ऑनलाइन नीलामी में बॉट को पटखनी: बच्चों की जीप वैगन पर ₹14,000 ज़्यादा खर्च करवाना!
भइया, आजकल ऑनलाइन नीलामी (ऑक्शन) भी किसी महाभारत के युद्ध से कम नहीं! पहले तो सोचा था कि बच्चों के लिए एक जीप वैगन सस्ते में मिल जाएगी, लेकिन नीलामी की दुनिया में घुसते ही असली खेल समझ आया। ज़रा सोचिए, आप एक बढ़िया चीज़ पर बोली लगाते हैं और सामने से कोई बॉट (या फिर कोई 'चतुर' आदमी) हर बार आपकी बोली से थोड़ी ज़्यादा लगाता जाता है। गुस्सा त तो आएगा ही!
बॉट बनाम इंसान: नीलामी का नया रणक्षेत्र
जैसे ही हमारे नायक (रेडिट यूज़र u/SmallDickGnarly) ने देखा कि $600 (लगभग ₹50,000) वाली बच्चों की जीप वैगन की बोली केवल $5 से शुरू हुई है, उन्होंने भी तुरन्त बोली लगा दी। लेकिन अगले कुछ दिनों में खेल बदला—हर बार उनकी बोली के ठीक 75 सेंट ऊपर कोई और बोली लग रही थी, और वो भी तुरंत! अब भई, हमारे देश में तो ऐसे हालात में लोग कहते हैं, "इसमें कोई गड़बड़ है गांधी!" यानी साफ़ था कि या तो कोई बॉट ऑटोमैटिकली बोली लगा रहा है, या फिर कोई बहुत ही फुर्तीलाल इंसान है।
कई घंटे लड़ाई के बाद जब बोली $90 तक पहुंची, तब भी वो बॉट (या बॉट जैसे इंसान) आगे था। लेकिन हमारे हीरो ने हार नहीं मानी, उन्होंने $150 की बोली लगा दी। फिर भी सामने वाले ने $150.75 के साथ जवाब दे दिया! आखिरकार, आखिरी पाँच मिनट में, बोली $770 तक पहुंच गई, और बॉट ने $770.75 की बोली लगा दी। अंत में जीप बॉट के नाम रही, लेकिन अब बेचारे बॉट को 20% टैक्स और फीस के साथ लगभग $1,000 (₹83,000) की चपत लग गई!
नीलामी के दंगल में 'छोटी बदला' और जनता की प्रतिक्रियाएँ
अब इस किस्से को इंटरनेट की भाषा में 'Petty Revenge' यानी 'छोटा बदला' कहते हैं। खुद लेखक भी मानते हैं—“शायद ये petty revenge हो, लेकिन मजा तो आया!” भई, हमारे यहां भी तो कहते हैं, "नाच न जाने आँगन टेढ़ा!" जब सामने वाला सिस्टम की कमज़ोरी का फायदा उठाए, तो एक बार उसको उसी की भाषा में जवाब देना भी जरूरी है।
इस कहानी पर Reddit की जनता ने भी खूब मज़ेदार टिप्पणियां कीं। एक यूज़र (u/Hermit-Gardener) ने बताया कि उन्होंने भी अमेज़न पर एक किताब बेचने का ऐसा ही खेल खेला था—हर बार कीमत कम की, जब सामने वाले ने $1 की कीमत लगाई, तो खुद ही खरीद ली! और फिर अपनी किताब की कीमत वापस $95 कर दी। भाई, यह तो वही बात हुई—"सांप भी मर जाए, और लाठी भी न टूटे!"
एक और कमेंट में बताया गया कि कई बार ऑक्शन साइट्स खुद भी बॉट्स से दाम बढ़वाती हैं, ताकि ज्यादा पैसा वसूला जा सके। भारत में भी लोग OLX या Quikr पर 'फर्जी' खरीदार या सेलर बनकर दाम बढ़ाते देखे गए हैं। एक यूज़र ने लिखा, "ये बॉट नहीं, ऑटो-बिडिंग सिस्टम था। सामने वाले ने शायद 800 डॉलर तक की मैक्स बोली पहले से सेट कर रखी थी, इसलिए वो हर बार आगे निकल जाता था।"
ऑनलाइन नीलामी के कुछ देसी सबक
इस किस्से से कुछ बढ़िया सबक मिलते हैं, जो हमारे देसी पाठकों को जरूर ध्यान में रखने चाहिए:
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ऑटो-बिडिंग सिस्टम से सावधान: कई बार लगता है कि कोई इंसान सामने है, लेकिन असल में सिस्टम खुद बोली बढ़ा रहा होता है। देसी भाषा में—"कहीं ऐसा न हो कि आप अपने ही पैसे से खुद को मात दे रहे हों!"
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नीलामी में जोश नहीं, होश रखें: आखिर में, अगर सामने वाले की बोली हद से ज्यादा चली जाए, तो पीछे हटना बेहतर है। नहीं तो, "ना रहेगा बांस, ना बजेगी बांसुरी!"
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छोटी बदला की मिठास: कई बार सामने वाले को उसकी चाल में फंसाना बड़ा सुकून देता है। जैसे एक कमेंट में कहा गया, "आज तो बॉट की जेब खाली करवा दी!"
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नीलामी की असली माया: चाहे Amazon हो, eBay हो या कोई देसी प्लेटफॉर्म—ऑटो-बिडिंग, बॉट्स और कमाल की चालाकी हर जगह है। बस, हर बार 'छोटी बदला' का मौका भी मिल सकता है!
अंत में: आपकी नीलामी का अनुभव कैसा रहा?
भाइयों-बहनों, क्या आपने कभी ऑनलाइन नीलामी में ऐसी कोई जुगाड़ या चालाकी आज़माई है? या कभी बॉट/ऑटो-बिडिंग के चक्कर में फंस गए हों? नीचे कमेंट में जरूर बताएं—क्योंकि आखिर, "हास्य और सीख दोनों बांटने से बढ़ते हैं!"
अगर आपको यह किस्सा मजेदार लगा हो, तो दोस्तों के साथ शेयर करें और अगली बार जब ऑक्शन साइट खोलें, तो बॉट्स से दो-दो हाथ करने के लिए तैयार रहें!
मूल रेडिट पोस्ट: I took a gamble and made a bot spend $170 more on a Jeep Wrangler Wagon than its original MSRP