आग के अलार्म के बीच बार क्यों बंद है? होटल की रात की सबसे अजीब फरियादें
होटल में काम करना वैसे ही कम रोमांचक नहीं होता, लेकिन जब आधी रात को आग का अलार्म बज जाए, तो माहौल में अचानक बॉलीवुड के थ्रिलर की तरह ट्विस्ट आ जाता है। ऐसे में आप सोचेंगे कि सभी मेहमान जल्दी-जल्दी बाहर भागेंगे, लेकिन जनाब, असली ड्रामा तो तब शुरू होता है जब कुछ लोग ऐसे सवाल दागते हैं कि सुनकर हंसी और हैरानी दोनों आ जाए।
होटल की रात: जब आग का अलार्म बजा और बार की याद आई
32 मंज़िला, 400 कमरों वाले होटल में जब आधी रात को फायर अलार्म बजा, तो फ्रंट डेस्क वाले साहब (जो अब इन हालातों में खुद को 'कंफर्टेबल' मानते हैं!) अलर्ट मोड में आ गए। इमरजेंसी चाबी उठाई, रिपोर्ट प्रिंट की, स्पीकर पर अनाउंसमेंट किया, और फायर ब्रिगेड का इंतजार करने लगे।
इसी बीच, धीरे-धीरे मेहमान नीचे लॉबी में आने लगे, कोई डर के मारे, कोई नींद में झल्लाए हुए। फ्रंट डेस्क पर चार लोगों को एक साथ शांत कराने की कोशिश चल ही रही थी कि अचानक एक गंजा साहब सबको धक्का मारते हुए काउंटर तक पहुंचे और जोर से चिल्लाए – “बार क्यों बंद है???”
सब हक्के-बक्के रह गए। लगता था मानो कोई शादी-ब्याह का सीन चल रहा हो और दूल्हे को दही-चीनी न मिले तो बुरा मान जाए! फ्रंट डेस्क वाले ने भी कमाल का धैर्य दिखाते हुए जवाब दिया, “सर, बार तो एक घंटे पहले ही बंद हो गया था।”
गंजे साहब जिद पर अड़े: “आप ऐसा नहीं कर सकते! मैं एक इन्श्योरेंस एजेंट हूं!”
अब बताइए, आग लगी है या बार की चिंता! बाकी मेहमान उन साहब को ऐसे देख रहे थे जैसे किसी ने IPL मैच के बीच टीवी बंद कर दिया हो। आखिरकार, वो साहब बड़बड़ाते हुए चले गए।
जब आग लगी हो, तब भी कुछ लोग खुद की दुनिया में ही रहते हैं
ऐसी ही एक और मजेदार घटना हुई जब दो महिलाएँ, फायर अलार्म के बीच, फ्रंट डेस्क से अपनी कार मंगवाने की जिद करने लगीं। भाई, आग-आग का माहौल है, लोग जान बचाकर भाग रहे हैं, और इन्हें अपनी कार की चिंता है!
फ्रंट डेस्क वाले ने भी तंज कसते हुए कहा, “मैम, अभी हम कुछ और ज़रूरी चीज़ों में व्यस्त हैं।”
इन घटनाओं को देखकर सच में लगता है, जैसे कुछ लोग बॉलिवुड की फिल्मों के एक्स्ट्रा की तरह बस अपने ही रोल में मग्न रहते हैं, चाहे आगे क्या ही ड्रामा चल रहा हो।
मेहमानों की सोच: "हमने इसके लिए पैसे नहीं दिए!"
रेडिट पर एक यूज़र ने कमाल की बात कही – "आग के अलार्म के बीच एक मेहमान ने फोन कर के कहा – 'मैंने इसके लिए पैसे नहीं दिए हैं!'"
सोचिए, जैसे होटल में हर सर्विस का बिल लिया जाता है, वैसे आग के अलार्म का भी बिल लगेगा!
एक और यूज़र ने मज़ाकिया अंदाज में सुझाव दिया, "कह दीजिए, ये होटल की तरफ से फ्री है, कंप्लीमेंट्री!"
हमारे यहाँ तो कहावत है – ‘जितने लोग, उतनी बातें!’ ऐसे मेहमानों से निपटना किसी कस्टमर सर्विस वाले के लिए रोज़मर्रा की जद्दोजहद है।
नींद में खलल और दिमागी उलझन
कुछ लोगों की हालत तो ऐसी हो जाती है कि नींद में उठते ही अजीब हरकतें करने लगते हैं। एक रेडिट यूज़र ने किस्सा सुनाया कि कैसे किसी ने ज्यादा दवा या नशे में होटल में हंगामा कर दिया—एक साहब तो कपड़े उतारकर लॉबी में दौड़ रहे थे, पुलिस पीछा कर रही थी!
सोचिए, अगर हमारे यहाँ ऐसा हो जाए तो व्हाट्सएप ग्रुप और कॉलोनी के लोग अगले साल तक गप मारते रहेंगे।
असली खतरा और जिम्मेदारी
अक्सर होटल स्टाफ को ये भी झेलना पड़ता है कि मेहमान बार-बार पूछते हैं – "क्या ये असली आग है? हमें सच में बाहर जाना पड़ेगा क्या?"
एक कमेंट में किसी ने अच्छा लिखा – "सेफ्टी प्रोटोकॉल है कि जब तक फायर ब्रिगेड ना कहे, सबको बाहर निकलना चाहिए – चाहे असली आग हो या फॉल्स अलार्म।"
हमारे यहाँ भी मोहल्ले में जब फायर अलार्म बज जाए, तो सब बाहर आकर पहले पूछते हैं – “असली है या बच्चों ने फिर मजाक किया?”
आखिर में – होटलवाले भी इंसान हैं, जादूगर नहीं!
इन सारी कहानियों को सुनकर यही लगता है कि होटल स्टाफ का काम किसी जादूगर से कम नहीं। हर दिन कुछ नया, कुछ अलग।
जैसे हमारे देश में ग्राहक भगवान माने जाते हैं, वैसे ही होटल वाले भी दिन-रात भगवान भरोसे ही काम करते हैं – कभी गुस्सैल मेहमान, कभी अजीब फरमाइशें, कभी अचानक आई इमरजेंसी।
आपका क्या अनुभव रहा है? कभी होटल में ऐसी कोई अजीब घटना हुई हो या किसी मेहमान को देखकर हंसी रोकनी पड़ी हो? कमेंट में जरूर बताएं। और याद रखें – अगली बार जब होटल जाएं, तो फायर अलार्म बजते ही बार की चिंता छोड़कर सीढ़ियों की तलाश करें!
मूल रेडिट पोस्ट: Weird thing to say during a fire alarm