बेमतलब या तानाशाही हो जाएँ, तो थोड़ा-सा मजाक, थोड़ी-सी चालाकी और ज़रा-सी रचनात्मकता बहुत काम आ सकती है। चाहे वो चमकीली टाई पहनना हो या 10 मिनट में लाखों बचा लेना – असली जीत उसी की होती है, जो सिस्टम को उसकी ही भाषा में मात दे दे!

अब आपकी बारी – क्या आपके ऑफिस में भी कभी ऐसे अजीब नियम बने हैं? आपने कभी ऐसे नियमों का जवाब कैसे दिया? अपनी मजेदार कहानियाँ कमेंट में जरूर साझा करें – आखिर, हर दफ्तर में छुपे होते हैं कुछ ‘फैशन क्रांतिकारी’ और ‘जुगाड़ू इंजीनियर’!


मूल रेडिट पोस्ट: It's a tie