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अधूरी टैटू और अधूरी दोस्ती: बॉस के धोखे का अनोखा बदला

एक महिला की कार्टून-शैली 3डी चित्रण, जो अधूरे टैटू पर विचार कर रही है, जीवन के निर्णयों में असमंजस का प्रतीक।
इस जीवंत कार्टून-3डी दृश्य में, हमारी नायिका अपने अधूरे टैटू के महत्व पर विचार कर रही है, यह दर्शाते हुए कि जीवन के निर्णय लेते समय ध्यान देना कितना जरूरी है। यह दृश्य हमारे उस कहानी का सार perfectly व्यक्त करता है जिसमें जोखिम उठाने और रास्ते में सीखे गए पाठों का जिक्र है।

कहते हैं, “सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे”—कभी-कभी जिंदगी हमें ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देती है जहां हम चाहकर भी अपना गुस्सा सीधे नहीं दिखा सकते। लेकिन, इंसान जुगाड़ू है, भले ही वो अमेरिका में हो या अपने देसी मोहल्ले में। आज की कहानी है एक ऐसी ‘प्यारी’ बॉस और उसके असली चेहरे की, जिसे जानकर शायद आप भी कहेंगे—“वाह, क्या बदला लिया!”

जब बॉस ने दिखाया असली रंग: भरोसे का टूटा पुल

सोचिए, आपका बॉस आपको अच्छी नौकरी देता है, घर में रहने का ऑफर देता है, और ऊपर से आपके प्रेमी को भी नौकरी दिलाने का वादा करता है। लगता है जैसे कोई फरिश्ता मिल गया! लेकिन, ये कहानी है डायना नाम की ‘बॉस’ की, जो असल में शराब की बोतल में डूबी थी और धोखे की दुकान चला रही थी।

हमारी मुख्य किरदार (लेखिका) को लगा, सबकुछ पटरी पर है। दुकान की बिक्री आसमान छूने लगी, स्टाफ खुश, फेसबुक की जिम्मेदारी भी मिल गई। लेकिन दीदी डायना तो अपनी ही दुनिया में थीं—सुबह-सुबह कॉफी में रम मिलाना, चोरी करना और आफिस के सामान से घर सजाना। ऊपर से, जिस दुकान का सारा श्रेय हमारी लेखिका को मिलना चाहिए था, डायना ने उसमें भी खोट निकाल दी।

निकाली गई नौकरी और टूटी दोस्ती: कबाड़ से भी सस्ते रिश्ते

सोचिए, जिस इंसान पर आपने सबसे ज्यादा भरोसा किया, वही आपकी पीठ में छुरा घोंप दे। ठीक वैसे ही, डायना ने हमारी लेखिका को ऐसी-वैसी वजहों से नौकरी से निकालने में अहम भूमिका निभाई, जिनके बारे में खुद लेखिका ने ही उसे बताया था—मतलब ‘सीधा-साधा’ बनकर ‘चाणक्य नीति’ खेलना!

और दो दिन पहले ही, डायना ने घर से निकालने की भी चेतावनी दे दी। अब दोनों का सामान बांधना और दूसरे राज्य में जाना मजबूरी हो गया। ऐसे में भरोसे का रिश्ता कबाड़ से भी सस्ता निकला।

अधूरी टैटू का अनोखा बदला: “अब खुद ही बनाओ दोस्ती के पेड़ की डाली”

कहते हैं, “जैसा बोओगे, वैसा काटोगे।” तो जब डायना ने धोखा दिया, हमारी लेखिका ने भी एकदम देसी स्टाइल में बदला ले लिया—अधूरी टैटू छोड़कर!

असल में, एक रात डायना नशे में थी और कुछ अजीब-ओ-गरीब बातें कर रही थी। लेखक ने उसे शांत करने के लिए उसकी बांह पर एक टैटू बनाना शुरू किया—तीन शाखाओं वाला पेड़, जिसमें दोस्ती के तीन हिस्से (डायना, लेखिका, और प्रेमी) जुड़े थे। लेकिन टैटू पूरी नहीं हुई, तीनों शाखाएं अलग-अलग ही रह गईं।

जब सबकुछ खत्म हो गया, डायना ने मैसेज किया—“मेरी टैटू पूरी कर दो!” अब भला, जो इंसान आपके विश्वास को तार-तार कर दे, उसके लिए कोई क्या ही कर सकता है? लेखिका ने एकदम बॉलीवुड स्टाइल में ‘ना’ कह दिया—जैसा रिश्ता, वैसी टैटू—अधूरी!

कम्युनिटी की चुटकी: “अब तो पेड़ पर झाड़ू बाँध दो!”

रेडिट की जनता ने भी इस बदले पर जमकर मजे लिए। एक कमेंट में किसी ने लिखा—“अगर तुम्हें टैटू पूरी करनी है, तो बीच में बड़ा सा गंजा सिर बना दो, या फिर ‘कोई पछतावा नहीं’ (No Regrets) की जगह ‘कोई समझदारी नहीं’ लिख दो!” किसी ने तो सलाह दी कि पेड़ की शाखाओं को सूखा और मुरझाया हुआ बना दो और साथ में शराबियों के लिए हेल्पलाइन नंबर लिख दो।

सबसे मजेदार बात ये रही कि डायना ने मैसेज कर के खुद को बेचारी दिखाने की कोशिश की—“मेरी जिंदगी बर्बाद हो गई, मेरी नौकरी भी गई!” लेकिन, अब तो भरोसा भी अधूरा, टैटू भी अधूरी और दोस्ती भी अधूरी!

अधूरी दोस्ती का सबक: “सीखो, किससे दोस्ती करनी है!”

इस पूरी कहानी से अपने देसी पाठकों के लिए नसीहत यही है—सब अंडे एक ही टोकरी में मत रखो। रिश्ते और नौकरी दोनों में थोड़ा सावधान रहना जरूरी है। और अगर कोई दोस्ती की आड़ में धोखा दे, तो उसका ‘टैटू’ अधूरा छोड़ना ही सबसे अच्छा बदला है!

तो अगली बार जब कोई बॉस या दोस्त बहुत मीठा बन रहा हो, ज़रा सोचिए—कहीं वो भी तो डायना नहीं!

क्या आपके साथ भी कभी किसी ने ऐसा ‘अधूरा काम’ किया है? नीचे कमेंट में जरूर बताइए—आपका जवाब किसी को अगला बदला लेने की प्रेरणा दे सकता है!


मूल रेडिट पोस्ट: Won't finish her tattoo