बॉस की बदतमीज़ी का अनोखा बदला: 'ग्लिटर' वाला धन्यवाद कार्ड!
कभी-कभी दफ्तर की ज़िंदगी ऐसी हो जाती है कि इंसान अपने आप को रोज़-रोज़ कीचड़ में घिरा महसूस करता है। ऊपर से अगर बॉस खुद 'खड़ूसों के सरदार' निकले तो समझ लीजिए कि मानसिक शांति की छुट्टी! लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसे बॉस को बदला भी ऐसा मिल जाए कि न कानूनी पचड़ा, न कोई झंझट, बस सीधा-सीधा सालों तक चुभता रहे? आज की कहानी में कुछ ऐसा ही हुआ है—जिसे पढ़कर आप भी सोचेंगे, "वाह, क्या जुगाड़ है!"