रेगिस्तान की बेटियाँ: जब शर्म पर जीत मिली और पहचान वापस पाई
हमारे समाज में बेटियाँ अक्सर दोहरी जंग लड़ती हैं—एक घर के भीतर पिता और भाई की उम्मीदों से, और दूसरी बाहर अनजान लोगों की नजरों से। ऐसी ही एक कहानी है, जो न सिर्फ दिल छूती है बल्कि सोच बदलने को भी मजबूर करती है। यह कहानी है एक बेटी की, जिसने पिता के डर, शर्म और समाज के ताने के आगे झुकने की बजाय खुद को वापस पाया, और वो भी सबके सामने, पूरे आत्मविश्वास के साथ।