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एक झटपट नाश्ता और छोटी सी बदला: नौसेना के जवानों की मस्तीभरी कहानी

नौसेना के चाउ हॉल में भव्य नाश्ते का सिनेमाई दृश्य, दोस्ती और सुबह की ऊर्जा को दर्शाता है।
नौसेना के चाउ हॉल में सुबह के नाश्ते का सुखद दृश्य, जहाँ दोस्ती और स्वादिष्ट भोजन दिन की शुरुआत को संजीवनी देते हैं।

कहते हैं, सेना में अनुशासन जितना जरूरी है, उतनी ही जरूरी है वहां की मस्ती और आपसी खट्टी-मीठी शरारतें। हर डिपार्टमेंट में एक ऐसा इंसान जरूर होता है, जिसे अपनी काबिलियत का कुछ ज़्यादा ही गुमान होता है। आज की कहानी ऐसे ही एक 'तेज-तर्रार' नौसैनिक 'डैन' और उसके दोस्तों की है, जिसमें नाश्ते पर खा गया उसका छोटा सा झटका, और सबने उसे उसी की भाषा में जवाब दे दिया। इस किस्से में हंसी, बदला, और दोस्ती – सब कुछ है, जो आपको अपने कॉलेज या ऑफिस के दिनों की याद दिला देगा।

जब 'भाई साहब' को थी सबसे ज्यादा जल्दी – और सब जानते थे सच्चाई

यह किस्सा है तब का जब हमारी नौसेना की टीम एक मिशन से लौट रही थी। सफर में एक वायुसेना बेस पर रुकना पड़ा – पेट्रोल-डीजल भरवाने के लिए, और साथ ही सुबह-सुबह पेट पूजा के लिए। अब सुबह का वक्त था और पेट में चूहे दौड़ रहे थे, तो सबका ध्यान सीधा मेस (चौहॉल) की ओर था।

हमारे ग्रुप में 'डैन' नाम का एक साथी था (नाम बदला हुआ है), जो हर काम में आगे – अपने आप को बाकी सबसे बड़ा समझने वाला! उस दिन भी, बिना वजह अपनी सीनियरिटी दिखाते हुए, डैन सबसे आगे लाइन में घुस गया और बोला, "मुझे जल्दी खाना है, फ्लाइट्स के टर्न-अराउंड में मदद करनी है।" बात झूठ थी, सबको पता था! अगर एयरक्राफ्ट में वाकई कोई दिक्कत होती तो हम सबको पहले ही खबर मिल जाती।

लाइन में 'ली' (ये भी बदला हुआ नाम) सबसे आगे था, मैं उसके पीछे। ली और डैन एक ही डिपार्टमेंट के थे – इलेक्ट्रिकल वाले, और मैं एयरफ्रेम्स शॉप का। डैन ने झूठ बोलकर लाइन काटी, और खाना लेने सबसे पहले पहुंच गया।

जब नाम ही बन गया 'छेड़छाड़' का जरिया

अब वायुसेना बेस पर खाना लेने के लिए एक रजिस्टर पर नाम-पता लिखना पड़ता था। डैन ने बड़े गर्व से फॉर्म भरा – "स्मॉल, डैन ए. AE2 VF-XXXX" (मतलब नाम, रैंक, और यूनिट नंबर)। ली ने शरारती मुस्कान के साथ वही नाम हूबहू लिख दिया – "स्मॉल, डैन ए. AE2 VF-XXXX"। मुझे भी मौका मिल गया, मैंने भी वही नाम लिख दिया। फिर तो बाकी सबने भी यही किया।

यानि, हर किसी ने रजिस्टर पर अपना नाम छोड़ डैन का नाम लिख दिया! उस वक्त सबको बड़ा मज़ा आया और सब हंसते-हंसते भूल भी गए।

'डैन' के लिए 67 नाश्ते – और सबकी हंसी का मज़ा

कुछ हफ्ते बाद, हमारी यूनिट की मीटिंग में अचानक एक अनाउंसमेंट हुआ। पता चला, मेस के रिकॉर्ड में 67 बार "स्मॉल, डैन ए. AE2 VF-XXXX" लिखा मिला – यानी डैन साहब के नाम पर 67 नाश्ते। और तो और, पेमेंट सर्विस डिपार्टमेंट (PSD) ने डैन के अकाउंट से पूरे 67 नाश्तों के पैसे काट लिए!

अब सोचिए, 30 साल पहले 235 डॉलर कोई छोटी रकम नहीं थी। पूरी यूनिट हंसी से लोट-पोट हो गई। हमारे कमांडिंग ऑफिसर (CO) भी मुस्कुरा दिए, बोले – "सब अपना-अपना हिस्सा चुका देना भाई," और सबने मिलकर डैन को पैसे लौटा दिए। लेकिन दो हफ्ते तक डैन साहब के चेहरे के भाव देखने लायक थे!

कम्युनिटी के मज़ेदार कमेंट्स – मस्ती, बदला और दोस्ती की मिसाल

ये कहानी Reddit पर पोस्ट हुई तो कमेंट्स की बाढ़ आ गई। एक यूज़र ने चुटकी ली, "लगता है तुम सब 'पेट्टी' ऑफिसर्स थे!" (पेट्टी – मतलब छोटी-छोटी हरकतें करने वाले, और ये नौसेना में एक रैंक भी है)। पोस्ट करने वाले ने जवाब दिया, "बिल्कुल! हम सब सेकंड क्लास पेट्टी ऑफिसर्स ही थे।" सबने मिलकर डैन को 'हल्का' सबक सिखाया, कोई बुराई नहीं की, बस दोस्ताना अंदाज़ में उसकी अकड़ निकाल दी।

एक और कमेंट आया, "मुझे अच्छा लगा कि ये कहानी बदले के साथ-साथ दोस्ती और अपनापन भी दिखाती है। डैन थोड़ा अड़ियल था, पर असल में अच्छा इंसान था।" पोस्ट करने वाले ने भी यही कहा – "हां, डैन बढ़िया लड़का था, बस कभी-कभी उसकी हवा निकालनी जरूरी थी।"

किसी ने लिखा, "ऐसी जुगाड़ और हल्की बदमाशी देखकर मन खुश हो गया! उम्मीद है दुनिया देख रही है कि हमारी मिलिट्री में कितने जुगाड़ू और चालाक लोग हैं।" वहीं, किसी और ने मस्ती में कहा, "ऐसी कहानियां तो 'ह्यूमर इन यूनिफॉर्म' जैसी मैगजीन में छपनी चाहिए।"

एक कमेंट में बढ़िया लाइन लिखी – "अगर पंगा नहीं लेगा, तो पंगा नहीं मिलेगा!" यही तो है, अपने-अपने ऑफिस या कॉलेज की लाइफ का फंडा!

भारतीय नजरिए से – ऑफिस और दोस्तों की शरारतें

सोचिए, हमारे अपने ऑफिस में भी कई बार ऐसा होता है – कोई सहकर्मी अपनी सीनियरिटी दिखाकर चाय के ब्रेक में सबसे आगे घुस जाता है या मीटिंग में खुद को सबसे बड़ा एक्सपर्ट बताने लगता है। ऐसे में पूरी टीम मिलकर छोटी-सी शरारत कर देती है – कभी 'बर्थडे पार्टी' के नाम पर केक कटवा देना, तो कभी व्हाट्सएप ग्रुप पर मजेदार मीम्स बना देना! असल में, यही छोटे-छोटे पल हैं जो दोस्ती की मिठास बनाए रखते हैं।

यह कहानी हमें सिखाती है कि कभी-कभी छोटी-सी बदला भी रिश्तों में हंसी, अपनापन और यादगार पल लेकर आता है। और सबसे जरूरी – दोस्ती और टीमवर्क में, थोड़ी-बहुत मस्ती चलती रहती है।

निष्कर्ष – आप भी सुनाइए अपनी कहानी!

तो दोस्तों, कैसी लगी आपको ये नौसेना के दोस्तों की नाश्ते वाली 'प्यारी बदला' की कहानी? क्या आपके ऑफिस या कॉलेज में भी किसी ने ऐसे ही किसी घमंडी दोस्त को हल्का सबक सिखाया है? नीचे कमेंट्स में अपने मजेदार किस्से जरूर शेयर करें। क्या पता, अगली बार आपकी कहानी भी यहां पढ़ने को मिले!

याद रखिए, जिंदगी में अनुशासन जरूरी है, लेकिन हंसी-मजाक और अपनापन भी उतना ही जरूरी है। आखिरकार, यादें वही सबसे मीठी होती हैं, जिनमें थोड़ी-बहुत शरारत और ढेर सारी हंसी हो!

आपकी अपनी कोई दिलचस्प ऑफिस या यूनिवर्सिटी की शरारत? कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए!


मूल रेडिट पोस्ट: Enjoy your breakfast.