ऑफिस के 'झंकी' मैनेजर को मिली मजेदार छोटी बदला-कहानी
क्या आपने कभी अपने ऑफिस में ऐसे मैनेजर के साथ काम किया है, जो काम कम और अकड़ ज़्यादा दिखाता हो? सोचिए, वो दिन जब हर काम का बोझ आपके सिर और आपके मैनेजर का रौब आसमान छूता हो। आज मैं आपको ऐसी ही एक कहानी सुनाने जा रहा हूँ, जो 1980 के दशक की है, जब कंप्यूटर में फ्लॉपी डिस्क और 1 मेगाबाइट मेमोरी ही बड़ा कमाल मानी जाती थी। उस दौर में भी ‘झंकी’ जैसे मैनेजर अपनी चालाकी और अकड़ से पीछे नहीं रहते थे।
अब ज़रा सोचिए, अगर ऐसे मैनेजर को उसकी ही चाल में फँसा दिया जाए, तो कैसा लगेगा? यही हुआ एक ऑफिस में, और टीम ने अपने ‘झंकी’ मैनेजर को बिल्कुल देसी अंदाज़ में सबक सिखाया।
झंकी मैनेजर और ऑफिस की राजनीति
ऑफिस में मैनेजर ‘झंकी’ साहब किसी बड़े नवाब से कम नहीं थे। खुद कोई काम नहीं करते, लेकिन दूसरों को आदेश देने में हमेशा आगे। एक बार टीम ने उनसे सॉफ्टवेयर का नया वर्जन फ्लॉपी डिस्क में कॉपी करने का सीधा-सा काम बोला। झंकी ऐसे पीछे हटे मानो सांप पकड़ने को कह दिया हो। बोले – “मैं अभी किसी को भेजता हूँ।” हर बार यही बहाना!
ऐसे में टीम का गुस्सा फूटना लाजमी था। लेकिन गुस्सा जताना, वो भी बॉस के सामने, नौकरी पर बन आती है। ऐसे में टीम ने अपना गुस्सा निकालने के लिए एक देसी जुगाड़ निकाला।
नारियल वाला ‘झंकी’ और देसी बदला
टीम के एक सदस्य के पास नारियल से बनी एक नकली, छोटी-सी ‘सिकुड़ी हुई’ सिर की मूर्ति थी – कुछ वैसी जैसी फिल्मों में जादू-टोना दिखाते हैं। बस, उसी मूर्ति के पीछे एक पोस्ट-इट चिपका दिया, जिस पर लिखा था – “झंकी”। यह मूर्ति ऑफिस में हंसी-मजाक का हिस्सा बन गई।
ये बदला बहुत छोटा था, लेकिन मजा तो तब आया, जब झंकी साहब को इसकी भनक लग गई। वो गुस्से में लाल-पीले होते, सीधे उस कलेक्शन को जब्त करने पहुँच गए। टीम को खबर मिल गई, और सब तैयार।
जैसे ही झंकी ने मूर्ति उठाई और घुमाई, अब वहां एक नया नोट चिपका था – “घुमाओ और अपना चेहरा देखो।” बस, झंकी साहब भौचक्के रह गए! उनका चेहरा गुस्से से टमाटर जैसा लाल – और टीम हँसी रोक नहीं पाई।
कम्युनिटी की राय: ‘झंकी’ के तिलमिलाने पर सबकी हंसी
रेडिट पोस्ट के कमेंट्स पढ़कर लग गया, ऐसी हरकतें सिर्फ इंडिया में नहीं, हर जगह होती हैं! एक पाठक ने लिखा - “अगर नोट हटा देते तो मामला बहुत आसानी से निपट जाता, लेकिन उसे अपनी गलती में फँसने देना – यही असली आर्ट है।” सोचिए, जैसे हमारे यहाँ कोई बॉस अपनी ही चाल में उलझ जाए!
दूसरे ने तंज कसा – “झंकी को हर बात अपनी बेइज़्ज़ती क्यों लगती है? नारियल की सिर वाली मूर्ति तो वैसे भी हर किसी को हँसा देती!” ये बात बिल्कुल वैसी है, जैसे ऑफिस में चायवाले के मजाक पर बॉस खुद ही चिढ़ जाए और बाकी टीम को उससे और मजा आए।
एक और मजेदार कमेंट था – “80 के दशक में 1MB मेमोरी! अरे भाई, तब तो हमारे यहाँ 128kb में ही कंप्यूटर चल जाता था।” सच है, उस दौर के कंप्यूटर और आज के मोबाइल की तुलना करें, तो लगता है, जैसे बैलगाड़ी और मेट्रो की बात कर रहे हों।
देसी दफ्तरों में ऐसे ‘झंकी’ हर जगह!
अगर आप सोच रहे हैं कि ऐसा सिर्फ विदेशों में होता है, तो ज़रा अपने आसपास देख लीजिए। हर दफ्तर में एक न एक ‘झंकी’ जरूर मिल जाएगा – जो खुद काम न करे, लेकिन दूसरों को हुक्म जरूर चलाए। उस पर भी अगर उसकी पोल खुल जाए, तो बिलकुल इसी तरह गुस्से से लाल हो जाता है।
ऐसे में टीमवर्क की यही खूबसूरती है – जब सब मिलकर थोड़ी-सी शरारत से माहौल हल्का कर दें और बॉस को भी आईना दिखा दें। यह कहानी हमें यही सिखाती है – जब समस्या का हल सीधा न दिखे, तो थोड़ा हास्य और चतुराई ही सबसे अच्छा जवाब है।
निष्कर्ष: हँसी-मजाक में भी छुपा है बड़ा सबक
दोस्तों, ऑफिस का माहौल तनाव भरा हो सकता है, लेकिन थोड़ी-सी समझदारी, चुटकीलेपन और टीम की एकता से बड़े से बड़ा ‘झंकी’ भी अपनी जगह पर आ सकता है। इस तरह के हल्के-फुल्के बदले न सिर्फ मन हल्का करते हैं, बल्कि टीम को भी जोड़ते हैं।
अब आप बताइए, क्या आपके ऑफिस में भी कभी किसी ‘झंकी’ को ऐसे मजेदार तरीके से सबक सिखाया गया है? अपनी कहानियाँ कमेंट में जरूर साझा करें – शायद अगली पोस्ट आपकी कहानी पर ही हो!
मूल रेडिट पोस्ट: Small payback to slimy manager