ऑफिस का 'केविन अंकल': छह साल पुरानी अफ़वाह और छुट्टियों की जद्दोजहद
हमारे हिंदुस्तानी दफ्तरों में एक न एक "केविन अंकल" तो जरूर होते हैं — जो हर अफवाह को पक्की खबर बना देते हैं, और बदलती पॉलिसी को लेकर हमेशा परेशान रहते हैं। आज की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, पर ये किस्सा है अमेरिका के एक रिटेल दवा स्टोर से, जहां दो शिफ्ट सुपरवाइजर - जिनमें से एक हैं लगभग सत्तर के केविन अंकल - छुट्टियों की गणना और कंपनी की पुरानी पॉलिसी को लेकर उलझे हुए हैं।
अब आप सोच रहे होंगे, अमेरिका की कहानी में हमें क्या मज़ा आएगा? जनाब, इंसानियत और दफ्तर के किस्से सरहदों के पार एक जैसे ही होते हैं। चलिए, केविन अंकल की छुट्टियों की टेंशन के बहाने, हम भी अपने ऑफिस के किस्सों को याद कर लेते हैं!
छुट्टियों का गुणा-भाग: अमेरिकी सिस्टम, देसी समझ
अमेरिका के इस रिटेल स्टोर में छुट्टियों (Paid Time Off, PTO) का सिस्टम कुछ-कुछ हमारे PF या CL/EL जैसा है — जितना काम, उतनी छुट्टी। मान लीजिए, अगर कोई हफ्ते में 40 घंटे काम करता है, तो उसे कुल घंटों का 10% छुट्टी के तौर पर मिल जाता है। यानी 40 घंटे काम, 4 घंटे छुट्टी। अगले हफ्ते अगर 35 घंटे काम, तो 3.5 घंटे छुट्टी जुड़ जाती है।
अब हमारे केविन अंकल को यह चिंता सताए जा रही थी कि कहीं कंपनी उनकी पुरानी छुट्टियां जब्त तो नहीं करने वाली? उन्होंने अपनी सीनियर सुपरवाइजर बहनजी (जो इस कहानी की लेखिका हैं) से बार-बार पूछा — "बहनजी, कितनी छुट्टी अगले साल ले जा सकते हैं? कहीं लिमिट तो नहीं लग गई?"
उन्होंने उन्हें समझाया, "अंकल, ऐसी लिमिट वाली पॉलिसी छह साल पहले सोची थी कंपनी ने, लेकिन फिर उसे रद्द कर दिया। जब मेरा पहला बच्चा होने वाला था, उसी दौरान ये अफवाह थी। जब मैं मैटरनिटी लीव से लौटी, तब तक वो पॉलिसी गायब हो चुकी थी।"
लेकिन, केविन अंकल मानें तब न! अगली ही सुबह, उन्होंने वही सवाल अगले सुपरवाइजर से पूछ डाला। ऑफिस में खड़े-खड़े, बहनजी ने फिर से याद दिलाया — "अंकल, कल ही बताया था, छह साल पहले वाली पॉलिसी कब की खत्म हो गई। अब कोई लिमिट नहीं है।"
अब भैया, केविन अंकल दो दिन छुट्टी पर चले गए, पर बहनजी को पूरा यकीन है कि लौटकर वही सवाल फिर दोहराएँगे!
हर ऑफिस में एक "केविन": उम्र का तकाजा या आदत?
हमारे यहां भी ऐसे कई अंकल-टाइप कर्मचारी मिलते हैं, जो हर नई अफवाह को दिल से लगा लेते हैं। कोई कह दे PF कटने वाला है, तो अगले दिन HR का घेराव शुरू! कोई बोले प्रमोशन के लिए नया फॉर्म भरना है, तो पूरी फाइलिंग निकल आए।
रेडिट पर भी कई लोगों ने इस बात पर चर्चा की। एक यूजर ने लिखा, "लगता है अंकल को भूलने की बीमारी या डिमेंशिया तो नहीं?" तो कुछ ने कहा, "सत्तर साल की उम्र में कौन इतनी टेंशन लेता है, रिटायर क्यों नहीं हो जाते?"
लेखिका ने बताया कि केविन अंकल के बेटे ने साफ कह दिया है कि उनके पिता बिल्कुल स्वस्थ हैं, बस रिटायर होने का नाम नहीं लेते। अब ये तो वही बात हो गई — "बूढ़ा बैल हल छोड़ दे, पर आदत कहाँ जाती है!"
मुश्किलें समझाने में, या समझने में?
कुछ लोग सुझाव दे रहे थे कि केविन अंकल को लिखकर समझा दो। जैसे हमारे यहां बड़े-बूढ़ों को पेंशन या बैंक की बातें नोटबुक में लिखकर समझाते हैं। लेकिन लेखिका ने जवाब दिया, "अंकल पढ़ते ही नहीं, या पढ़ना नहीं चाहते।"
अब इसमें गलती किसकी? कई बार उम्र के साथ-साथ कुछ आदतें पक्की हो जाती हैं — जैसे बार-बार पूछना, या दूसरों की बातों पर यकीन न करना। एक कमेंट में किसी ने कहा, "शायद अंकल किसी अनुभवी (यानी उम्रदराज़) महिला की बात मानने से हिचक रहे हों, इसलिए बार-बार किसी पुरुष या उम्रदराज़ सहकर्मी से पुष्टिकरण चाहते हैं।"
यह बात हमारे दफ्तरों में भी खूब दिखती है — "अरे बेटा, HR वाला लड़का बोले तो ही मानेंगे, वरना नहीं!"
उम्र और अनुभव: सम्मान या झुंझलाहट?
इस पूरी कहानी में सबसे बड़ी सीख यही मिलती है कि उम्रदराज़ सहकर्मियों के साथ हमें धैर्य और सम्मान से पेश आना चाहिए। कई रेडिट यूजर्स ने लिखा, "अगर किसी को भूलने की दिक्कत हो, तो हमें ज्यादा गुस्सा नहीं करना चाहिए।"
हमारे यहां तो बड़ों का आदर करना बचपन से सिखाया जाता है — "बड़ों की बात मानो, लेकिन उन्हें भी समझाओ कि बदलाव को अपनाना जरूरी है।"
केविन अंकल जैसे लोग बदलाव से डरते नहीं, बस आदतें छोड़ना मुश्किल लगता है। और क्या पता, छुट्टियों की चिंता में छुपा हो रिटायरमेंट का डर — "कहीं घर बैठना न पड़े!"
निष्कर्ष: आपका ऑफिस का "केविन" कौन है?
दोस्तों, क्या आपके दफ्तर में भी कोई केविन अंकल हैं, जो छुट्टियों, PF, या पॉलिसी को लेकर हमेशा परेशान रहते हैं? या कोई ऐसी बुआजी, जो हर मैनेजर की बात पर सवाल उठाती हैं?
ऐसी कहानियां हर दफ्तर में रोज़ घटती हैं। जरूरी है, हम सब मिलकर एक-दूसरे को समझें, थोड़ा सब्र दिखाएं, और साथ-साथ थोड़ा हंसी-मजाक भी करें — आखिर ऑफिस की असली रौनक इन्हीं किस्सों से है!
आपके ऑफिस में कौन सा किस्सा सबसे मजेदार रहा? नीचे कमेंट में जरूर बताएं। और अगर कोई केविन अंकल की तरह छुट्टियों की चिंता में डूबा हो, तो उसे ये कहानी जरूर सुनाएं!
मूल रेडिट पोस्ट: Again Kevin, That Was Scraped 6 Years Ago