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ऑफिस की ‘क्वीन बी’ और स्निकर्स की मीठी सजा: जब रेस्पशनिस्ट को नहीं मिली टॉफी

छोटे व्यवसाय में शक्ति का अनुभव करने वाली रिसेप्शनिस्ट, एक सिनेमाई कार्यालय दृश्य में तनाव उत्पन्न कर रही है।
इस सिनेमाई चित्रण में, शक्ति का अनुभव करने वाली रिसेप्शनिस्ट अपने स्थान पर खड़ी है, जो छोटे व्यवसाय के माहौल की तनाव और गतिशीलता को दर्शाती है। जानें कि किस तरह उसकी हरकतों ने अप्रत्याशित परिणामों को जन्म दिया हमारे नवीनतम ब्लॉग पोस्ट में!

अगर आपने कभी हिंदुस्तानी दफ्तरों में काम किया है, तो आपको 'ऑफिस की रानी' या 'सबकी मम्मी' जैसी कोई न कोई शख्सियत ज़रूर मिली होगी, जो हर बात में टोकती है, दूसरों पर रौब झाड़ती है और लगता है जैसे बिना उसके ऑफिस चल ही नहीं सकता। पर क्या हो, जब यही शख्स अपने लालच और चालाकी का शिकार खुद बन जाए? आज की कहानी है एक ऐसी ही रेस्पशनिस्ट 'Karen' (यहाँ नाम काल्पनिक है) की, जिसने टॉफी के लालच में अपनी इज्जत दांव पर लगा दी!

ऑफिस का रंगमंच: हर कोई अपनी जगह, पर 'Karen' सबसे ऊपर!

कहानी एक छोटे व्यवसाय की है, जहाँ लगभग 10 लोग ऑफिस में, 4 वर्कशॉप में और करीब 50 फील्ड वर्कर काम करते थे। लेखा विभाग के प्रभारी (यानी हमारे नायक) के नीचे दो लोग थे, और वे सीधे मालिक को रिपोर्ट करते थे। रेस्पशनिस्ट Karen, जो खुद को मालिक की सबसे खास मानती थी क्योंकि वह शुरू से साथ थी, ऑफिस में सब पर हुक्म चलाती थी। अगर कोई 2 मिनट भी लेट हो जाए, तो उसकी घड़ी की तरफ इशारा और आँखों में तिरस्कार! अगर मालिक कोई काम कहे, तो ऐसी अकड़ के साथ बताना, जैसे खुद बॉस हो।

धीरे-धीरे माहौल ऐसा हो गया कि लोग Karen से बचने के लिए उसके काम खुद ही करने लगे। ये तो हर भारतीय दफ्तर में देखा-सुना किस्सा है – “भैया, स्टेशनरी चाहिए? खुद ही ले आओ, वरना मैडम का मूड देखने जाओ।”

मीठे का मोह: जब ऑफिस में बंटता था स्नैक्स

मालिक जब भी Costco जैसी बड़ी दुकान से लौटते, तो स्नैक्स का डिब्बा—कभी ग्रेनोला बार, कभी स्निकर्स—ऑफिस किचन में रख देते, सबके लिए। पर Karen का क्या कहना! जैसे ही डिब्बा आया, वो दौड़ लगाती और जितना हाथ में आ सके, उठा लेती—चुपचाप अपनी दराज में छुपा देती। एक बार दुकान के वर्कर Kevin ने हँसते हुए कहा, “अगर Karen को पता चल गया, तो हमारे लिए कुछ बचेगा ही नहीं!” और सच में, पूरा बॉक्स मिनटों में खाली!

यहाँ एक कमेंट करने वाले ने खूब लिखा, "कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें खाने और कंट्रोल में बड़ी समस्या होती है—जा जितना मिले, सब समेट लो, बाकी किसी की चिंता नहीं!"

मीठा बदला: जब लालच ने काटा

मूल कहानी का मज़ा तो तब आया, जब Karen ने अपने रौब के चक्कर में हद पार कर दी। हुआ यूँ कि एक दिन उसने लेखा प्रभारी की टेबल से टैक्स नोटिस वाली चिट्ठी खोल ली (जो कंपनी पॉलिसी के खिलाफ था), और मालिक के पास जाकर ऐसे पेश की जैसे प्रभारी ने कोई बड़ी गलती कर दी हो। पर असल में सरकार की गलती थी, और सब चुटकियों में सुलझ गया। लेकिन अब तो प्रभारी का सब्र टूट चुका था—"अब तो देखना ही पड़ेगा!"

कुछ समय बाद किस्मत ने मौका दिया। Karen ऑफिस से बाहर थी, मालिक उसकी टेबल पर क्लिप्स ढूंढ रहे थे, तभी प्रभारी ने मदद करने के बहाने उसकी दराज खोल ली—और वहाँ निकला ‘खजाना’! दर्जनों स्निकर्स और कैंडी बार! मालिक समझ गए कि हर बार स्नैक्स क्यों खत्म हो जाते हैं।

एक कमेंट में कोई लिखता है, "ऐसा लगता है जैसे राज्य सरकार की टैक्स गलती ने एक बुरी स्थिति से बाहर निकलने में मदद कर दी!"

करारा सबक: अब टॉफी सबकी, 'रानी' की नहीं

Karen जब लौटी तो उसकी दराज खाली! चेहरा सफेद, आँखों में हैरानी! तभी मालिक ने बुलाया–“Karen, ज़रा ऑफिस आना।” पूछताछ हुई, तो उसने सफाई दी कि "मैं सबसे ज्यादा मेहनत करती हूँ, तो मेरा हक ज्यादा है।" मालिक ने झाड़ लगाई, लिखित चेतावनी दी और नियम बना दिया—अब जब भी स्नैक्स आएंगे, Karen एक दिन बाद ही ले पाएगी, और पहले सबको लेना होगा।

सबसे मज़ेदार बात—मालिक ने सारे कैंडी वर्कशॉप के लड़कों में बाँट दी। Kevin अगले दिन बोला, "इतनी मीठी स्निकर्स मैंने कभी नहीं खाई!"

एक और कमेंट में किसी ने कहा, "ऐसे लोगों को तो मीठी नहीं, कड़वी हार का स्वाद ही अच्छा लगता है।"

भारतीय दफ्तरों में ये कहानी क्यों इतनी सच्ची लगती है?

हमारे यहाँ भी ऑफिस पॉलिटिक्स, खाने की लूट और 'रंगबाज़' सहकर्मी आम बात है। कभी-कभार कोई चायवाला बिस्कुट कम पड़ जाए, तो पूरा ऑफिस उसी की चर्चा करता है! और ऐसे लोग, जो खुद को सबसे ऊपर समझते हैं, अक्सर किसी न किसी दिन अपनी ही चाल में फँस जाते हैं। जैसा एक पाठक ने लिखा, "करमा तो तुरंत ही आ गया, कैंडी का भंडाफोड़ होते ही!"

निष्कर्ष: आपके ऑफिस में भी है कोई 'Karen'?

कहानी से सीख यही है—दफ्तर हो या घर, सबके लिए सोचो, वरना मीठा भी कड़वा बन जाता है! क्या आपके ऑफिस में भी कोई 'Karen' है जो स्नैक्स या क्रेडिट की लूट करती है? या कभी आपने किसी को ऐसा सबक सिखाया है? अपने अनुभव नीचे कमेंट में जरूर शेयर करें—शायद अगली कहानी आपकी हो!


मूल रेडिट पोस्ट: Power-tripping receptionist gets no candy