ऑफिस की 'केविना' – जिसकी भूलने की आदत ने सबका दिल जीत लिया!
ऑफिस की दुनिया अपने-आप में एक अजब-गजब मेला है। यहाँ हर किस्म के लोग मिलते हैं – कोई तेज़-तर्रार, कोई चुस्त, तो कोई ऐसा जो भूलने के मामले में "घोंचू" कहलाता है। पर क्या आपने कभी सोचा है कि कभी-कभी यही लोग अपनी भोली-भाली आदतों से ऑफिस का माहौल ही बदल देते हैं? आज ऐसी ही एक 'केविना' की कहानी है, जिसने अपनी भूलने की आदत से सबको चौंका दिया, लेकिन पूरे ऑफिस का दिल भी जीत लिया।
जब केविना की हरकतों ने सबको हँसा-हँसा कर लोटपोट कर दिया
हमारे यहाँ एक रिसेप्शनिस्ट थीं – केविना। उम्र करीब 38-39, स्वभाव से बेहद दयालु और मदद को हमेशा तैयार। पर एक ही समस्या – उनका दिमाग कभी-कभी ऐसे उड़ता था जैसे पतंग बिना डोर के। कभी दरवाज़ा खींचना हो तो धक्का देना, कभी छुट्टी के लिए HR की बजाय किसी और को पूछ बैठना। एक बार तो कंप्यूटर लॉक हो गया, हड़बड़ाहट में IT को फोन कर दिया। IT वाले के आने तक खुद ही पासवर्ड डालकर काम शुरू कर दिया – IT वाला बस देखता रह गया!
अब सोचिए, ऐसे इंसान के साथ काम करना कितना मजेदार – और कभी-कभी सर पकड़ लेने वाला – हो सकता है। मेरे विभाग में वैसे भी सब अपने-अपने काम के लिए बड़े सख्त और नखरेबाज़ थे। जब मुझे अपना काम किसी और को सिखाना था, तो सबने कन्नी काट ली। सबको डर था – कहीं हमारी खिचाई न हो जाए!
केविना का जज़्बा: कमज़ोरी को बनाया अपनी ताकत
लेकिन केविना! उसने तुरंत हाँ कर दी। एक बड़ा सा नोटबुक और पेन लेकर आई और बोली, "आप जो सिखाएँ, मैं सब लिखूंगी।" मैंने देखा, उसे अपनी "केविनाइटिस" यानी भूलने की बीमारी का पूरा अहसास था। वो हर बात नोट करती, स्क्रीन के चित्र बनाती, बटन कहाँ-कहाँ दबाना है – सब चिह्नित करती। जब खुद से काम करती, तो हर कदम बोल-बोलकर करती – जैसे स्कूल में पढ़ाई हो रही हो।
कई बार जब वह नोटबुक के बिना काम करने की कोशिश करती, तो सवालों की झड़ी लगा देती – "माफ कीजिए, बार-बार पूछती हूँ, पर सही करना है!" मुझे भी मज़ा आने लगा! उसकी ईमानदारी देख कर लगता, काश हर कोई ऐसी लगन से सीखे।
ऑफिस के 'कड़क साथियों' की भी हवा टाइट
केविना जब मेरी जगह काम करने लगी, तो ऑफिस के बाकी लोग भी हैरान। वे अक्सर नए-नए काम देकर सब्स्टीट्यूट की परीक्षा लेते थे, और जब जवाब न मिले तो "मालूम नहीं, एरिन (OP) तो कर लेती थी!" कहकर पल्ला झाड़ लेते। लेकिन केविना हर बार अपनी नोटबुक निकालती, हर निर्देश नोट करती और बार-बार पूछती, "क्या यही तरीका है?" अगर फिर भी न समझ आए, तो साफ़ कह देती – "मुझे नहीं आता, सिखा दीजिए!"
अब हुआ ये कि कोई उसकी मेहनत और ईमानदारी पर सवाल नहीं उठा सका। धीरे-धीरे सबको यह समझ आ गया कि अगर केविना से काम करवाना है, तो खुद भी साफ-साफ बताना पड़ेगा। लोगों ने गोलमोल बातें छोड़कर निर्देश देना शुरू किया – और ऑफिस का माहौल ही बदल गया।
कम्युनिटी की राय: केविना जैसी ईमानदारी सबमें हो!
रेडिट पर इस कहानी को पढ़कर बहुत लोगों ने दिल से तारीफ की। एक यूज़र ने लिखा – "काश, हर केविन/केविना इतनी तैयारी और ईमानदारी दिखाए, तो दुनिया की आधी दिक्कतें ऐसे ही सुलझ जाएँ।" एक और ने कहा, "उसकी आत्म-जागरूकता ग़ज़ब है! शायद हमें खुद से भी ऐसा ईमानदार होना चाहिए।" कोई बोला – "यही लोग SOP (Standard Operating Procedure) बना देते हैं, जिससे नए लोग भी काम आसानी से सीख सकते हैं।"
किसी ने मज़ाक में कहा, "इस केविनाइटिस का नाम 'मार्गरेट' रखा जाए!" एक और पाठक ने लिखा – "मैं भी भूलने वाला हूँ, लेकिन केविना की तरह मेहनत करके एक दिन सबको दिखाऊँगा।"
इस सबमें सबसे बड़ी बात ये रही कि केविना की मेहनत और सच्चाई की वजह से न ऑफिस वालों को शिकायत रही, न मुझे। उल्टा, अब सबको यह समझ आ गया कि ईमानदारी और कोशिश से कोई भी कमज़ोरी ताकत बन सकती है।
निष्कर्ष: हमारी केविना – सबकी फेवरिट
हमारे यहाँ कहा जाता है – "कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।" केविना ने यही साबित कर दिया। भले ही लोग उसे भूलक्कड़ समझते थे, लेकिन उसकी मेहनत और ईमानदारी ने सबका दिल जीत लिया। ऑफिस के उन साथियों को भी सबक मिल गया, जो हर काम दूसरों पर डालते थे। एक पाठक ने तो लिखा, "काश, हर ऑफिस में ऐसी प्यारी केविना हो!"
तो दोस्तों, अगली बार जब कोई भूलने वाला साथी मिले, तो उसे हल्के में मत लीजिए। हो सकता है, उसकी कोशिश और सच्चाई से ऑफिस का माहौल ही बदल जाए!
आपके ऑफिस में भी कोई 'केविना' है? या कभी ऐसी कोई घटना हुई है? नीचे कमेंट में जरूर बताइए – आपकी कहानी भी किसी का दिन बना सकती है!
मूल रेडिट पोस्ट: A Kevina who was a blessing